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Holi 2023: होली के रंगों में भीगेगा शहर, पर इस गांव में लोग रंगो से रहते हैं कोसों दूर, यह है मामला
Mon, 06 Mar 2023 03:38 AM IST
चमन शर्मा
गौरव भारद्वाज
गौरव भारद्वाज
Published by: चमन शर्मा
Updated Mon, 06 Mar 2023 03:38 AM IST
सार
हाथरस के लाडपुर में होली के दिन एक महिला सती हुई थी। महिला ने यह श्राप दिया था कि यहां धुलेंडी के दिन होली नहीं खेली जाएगी। तब से लोग आज भी इस रिवाज को निभाते हैं।
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लाडपुर स्थित केशवराय महाराज का मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जहां पूरा देश आठ मार्च को धुलेंडी के दिन होली के रंगों में भीगेगा, तो वहीं हाथरस शहर के दस किमी दूर गांव लाडपुर में धुलेंडी के दिन लोग रंगों से दूर रहेंगे। यहां होली वाले दिन होली नहीं खेली जाती है, बल्कि अगले दिन होली खेली जाती है। किवदंती है कि लाडपुर में होली के दिन एक महिला सती हुई थी। महिला ने यह श्राप दिया था कि यहां धुलेंडी के दिन होली नहीं खेली जाएगी। तब से लोग आज भी इस रिवाज को निभाते हैं।
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गांव के बुजुर्ग कहते हैं कि कस्बा लाडपुर में चौधरी अचल सिंह गांव की जायदाद के मालिक थे। इनके दो पुत्र लखन सिंह और विजयपाल सिंह थे। विजयपाल कहीं घूमने गए थे। उन्हें सांप ने डंस लिया। उनकी पत्नी ने पति के साथ सती होने का निर्णय लिया। ग्रामीणों और ससुरालवालों ने विरोध कर उन्हें ऐसा करने से रोका। होली की दौज के दिन महिला ने सगे संबंधियों और अन्य ग्रामीणों से सती होने की गुहार लगाई। ससुराल वालों व ग्रामीणों के साथ महिला ने गांव में परिक्रमा की।
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उसके बाद महिला को उस जगह पर ले गए, जहां पति को दफनाया गया था। उसके बाद महिला ने समाधि पर बैठकर कुछ बातें भी कहीं। उसके बाद पति की समाधि की सात परिक्रमा लगाई। अपने हाथों को रगड़ा, तो उनसे चिंगारी निकलने लगी। इसके बाद महिला सती हो गई। तब से इसी जगह पर धुलेंडी के दिन केशवराय जी महाराज का मेला लगता है। दौज को सती मेला लगता है। वहां ग्रामीण अपने बच्चों का मुंडन कराते हैं।
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इसके बाद पंचमी तक खेली जाएगी होली
धुलेंडी के अगले दिन से गांव लाडपुर में होली की शुरुआत होती है। जो कि पंचमी तक चलती है। यहां गुड़ की भेली लटकाई जाती है। उसकी महिलाएं रखवाली करती है। पुरुष उस गुड़ की भेली को ले जाने का प्रयास करते हैं। इस दौरान लठ्ठमार होली खेली जाती है।
गांव में काफी समय पहले महिला सती हुई थी। उसी समय से यहां धुलेंडी के दिन होली नहीं खेली जाती है। धुलेंडी के अगले दिन होली खेली जाती है। इस रीति रिवाज को लोग निभा रहे हैं। - डॉ. बंगाली सिंह, पूर्व सांसद
हमारे गांव में महिला के सती होने के चलते होली नहीं खेली जाती है। सती मइया का मेला लगता है। खास बात यह है कि धुलेंडी के बाद होली होती है। जोकि पंचमी तक खेली जाती है। - जगदीश प्रसाद ग्रामीण
होली न खेलने की परंपरा काफी समय से है। होली पर केशवराय जी महाराज की शोभायात्रा निकलती है। धुलेंडी के अगले दिन लोग होली खेलते हैं। जोकि उत्सव पंचमी तक चलता है। - फतेह सिंह ग्रामीण
ब्रज की देहरी कहे जाने वाले हाथरस के लाडपुर में धुलेंडी के दिन होली नहीं खेली जाती। धुलेंडी के बाद लठ्ठमार होली होती है। सती की याद में मेला भी लगता है। - रतन सिंह, ग्रामीण