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Hathras News: शकीला के हाथों से बने दीपकों से रोशन होगी दीपावली
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दीपक बनातीं शकीला। संवाद
- फोटो : Samvad
प्रशांत भारती
हाथरस। इस बार दीपावली पर केवल पारंपरिक मिट्टी के दीये ही नहीं, बल्कि गाय के गोबर और प्राकृतिक पदार्थों से बने इको-फ्रेंडली दीपक भी घर-आंगन को जगमग करेंगे। इस अनूठी और पर्यावरण-अनुकूल पहल का नेतृत्व कर रही हैं शकीला खानम। उनके साथ जुड़ी ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल कायम कर रही हैं।
वर्ष 2017 में गठित दुर्गा माता मंदिर स्वयं सहायता समूह, कटेलिया से जुड़ी महिलाएं आज पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक स्वावलंबन का उदाहरण पेश कर रही हैं। शकीला खानम के नेतृत्व में इस समूह में कुल 11 महिलाएं सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। यह समूह मुख्य रूप से गाय के गोबर से आकर्षक एवं पर्यावरण-अनुकूल दीपक बनाने का काम कर रहा है। समूह की महिलाओं की मेहनत का ही नतीजा है कि वे हर महीने लगभग 40,000 से 50,000 गोबर के दीये तैयार कर लेती हैं। स्थानीय बाजार में एक दीपक 50 पैसे में बिक रहा है। संवाद
ई-कॉमर्स साइट पर पांच से छह रुपये में बिक रहा एक दीया
स्थानीय बाजार के अलावा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी इन दीपकों की जबरदस्त मांग है। प्रसिद्ध ई-कॉमर्स साइट पर एक दीपक पांच से छह रुपये में बिक रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों से मिल रहे ऑनलाइन ऑर्डर के कारण समूह की पहुंच अब राष्ट्रीय स्तर पर बन चुकी है।
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हर महिला कमा रही 12 से 15 हजार रुपये महीना
इस कुटीर उद्योग और ऑनलाइन-ऑफलाइन बिक्री के माध्यम से समूह की आय में भारी बढ़ोतरी हुई है। आज समूह की प्रत्येक सदस्य महिला प्रति माह 12,000 से 15,000 तक की कमाई कर रही है। इससे न केवल उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधरी है, बल्कि वे अपने पैरों पर खड़ी होकर आत्मनिर्भर भी बनी हैं।
- हमारा प्रयास है कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना त्योहारों की खुशियां फैलाएं। स्थानीय बाजार से लेकर ई-कॉमर्स वेबसाइटों से मिले रिस्पॉन्स ने हमारी पूरी टीम का हौसला कई गुना बढ़ा दिया है। - शकीला खानम, संचालिका, दुर्गा माता मंदिर स्वयं सहायता समूह, कटेलिया
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हाथरस। इस बार दीपावली पर केवल पारंपरिक मिट्टी के दीये ही नहीं, बल्कि गाय के गोबर और प्राकृतिक पदार्थों से बने इको-फ्रेंडली दीपक भी घर-आंगन को जगमग करेंगे। इस अनूठी और पर्यावरण-अनुकूल पहल का नेतृत्व कर रही हैं शकीला खानम। उनके साथ जुड़ी ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल कायम कर रही हैं।
वर्ष 2017 में गठित दुर्गा माता मंदिर स्वयं सहायता समूह, कटेलिया से जुड़ी महिलाएं आज पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक स्वावलंबन का उदाहरण पेश कर रही हैं। शकीला खानम के नेतृत्व में इस समूह में कुल 11 महिलाएं सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। यह समूह मुख्य रूप से गाय के गोबर से आकर्षक एवं पर्यावरण-अनुकूल दीपक बनाने का काम कर रहा है। समूह की महिलाओं की मेहनत का ही नतीजा है कि वे हर महीने लगभग 40,000 से 50,000 गोबर के दीये तैयार कर लेती हैं। स्थानीय बाजार में एक दीपक 50 पैसे में बिक रहा है। संवाद
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ई-कॉमर्स साइट पर पांच से छह रुपये में बिक रहा एक दीया
स्थानीय बाजार के अलावा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी इन दीपकों की जबरदस्त मांग है। प्रसिद्ध ई-कॉमर्स साइट पर एक दीपक पांच से छह रुपये में बिक रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों से मिल रहे ऑनलाइन ऑर्डर के कारण समूह की पहुंच अब राष्ट्रीय स्तर पर बन चुकी है।
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हर महिला कमा रही 12 से 15 हजार रुपये महीना
इस कुटीर उद्योग और ऑनलाइन-ऑफलाइन बिक्री के माध्यम से समूह की आय में भारी बढ़ोतरी हुई है। आज समूह की प्रत्येक सदस्य महिला प्रति माह 12,000 से 15,000 तक की कमाई कर रही है। इससे न केवल उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधरी है, बल्कि वे अपने पैरों पर खड़ी होकर आत्मनिर्भर भी बनी हैं।
- हमारा प्रयास है कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना त्योहारों की खुशियां फैलाएं। स्थानीय बाजार से लेकर ई-कॉमर्स वेबसाइटों से मिले रिस्पॉन्स ने हमारी पूरी टीम का हौसला कई गुना बढ़ा दिया है। - शकीला खानम, संचालिका, दुर्गा माता मंदिर स्वयं सहायता समूह, कटेलिया