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किसान के नहीं, कारोबारियों के गेहूं की खरीद
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 20 Apr 2016 12:13 AM IST
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हाथरस। गेहूं क्रय केंद्रों पर मनमानी का खेल रुक नहीं रहा। 20 दिन बीत चुके हैं, लेकिन गेहूं क्रय केंद्रों का ढर्रा ही नहीं सुधरा है। वहां अब भी किसानों का गेहूं खरीदने में आनाकानी की जा रही है, जबकि गुपचुप तरीके से प्राइवेट लोगों का गेहूं किसानों के नाम पर खरीदा जा रहा है। किसानों को उनके गेहूं पर तरह-तरह की आपत्ति लगाकर लौटाया जा रहा है।
कहीं वारदाना, कहीं लेबर तो कहीं नकदी की कमी का बहाना बनाकर किसानों का गेहूं खरीदने में आनाकानी की जा रही है। मजबूरी में किसान अपना गेहूं समर्थन मूल्य से भी कम रेट पर आढ़तियों और व्यापारियों को बेचने पर मजबूर हैं। किसान के सामने दो मजबूरी हैं। पहली उन्हें घरेलू कार्यों के लिए नकदी की सख्त जरूरत है और दूसरे क्रय केंद्र पर उनका गेहूं खरीदा ही नहीं जा रहा। अफसोस तो यह है कि इतने दिन बीतने के बावजूद प्रशासन के किसी भी अफसर ने गेहूं क्रय केंद्रों पर पहुंचकर जांच ही नहीं की है। यही वजह है कि क्रय एजेंसियों के कर्मचारियों का हौसला सातवें आसमान पर है। इधर, अभी तक लक्ष्य के मुकाबले बेहद कम गेहूं की खरीद पर शासन ने भी नाराजगी जताई है और इसमें तेजी लाने का आदेश दिया है। यह भी कहा है कि हर मुमकिन कोशिश करें कि किसानों को मूल्य समर्थन योजना का लाभ मिले और उनका ज्यादा से ज्यादा गेहूं सरकार ही खरीदे, ताकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए गेहूं बाहर से नहीं मंगवाना पड़े।
बातचीत---
मैं अपना गेहूं लेकर आया हूं। बड़ी मुश्किल में गेहूं बिकने का नंबर आया है। कई दिन से परेशान था और यहां के चक्कर काट रहा था।
-भूपेश कुमार, नगला खुशाली
हमारे नजदीकी क्रय केंद्र पर लेबर की कमी बताई जा रही है, जिस कारण वहां हमारा गेहूं तोला नहीं गया। मजबूरी में मंडी में प्राइवेट में गेहूं लेकर आना पड़ा है।
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-जयपाल सिंह, सीधामई
गेहूं क्रय केंद्रों पर व्यवस्था बिल्कुल ठीक नहीं है। वहां किसान का गेहूं तो खरीदा ही नहीं जा रहा। चोरी-छिपे कारोबारियों का गेहूं बिक रहा है। कोई इसे देखने वाला नहीं है।
-कालीचरण, सीधामई
हमारे पास का गेहूं क्रय केंद्र अभी तक चालू नहीं हुआ है। मंडी में बेशक 1,470 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर गेहूं बिक रहा है, लेकिन नकद भुगतान तो मिल रहा है।
-त्रिभुवन सिंह, नगला पोपा
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कहीं वारदाना, कहीं लेबर तो कहीं नकदी की कमी का बहाना बनाकर किसानों का गेहूं खरीदने में आनाकानी की जा रही है। मजबूरी में किसान अपना गेहूं समर्थन मूल्य से भी कम रेट पर आढ़तियों और व्यापारियों को बेचने पर मजबूर हैं। किसान के सामने दो मजबूरी हैं। पहली उन्हें घरेलू कार्यों के लिए नकदी की सख्त जरूरत है और दूसरे क्रय केंद्र पर उनका गेहूं खरीदा ही नहीं जा रहा। अफसोस तो यह है कि इतने दिन बीतने के बावजूद प्रशासन के किसी भी अफसर ने गेहूं क्रय केंद्रों पर पहुंचकर जांच ही नहीं की है। यही वजह है कि क्रय एजेंसियों के कर्मचारियों का हौसला सातवें आसमान पर है। इधर, अभी तक लक्ष्य के मुकाबले बेहद कम गेहूं की खरीद पर शासन ने भी नाराजगी जताई है और इसमें तेजी लाने का आदेश दिया है। यह भी कहा है कि हर मुमकिन कोशिश करें कि किसानों को मूल्य समर्थन योजना का लाभ मिले और उनका ज्यादा से ज्यादा गेहूं सरकार ही खरीदे, ताकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए गेहूं बाहर से नहीं मंगवाना पड़े।
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बातचीत---
मैं अपना गेहूं लेकर आया हूं। बड़ी मुश्किल में गेहूं बिकने का नंबर आया है। कई दिन से परेशान था और यहां के चक्कर काट रहा था।
-भूपेश कुमार, नगला खुशाली
हमारे नजदीकी क्रय केंद्र पर लेबर की कमी बताई जा रही है, जिस कारण वहां हमारा गेहूं तोला नहीं गया। मजबूरी में मंडी में प्राइवेट में गेहूं लेकर आना पड़ा है।
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-जयपाल सिंह, सीधामई
गेहूं क्रय केंद्रों पर व्यवस्था बिल्कुल ठीक नहीं है। वहां किसान का गेहूं तो खरीदा ही नहीं जा रहा। चोरी-छिपे कारोबारियों का गेहूं बिक रहा है। कोई इसे देखने वाला नहीं है।
-कालीचरण, सीधामई
हमारे पास का गेहूं क्रय केंद्र अभी तक चालू नहीं हुआ है। मंडी में बेशक 1,470 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर गेहूं बिक रहा है, लेकिन नकद भुगतान तो मिल रहा है।
-त्रिभुवन सिंह, नगला पोपा