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हिरनों के लिए कराएं पानी का प्रबंध
अमर उजाला, हाथरस
Updated Sat, 25 Feb 2017 10:58 PM IST
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सफेद हिरन का बच्चा।
- फोटो : अमर उजाला
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वन्य जीव संरक्षण समिति के अध्यक्ष वीरपाल सिंह ने प्रभागीय वनाधिकारी को एक शिकायत सौंपी है। इसमें ग्रीष्मकालीन अवधि को दृष्टिगत रखते हुए वन्य जीव क्षेत्र में पानी पहुंचाए जाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर पानी की व्यवस्था करने की मांग की है।
पीने के पानी के अभाव में बीते वर्षों में मृत हिरनों और वन्य जीवों की मौत की घटना का हवाला दिया गया है। गौरतलब है कि डीएम भी पूरे अमले के साथ पिछले दिनों सिकंदराराऊ में संरक्षित क्षेत्र का भ्रमण कर चुके हैं और वहां वन्य जीवों के लिए पानी की व्यवस्थाओं को देख चुके हैं।
प्रभागीय वनाधिकारी को सौंपी शिकायत में कहा गया है कि संरक्षित वन्य क्षेत्र टटी डंडिया में ग्रीष्मकालीन अवधि को दृष्टिगत रखते हुए वन्य जीव क्षेत्र में दूर-दूर तक पानी-चारे की कोई व्यवस्था नहीं है। पानी-चारे की तलाश में अधिकांश हिरन जंगल को छोड़कर गांव की तरफ जाते हैं।
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इसी प्रयास में वह कुत्तों के शिकार हो जाते हैं। विगत वर्ष में कई घटनाएं इस प्रकार की हुई हैं, इसलिए स्मरण रहे कि मार्च 2017 में भी यह समस्या उत्पन्न होने की संभावना है, इसलिए वन्य जीवों के लिए पानी की व्यवस्था अति शीघ्र कराई जाए, जिससे गरमी के कारण वन्य जीवों की जान जाने से बचाई जा सके।
समिति के अध्यक्ष ने पत्र में कहा है कि गांव टटी डंडिया का विशाल जंगल दो नालों अलीगढ़ डिवीजन गंगा नहर से जुड़ा है। जो कपसिया नाला और टीकरी कलां माइनर पर है। दोनों माइनरों की सफाई कराकर वन्य जीव क्षेत्र में पानी पहुंचाया जा सकता है, जिससे वन्य जीवों की पीने के पानी की समस्या का समाधान हो सकता है।
शिकायत में संरक्षित क्षेत्र में लगातार कुत्तों का आतंक बढ़ने की जानकारी दी गई है, जिसके लिए ठोस कार्य योजना तैयार कर कार्रवाई की आवश्यकता बताई गई है। शिकायत की एक प्रति डीएम को भी भेजी गई है।
- संरक्षित क्षेत्र टटी डंडिया में वन्य जीवों के पीने के पानी के लिए दो पक्के तालाब और दो कच्चे तालाब बनवाए जा रहे हैं। वन्य जीवों की सुरक्षा का पूरा प्रबंध किया जाएगा।
- मधुकर दयाल, डीएफओ हाथरस
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पीने के पानी के अभाव में बीते वर्षों में मृत हिरनों और वन्य जीवों की मौत की घटना का हवाला दिया गया है। गौरतलब है कि डीएम भी पूरे अमले के साथ पिछले दिनों सिकंदराराऊ में संरक्षित क्षेत्र का भ्रमण कर चुके हैं और वहां वन्य जीवों के लिए पानी की व्यवस्थाओं को देख चुके हैं।
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प्रभागीय वनाधिकारी को सौंपी शिकायत में कहा गया है कि संरक्षित वन्य क्षेत्र टटी डंडिया में ग्रीष्मकालीन अवधि को दृष्टिगत रखते हुए वन्य जीव क्षेत्र में दूर-दूर तक पानी-चारे की कोई व्यवस्था नहीं है। पानी-चारे की तलाश में अधिकांश हिरन जंगल को छोड़कर गांव की तरफ जाते हैं।
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इसी प्रयास में वह कुत्तों के शिकार हो जाते हैं। विगत वर्ष में कई घटनाएं इस प्रकार की हुई हैं, इसलिए स्मरण रहे कि मार्च 2017 में भी यह समस्या उत्पन्न होने की संभावना है, इसलिए वन्य जीवों के लिए पानी की व्यवस्था अति शीघ्र कराई जाए, जिससे गरमी के कारण वन्य जीवों की जान जाने से बचाई जा सके।
समिति के अध्यक्ष ने पत्र में कहा है कि गांव टटी डंडिया का विशाल जंगल दो नालों अलीगढ़ डिवीजन गंगा नहर से जुड़ा है। जो कपसिया नाला और टीकरी कलां माइनर पर है। दोनों माइनरों की सफाई कराकर वन्य जीव क्षेत्र में पानी पहुंचाया जा सकता है, जिससे वन्य जीवों की पीने के पानी की समस्या का समाधान हो सकता है।
शिकायत में संरक्षित क्षेत्र में लगातार कुत्तों का आतंक बढ़ने की जानकारी दी गई है, जिसके लिए ठोस कार्य योजना तैयार कर कार्रवाई की आवश्यकता बताई गई है। शिकायत की एक प्रति डीएम को भी भेजी गई है।
- संरक्षित क्षेत्र टटी डंडिया में वन्य जीवों के पीने के पानी के लिए दो पक्के तालाब और दो कच्चे तालाब बनवाए जा रहे हैं। वन्य जीवों की सुरक्षा का पूरा प्रबंध किया जाएगा।
- मधुकर दयाल, डीएफओ हाथरस