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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hathras News ›   Puri Rath Yatra will be a reality of the tableau

फिर साकार होगी पुरी की रथयात्रा की झांकी

Thu, 14 Apr 2016 12:15 AM IST
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 14 Apr 2016 12:15 AM IST
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हाथरस। शहर में श्रीरामनवमी के दिन पुरी की विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथयात्रा की झांकी एक बार फिर साकार होगी। तिमंजिला रथ में बैठकर जब मूंछों वाले रामजी माता सीता के साथ शहर भ्रमण पर निकलेंगे तो उनके रथ के रस्से खींचने के लिए भक्तों में होड़ मचेेगी। यह शहर की सबसे पुरानी रथयात्रा है। 135 साल से यह रथयात्रा धूमधाम से निकाली जा रही है। चैत्र नवरात्र की नवमी के दिन हर वर्ष चामड़ गेट स्थित गमेल वाली बगीची से बैंड-बाजे और आकर्षक झांकियों के साथ यह रथयात्रा शुरू होती है। पुराने लोग बताते हैं कि यह रथयात्रा शहर की अस्मिता और सम्मान की भी प्रतीक है।
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कहते हैं कि सालों पहले नगर के सेठ बैनीराम पोद्दार वृंदावन की प्रसिद्ध रंगनाथ रथयात्रा में शामिल होने अपने अर्दलियों के साथ बग्गी में बैठकर गए थे। अर्दलियों ने भीड़ को यह कहते हुए हट जाने को कहा कि हटिए सेठ जी आ रहे हैं। तभी भीड़ में से किसी ने यह व्यंग कसते हुए कहा कि ऐसे ही सेठ हैं तो अपने हाथरस में रथ क्यों नहीं निकलवा लेते। यह बात सेठ बैनीराम पोद्दार को चुभ गई। उन्होंने हाथरस आकर अनेक कारीगरों को लगाकर एक तिमंजिला रथ बनवाया और रामनवमी के दिन इस रथयात्रा की शुरुआत की। तब से यह मेला निरंतर निकाला जा रहा है। हर वर्ष मेले में खासी भीड़ उमड़ती है। रथ पर चामड़ गेट स्थित गमेल की बगीची के प्रसिद्ध मूंछों वाले श्रीराम और सीता जी के विग्रह विराजमान किए जाते हैं। शहर भ्रमण के बाद बैनीराम बाग में भव्य आतिशबाजी होती है। 
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-हाथरस की यह सबसे प्राचीन रथयात्रा है। मूंछों वाले राम की एकमात्र यही शोभायात्रा शहर में निकाली जाती है। तिमंजिला रथ रंगाई-पुताई कर तैयार करा दिया गया है। राम नवमी के दिन 15 अप्रैल को रथयात्रा शहर में धूमधाम से निकाली जाएगी। 

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- तुलसी प्रसाद पोद्दार, मेला प्रबंधक। 

-यह रथयात्रा राजनीतिक नहीं है। इसमें किसी राजनीतिक व्यक्ति और नेता को बुलाया नहीं जाता, लेकिन जो भी अपनी स्वेच्छता से इसमें शामिल होते हैं उनका पूरा सम्मान किया जाता है। आकर्षक झांकियां व पटा पटेनी का प्रदर्शन विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है। 
-गोविंद पोद्दार, मेला सहयोगी। 
 

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