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यूपी: हाथरस के स्कूलों की बदहाली का सच, दीवारों पर छाई सीलन, छतों से टपकते पानी के बीच पढ़ रहे बच्चे

Fri, 21 Aug 2026 10:35 AM IST
Chaman Kumar Sharma राघवेंद्र प्रताप सिंह, अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
राघवेंद्र प्रताप सिंह, अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Fri, 21 Aug 2026 10:35 AM IST
सार

यह महज बदहाल भवनों की तस्वीर नहीं, बल्कि उन बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल है, जिनके लिए स्कूल ही भविष्य की पहली सीढ़ी है। बारिश के इस मौसम में जर्जर विद्यालयों की यह स्थिति प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच का फासला भी उजागर कर रही है। 

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plight of government schools in Hathras
ईंटों पर बैठकर पढ़ते बच्चे - फोटो : संवाद

विस्तार

बारिश की बूंदों के बीच सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले नौनिहालों की जिंदगी भी खतरे में है। संवाद न्यूज एजेंसी की पड़ताल में हाथरस जिले के कई परिषदीय विद्यालयों के भवन बेहद जर्जर हालत में मिले। इनकी दीवारों पर जबरदस्त सीलन है और छतों से बारिश का पानी टपकता है। साफ मौसम में तो शिक्षक बच्चों को कमरों में बैठाने के बजाय बरामदों, पेड़ों की छांव और खुले आसमान के नीचे कक्षाएं लगाकर पढ़ा लेते हैं, लेकिन बारिश होते ही कक्षाएं उजड़ जाती हैं और पढ़ाई चौपट हो जाती है। 

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यह महज बदहाल भवनों की तस्वीर नहीं, बल्कि उन बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल है, जिनके लिए स्कूल ही भविष्य की पहली सीढ़ी है। बारिश के इस मौसम में जर्जर विद्यालयों की यह स्थिति प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच का फासला भी उजागर कर रही है। 

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जो विद्यालय भवन जर्जर हो गए हैं, सरकार से धनराशि मिलते ही उनकी मरम्मत कराई जाएगी। जिन भवनों में बारिश का पानी टपक रहा है, उनकी जांच के लिए डीएम ने टीम बनाई है। टीम अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, उसके अनुरूप कार्यवाही की जाएगी।-गिरिराज सिंह, प्रभारी बीएसए

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नगला सिंगी प्राथमिक विद्यालय की दीवारों पर सीलन - फोटो : संवाद

पूर्व माध्यमिक विद्यालय मीरपुर: सचिवालय के एक हॉल में सिमटा पूरा स्कूल
सादाबाद क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक विद्यालय मीरपुर की कक्षाएं पिछले दो वर्षों से पंचायत सचिवालय के महज एक हॉल में चल रही हैं। मीरपुर सहित बिचपुरी, लोकेरा और मोनिया गांव से आने वाले छात्र-छात्राओं को एक ही हॉल में बैठाकर पढ़ाना शिक्षकों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसके अलावा बारिश में सचिवालय तक जाने वाले 100 मीटर कच्चे रास्ते पर जलभराव और कीचड़ के कारण बच्चे आए दिन फिसलकर चोटिल हो रहे हैं।

पूर्व माध्यमिक विद्यालय नहरोई: टपकते पानी के बीच पढ़ रहे बच्चे
पूर्व माध्यमिक विद्यालय नहरोई में बारिश के मौसम में जर्जर भवन बच्चों के लिए आफत बन गया है। विद्यालय के चार कमरों में से दो इतने खतरनाक हैं कि उन पर शिक्षकों को बाकायदा प्रवेश निषेध की चेतावनी का परचा चिपकाना पड़ा है। कार्यालय की दीवारों में भी दरारें आ चुकी हैं। कमरों में टपकते पानी और सीलन के बावजूद बच्चों को वहीं बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। यहां कुल 23 बच्चे पंजीकृत हैं। अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं।

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संविलियन विद्यालय कपूरा में खुले में पढ़ते बच्चे - फोटो : संवाद

कंपोजिट विद्यालय कुंवरपुर: बरामदे व खुले मैदान में लग रहीं कक्षाएं
कंपोजिट विद्यालय कुंवरपुर में 206 बच्चे पंजीकृत हैं, जिन्हें पढ़ाने के लिए आठ शिक्षक, तीन अनुदेशक और एक शिक्षामित्र तैनात हैं। विद्यालय की जर्जर इमारत ध्वस्तीकरण की कागजी प्रक्रिया में उलझी है। वर्तमान में सुरक्षित बचे केवल चार कमरों के भवन में ही पूरे स्कूल का संचालन किया जा रहा है। बच्चों की संख्या अधिक होने और कमरों की कमी के कारण शिक्षकों को मजबूरन कई कक्षाएं बाहर बरामदे और खुले मैदान में लगानी पड़ रही हैं। बारिश शुरू होते ही बच्चों और शिक्षकों की भागदौड़ मच जाती है और पढ़ाई पूरी तरह से ठप हो जाती है।

संविलियन विद्यालय कपूरा: पेड़ों के नीचे भविष्य गढ़ रहे बच्चे
संविलियन विद्यालय कपूरा में हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक हैं। विद्यालय का मुख्य भवन पहले ही ढह चुका है और वर्तमान में बमुश्किल दो कमरे ही बचे हैं। भवन ढहने के बाद भी प्रशासन आज तक विद्यार्थियों के बैठने के लिए कोई ठोस वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कर सका है। कुल 169 पंजीकृत विद्यार्थियों और सात शिक्षकों वाले इस स्कूल में बच्चों को खुले आसमान और पेड़ों के नीचे बैठकर पढ़ना पड़ रहा है। हद तो यह है कि आंगनबाड़ी केंद्र का अपना भवन न होने के कारण उन छोटे-छोटे मासूम बच्चों को भी इसी खुले मैदान में जमीन पर बैठना पड़ रहा है।

प्राथमिक विद्यालय धातुरा कलां: चहारदीवारी गायब, स्कूल में घूम रहे गोवंश
प्राथमिक विद्यालय धातुरा कलां में कक्षा एक से पांच तक कुल 30 बच्चे पंजीकृत हैं और चार शिक्षक तैनात हैं। विद्यालय में छह कमरों की व्यवस्था तो है, लेकिन मुख्य गेट के पास स्थित पुराना जर्जर भवन ध्वस्त होने के बाद से विद्यालय की एक तरफ की बाउंड्रीवॉल पूरी तरह गायब है। चहारदीवारी न होने का फायदा उठाकर निराश्रित गोवंश विद्यालय परिसर में घुस आते हैं। इससे कक्षाओं में पढ़ाई कर रहे छोटे बच्चों की सुरक्षा पर हर वक्त खतरा मंडराता रहता है।

प्राथमिक विद्यालय नगला सिंगी: छतों से टपक रहा पानी
प्राथमिक विद्यालय नगला सिंगी में जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण जलभराव है। विद्यालय में 54 बच्चे पंजीकृत हैं, जिन्हें दो शिक्षक और तीन शिक्षामित्र पढ़ाते हैं। यहां छत पर लगाया गया रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम आफत का कारण बन गया है। सिस्टम के सही से काम न करने के कारण बारिश का पानी छत पर जमा हो रहा है, जिससे कक्षाओं की छतों और दीवारों में सीलन आ गई है। छतों से पानी टपकने और सीलन की बदबू के बीच ही बच्चों को पढ़ना पड़ रहा है।

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