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बंदर से टिफिन छुड़ाने में गई मजदूर की जान
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस।
Updated Thu, 13 Jul 2017 11:47 PM IST
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माौत
- फोटो : amar Ujala
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मोहल्ला बालापट्टी में प्रकाश टॉकीज के पास बंदर से टिफिन छुड़ाने के दौरान एक मजदूर हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। सूचना पर कोतवाली पुलिस पहुंच गई। वहीं परिजनों को जब हादसे का पता चला तो वे बेहाल हो गए। घटनास्थल पर परिजन देर तक विलाप करते रहे।
प्रकाश टॉकीज के बंद होने के बाद से इसमें कई कारखाने और कंपनियों के दफ्तर बने हुए हैं। यहीं ममता ट्रेडिंग कंपनी में नगला हेमा निवासी श्याम भी कार्यरत थे। गुरुवार को छुट्टी होने के बाद वह टिफिन लेकर घर की ओर जा रहे थे तभी बंदर ने उनका टिफिन झपट लिया और वह उसे लेकर टॉकीज की 10 फुट से ज्यादा ऊंची दीवार पर जा बैठा। इस दीवार के ठीक ऊपर हाईटेंशन लाइन गुजर रही है।
श्याम ने टिफिन छुड़ाने के लिए पहले कई तरह के जतन किए लेकिन बंदर ने टिफिन नहीं छोड़ा। इसके बाद श्याम ने दीवार पर चढ़ने का फैसला किया। वह किसी तरह दीवार पर चढ़ गया और बंदर से टिफिन छुड़ाने की कोशिश करने लगा। श्याम की नजर हाईटेंशन लाइन पर भी थी लेकिन बंदर को दूर भगाने की कोशिश में उसका संतुलन बिगड़ गया और नीचे गिरने से बचने के दौरान किसी तरह श्याम के दोनों हाथ हाईटेंशन लाइन से छू गए। लाइन में दौड़ रहे तेज करंट ने कुछ ही देर में श्याम की जान ले ली।
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दीवार से नीचे खड़े दूसरे मजदूर जब तक श्याम को बचाने के लिए कोई जुगत करते तब तक काफी देर हो चुकी थी। श्याम के शव को किसी तरह नीचे उतारा गया। श्याम का शव काफी झुलस चुका था इसलिए लोग उसे जिला अस्पताल भी नहीं ले गए। हादसे के बाद मौके पर श्याम के पिता लक्ष्मीनारायण पहुंचे और फिर एक-एक कर दूसरे परिजन। परिजन सड़क पर ही श्याम के गम में बिलखने लगे। हर कोई उस बंदर को मन ही मन कोस रहा था, जिसकी वजह से श्याम की जान चली गई।
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प्रकाश टॉकीज के बंद होने के बाद से इसमें कई कारखाने और कंपनियों के दफ्तर बने हुए हैं। यहीं ममता ट्रेडिंग कंपनी में नगला हेमा निवासी श्याम भी कार्यरत थे। गुरुवार को छुट्टी होने के बाद वह टिफिन लेकर घर की ओर जा रहे थे तभी बंदर ने उनका टिफिन झपट लिया और वह उसे लेकर टॉकीज की 10 फुट से ज्यादा ऊंची दीवार पर जा बैठा। इस दीवार के ठीक ऊपर हाईटेंशन लाइन गुजर रही है।
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श्याम ने टिफिन छुड़ाने के लिए पहले कई तरह के जतन किए लेकिन बंदर ने टिफिन नहीं छोड़ा। इसके बाद श्याम ने दीवार पर चढ़ने का फैसला किया। वह किसी तरह दीवार पर चढ़ गया और बंदर से टिफिन छुड़ाने की कोशिश करने लगा। श्याम की नजर हाईटेंशन लाइन पर भी थी लेकिन बंदर को दूर भगाने की कोशिश में उसका संतुलन बिगड़ गया और नीचे गिरने से बचने के दौरान किसी तरह श्याम के दोनों हाथ हाईटेंशन लाइन से छू गए। लाइन में दौड़ रहे तेज करंट ने कुछ ही देर में श्याम की जान ले ली।
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दीवार से नीचे खड़े दूसरे मजदूर जब तक श्याम को बचाने के लिए कोई जुगत करते तब तक काफी देर हो चुकी थी। श्याम के शव को किसी तरह नीचे उतारा गया। श्याम का शव काफी झुलस चुका था इसलिए लोग उसे जिला अस्पताल भी नहीं ले गए। हादसे के बाद मौके पर श्याम के पिता लक्ष्मीनारायण पहुंचे और फिर एक-एक कर दूसरे परिजन। परिजन सड़क पर ही श्याम के गम में बिलखने लगे। हर कोई उस बंदर को मन ही मन कोस रहा था, जिसकी वजह से श्याम की जान चली गई।