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National Mango Day: सासनी के नाम से बिकने वाला आम, अब 'आम ' लोगों की पहुंच से दूर

Sat, 22 Jul 2023 01:31 AM IST
चमन शर्मा प्रशांत भारती, अमर उजाला, अलीगढ़
प्रशांत भारती, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Sat, 22 Jul 2023 01:31 AM IST
सार

सासनी का आम अब लोगों के लिए खास हो गया है। सासनी में आम की बागवानी के लिए चंपा बाग काफी मशहूर था। यह बाग लगभग 600 बीघा में था। इस बाग में लंगड़ा, चौसा, दशहरी, फजीली जैसी तकरीबन 20 तरह की आम की किस्में थीं। सासनी के आसपास करीब 80 प्रतिशत भूमि में बागवानी होती थी। वर्तमान में यह क्षेत्रफल सिमटकर 25 प्रतिशत ही रह गया है।

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Mango sold in the name of Sasni is now out of reach of aam admi
सासनी के आम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कभी सासनी के नाम से बिकने वाला आम अब ''आम'' लोगों की पहुंच से दूर होता जा रहा है। किसी समय में यहां का आम प्रदेश ही नहीं, देश के कोने-कोने में बिकता था। यहां पैदा होने वाले आम की विभिन्न प्रजाति ख्याति अर्जित कर चुकी हैं। आम खाने के शौकीन लोग सासनी के नाम से ही आम खरीदकर घर ले जाते थे, लेकिन समय के साथ सासनी के आम की चमक फीकी पड़ गई।

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सासनी का आम अब लोगों के लिए खास हो गया है। सासनी में आम की बागवानी के लिए चंपा बाग काफी मशहूर था। यह बाग लगभग 600 बीघा में था। इस बाग में लंगड़ा, चौसा, दशहरी, फजीली जैसी तकरीबन 20 तरह की आम की किस्में थीं। सासनी के आसपास करीब 80 प्रतिशत भूमि में बागवानी होती थी।
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वर्तमान में यह क्षेत्रफल सिमटकर 25 प्रतिशत ही रह गया है। वर्तमान में भूजल स्तर में गिरावट भी आम की बागवानी कम होने का बड़ा कारण मानी जा रही है। इस कारण बागों की पर्याप्त सिंचाई नहीं हो पा रही है। शासन द्वारा क्षेत्र में आम के प्रोत्साहन के लिए पर्याप्त योजनाएं भी नहीं चलाई गईं। 

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सासनी में लगातार जलस्तर कम होने से किसानों ने आम के बाग लगाना बंद कर दिया है। आम के बागों में उखटा की बीमारी भी पैदा हो गई थी, जिससे किसान ने अपने खेतों से आम के बाग कटवाकर अमरूद के बाग लगा लिए। अमरूद के बाग में पानी कम लगता है और साल में दो फसल मिलती हैं, जबकि आम से साल में एक ही फसल मिल पाती थी। -प्रकाशचंद्र शर्मा, बागवान 


आम के बाग लगातार जलस्तर कम होने के कारण घटते चले जा रहे हैं। उखटा एवं दीमक लगने से आम के पेड़ बिल्कुल नष्ट हो गए हैं, जिससे किसानों ने आम के बाग कटवाकर अमरूद के बाग लगा लिए। एक समय यहां के आम की दूर-दूर तक मांग रहती थी। लोग सासनी से निकलते तो यहां का मशहूर आम जरूर खरीदकर ले जाते थे, लेकिन अब यह गुजरे जमाने की बात हो गई। -सियाराम, किसान

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