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Hathras News: सेवा प्रदाता एजेंसी को नोटिस, तीन दिन में मांगा जवाब
Wed, 01 Jul 2026 02:42 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Wed, 01 Jul 2026 02:42 AM IST
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प्रतीकात्मक चित्र।
- फोटो : Archive
परिषदीय विद्यालयों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्री-प्राइमरी बच्चों को पढ़ाने के लिए शुरू हुई एजुकेटरों की भर्ती प्रक्रिया विवादों में घिर गई है। बीएसए रणवीर सिंह ने 30 जून को विकास भवन में आयोजित होने वाले साक्षात्कारों को स्थगित कर दिया है। संबंधित सेवा प्रदाता कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब तलब किया है।
बता दें कि जिले में ईसीसी एजुकेटर के 80 पदों पर चयन होना है। सेवायोजन पोर्टल पर रेंडमाइजेशन प्रक्रिया के बाद सेवा प्रदाता कंपनी द्वारा 240 अभ्यर्थियों की सूची 15 मई को बीएसए कार्यालय को उपलब्ध कराई गई थी। भर्ती प्रक्रिया शुरू होते ही अभ्यर्थियों ने कट-ऑफ पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। मामला प्रशासनिक अधिकारियों के संज्ञान में आते ही इसकी फाइल तलब कर ली गई।
इसी बीच प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए जिला समन्वयक बलवंत मौर्या से एजुकेटर भर्ती का कार्य हटाकर जिला समन्वयक निपुण को सौंप दिया गया। जब जिला समन्वयक निपुण के स्तर से सेवा प्रदाता द्वारा उपलब्ध कराई गई 240 अभ्यर्थियों की सूची का मिलान सेवायोजन पोर्टल पर उपलब्ध मूल रेंडमाइजेशन सूची से किया गया, तो अधिकारी हैरान रह गए। दोनों सूचियों के मिलान में छह अभ्यर्थियों के नामों में भिन्नता पाई गई। यानी ये छह नाम मुख्य पोर्टल की सूची में थे ही नहीं, बल्कि इन्हें गलत तरीके से शामिल कर लिया गया था। पिछले दरवाजे से चहेतों को लाभ पहुंचाने की इस कोशिश को पकड़ते ही बीएसए रणवीर सिंह का माथा ठनक गया और उन्होंने तत्काल साक्षात्कार रोककर पूरी प्रक्रिया पर ब्रेक लगा दिया।
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अभ्यर्थियों ने शुरुआत से ही बीएसए दफ्तर के कई पटल सहायकों और कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। सेवा प्रदाता कंपनी को नोटिस जारी होने के बाद विभागीय साठगांठ की कड़ियां जुड़ती दिख रही हैं। सूत्रों की मानें तो विभागीय बाबुओं की मिलीभगत के बिना पोर्टल की सूची से अलग नाम शामिल करना मुमकिन नहीं है।
अभ्यर्थियों ने मामले की विजिलेंस या उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। बीएसए रणवीर सिंह ने बताया कि गड़बड़ी पर संबंधित सेवा प्रदाता को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है। कंपनी का जवाब आने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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बता दें कि जिले में ईसीसी एजुकेटर के 80 पदों पर चयन होना है। सेवायोजन पोर्टल पर रेंडमाइजेशन प्रक्रिया के बाद सेवा प्रदाता कंपनी द्वारा 240 अभ्यर्थियों की सूची 15 मई को बीएसए कार्यालय को उपलब्ध कराई गई थी। भर्ती प्रक्रिया शुरू होते ही अभ्यर्थियों ने कट-ऑफ पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। मामला प्रशासनिक अधिकारियों के संज्ञान में आते ही इसकी फाइल तलब कर ली गई।
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इसी बीच प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए जिला समन्वयक बलवंत मौर्या से एजुकेटर भर्ती का कार्य हटाकर जिला समन्वयक निपुण को सौंप दिया गया। जब जिला समन्वयक निपुण के स्तर से सेवा प्रदाता द्वारा उपलब्ध कराई गई 240 अभ्यर्थियों की सूची का मिलान सेवायोजन पोर्टल पर उपलब्ध मूल रेंडमाइजेशन सूची से किया गया, तो अधिकारी हैरान रह गए। दोनों सूचियों के मिलान में छह अभ्यर्थियों के नामों में भिन्नता पाई गई। यानी ये छह नाम मुख्य पोर्टल की सूची में थे ही नहीं, बल्कि इन्हें गलत तरीके से शामिल कर लिया गया था। पिछले दरवाजे से चहेतों को लाभ पहुंचाने की इस कोशिश को पकड़ते ही बीएसए रणवीर सिंह का माथा ठनक गया और उन्होंने तत्काल साक्षात्कार रोककर पूरी प्रक्रिया पर ब्रेक लगा दिया।
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अभ्यर्थियों ने शुरुआत से ही बीएसए दफ्तर के कई पटल सहायकों और कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। सेवा प्रदाता कंपनी को नोटिस जारी होने के बाद विभागीय साठगांठ की कड़ियां जुड़ती दिख रही हैं। सूत्रों की मानें तो विभागीय बाबुओं की मिलीभगत के बिना पोर्टल की सूची से अलग नाम शामिल करना मुमकिन नहीं है।
अभ्यर्थियों ने मामले की विजिलेंस या उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। बीएसए रणवीर सिंह ने बताया कि गड़बड़ी पर संबंधित सेवा प्रदाता को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है। कंपनी का जवाब आने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।