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Hathras News: खेतों में आलू की खुदाई शुरू, परिषदीय स्कूलों से गायब हुए बच्चे

Sat, 28 Feb 2026 02:52 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 28 Feb 2026 02:52 AM IST
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Potato digging begins in the fields, children disappear from council schools
मजदूरों के साथ आलू बीनते बच्चे। संवाद - फोटो : samvad
जिले में आलू की खुदाई का काम शुरू होते ही शिक्षा व्यवस्था की सेहत बिगड़ने लगी है। ग्रामीण क्षेत्रों के परिषदीय स्कूलों में पिछले एक सप्ताह के भीतर छात्र उपस्थिति में 15 से 20 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। खेतों में मजदूरी में हाथ बंटाने के लिए बच्चे स्कूल जाने के बजाय ''''आलू के खेत'''' का रुख कर रहे हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने जब ग्रामीण अंचल के स्कूलों की पड़ताल की, तो नजारा चौंकाने वाला था। कई स्कूलों में जहां पहले उपस्थिति 80-90 फीसदी रहती थी। वहां अब उपस्थिति का ग्राफ 60 फीसदी के आसपास सिमट गया है। शिक्षकों का कहना है कि आलू बेल्ट वाले क्षेत्रों में यह समस्या हर साल आती है, लेकिन इस बार खुदाई ने रफ्तार पकड़ी है, जिससे उपस्थिति तेजी से गिरी है।ग्रामीण क्षेत्रों में आलू की खुदाई के दौरान मजदूरों की भारी किल्लत हो जाती है। ऐसे में अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने के बजाय उन्हें खेतों में आलू बीनने के काम में लगा देते हैं।
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विद्यालय -- सामान्य उपस्थिति फीसदी में -- वर्तमान उपस्थिति फीसदी में -- गिरावट फीसदी में

प्राथमिक विद्यालय-- 85 -- 65 -- 20
उच्च प्राथमिक विद्यालय -- 80 -- 65 -- 15

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जिले में कुल विद्यालयों की संख्या - 1235

जिले कुल शिक्षकों की संख्या - 4000
जिले में शिक्षामित्रों की संख्या - 1350

जिले में अनुदेशकों की संख्या - 250
जिले में कुल विद्यार्थियों की संख्या - 1 लाख 10 हजार करीब

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स्कूलों में सन्नाटा, खेतों में रौनक

सुबह 9 बजते ही जहां स्कूलों में प्रार्थना की गूंज होनी चाहिए, वहां सन्नाटा पसरा रहता है। वहीं, स्कूल के ठीक बगल वाले खेतों में बच्चे टोकरियां लेकर आलू बटोरते नजर आते हैं। शिक्षकों द्वारा घर-घर जाकर संपर्क करने के बाद भी अभिभावक बच्चों को भेजने को तैयार नहीं हैं, जिससे आगामी परीक्षाओं की तैयारी पर भी संकट मंडरा रहा है।
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केस-1: संविलियन विद्यालय गढ़ी तमना (नगर क्षेत्र) में आलू की खुदाई का सीधा असर दिखा। यहां कक्षा 6 से 8 तक कुल 61 बच्चे नामांकित हैं, जिनमें से कागजों में 37 बच्चे उपस्थित दर्शाए गए। जब कक्षावार उपस्थिति देखी गई तो कक्षा 6 में 22 में से 11 बच्चे उपस्थित मिले। कक्षा 7 में 20 में से 12 बच्चे उपस्थित मिले।कक्षा 8 में 19 में से 14 बच्चे उपस्थित मिले। मौके पर मौजूद बच्चों की संख्या कागजी आंकड़ों से भी काफी कम प्रतीत हुई।
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केस-2: संविलियन विद्यालय दयानतपुर में कक्षा 1 से 8 तक कुल 76 बच्चों में से 51 बच्चे उपस्थित दिखाए गए। मौके पर संख्या काफी कम दिखी। विद्यालय का भवन जर्जर होने और एक कमरे में पुताई का काम चलने के कारण बच्चे खुले में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर दिखे। संसाधनों के अभाव और सीजन की मार ने उपस्थिति पर दोहरा प्रहार किया है।

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केस-3: पूर्व माध्यमिक विद्यालय पीहुरा में उपस्थिति की सबसे भयावह तस्वीर देखने को मिली। यहांं कक्षा 6 से 8 तक कुल 31 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। विद्यालय के रिकॉर्ड में चाहे जो भी हो, लेकिन पड़ताल के समय मौके पर मात्र एक छात्रा उपस्थित मिली। 30 बच्चे स्कूल से नदारद थे, जो सीधे तौर पर आलू की खुदाई में व्यस्तता की ओर इशारा करते हैं।
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