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Hathras News: पुलिस की कमजोर विवेचना से मुख्य आरोपी को मिली जमानत
Tue, 13 Oct 2026 01:55 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Tue, 13 Oct 2026 01:55 AM IST
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प्रतीकात्मक चित्र।
- फोटो : Archive
मुरसान क्षेत्र में 50 हजार रुपये के दोगुने नोट देने का झांसा देकर ठगी और विरोध करने पर फायरिंग करने के मुख्य आरोपी मूलचंद्र को सत्र न्यायालय से जमानत मिल गई है। पत्रावली से साफ उजागर हुआ है कि पुलिस की ढीली विवेचना, साक्ष्यों के अभाव और गंभीर चूकों की वजह से आरोपी को यह राहत मिली है।
घटना 10 सितंबर की है, जब नजीबाबाद (बिजनौर) निवासी आमिर के साथ मुरसान में ठगी की कोशिश हुई थी। आरोप था कि पकड़े जाने के दौरान आरोपी फायरिंग करते हुए भागे थे। पुलिस ने मूलचंद्र, उसके बेटे मानव व उसके दोस्त कुश के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर मूलचंद्र को गिरफ्तार किया था।
अदालत में आरोपी के अधिवक्ता ने दलील दी कि मूलचंद पूरी तरह निर्दोष है। घटना का कोई स्वतंत्र साक्षी नहीं है और वादी पक्ष को कोई चोट नहीं आई है। वादी द्वारा दो मोबाइल नंबरों से कॉल आने की बात कहने के बावजूद पुलिस अदालत में कोई कॉल डिटेल रिकॉर्ड या तकनीकी साक्ष्य पेश नहीं कर सकी। फायरिंग के आरोप के बाद भी पुलिस तमंचा बरामद करने में असफल रही।
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बचाव पक्ष ने दावा किया कि पुलिस मूलचंद और उसकी मोटरसाइकिल को घर से उठाकर लाई थी, जिसके सीसीटीवी फुटेज व फोटो उनके पास हैं। पुलिस यह विरोधाभास साफ करने में नाकाम रही कि वह अन्य आरोपियों की तलाश में वहां क्यों गई थी। इसके अलावा दो अन्य आरोपी अब तक फरार हैं। पीड़ित के हिम्मत दिखाकर आरोपी को रंगे हाथों पकड़ने के बावजूद पुलिस की सतही जांच, तकनीकी व भौतिक साक्ष्यों को जुटाने में बरती गई लापरवाही का सीधा फायदा अभियुक्त को अदालत में मिला और वह जमानत पाने में सफल रहा।
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घटना 10 सितंबर की है, जब नजीबाबाद (बिजनौर) निवासी आमिर के साथ मुरसान में ठगी की कोशिश हुई थी। आरोप था कि पकड़े जाने के दौरान आरोपी फायरिंग करते हुए भागे थे। पुलिस ने मूलचंद्र, उसके बेटे मानव व उसके दोस्त कुश के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर मूलचंद्र को गिरफ्तार किया था।
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अदालत में आरोपी के अधिवक्ता ने दलील दी कि मूलचंद पूरी तरह निर्दोष है। घटना का कोई स्वतंत्र साक्षी नहीं है और वादी पक्ष को कोई चोट नहीं आई है। वादी द्वारा दो मोबाइल नंबरों से कॉल आने की बात कहने के बावजूद पुलिस अदालत में कोई कॉल डिटेल रिकॉर्ड या तकनीकी साक्ष्य पेश नहीं कर सकी। फायरिंग के आरोप के बाद भी पुलिस तमंचा बरामद करने में असफल रही।
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बचाव पक्ष ने दावा किया कि पुलिस मूलचंद और उसकी मोटरसाइकिल को घर से उठाकर लाई थी, जिसके सीसीटीवी फुटेज व फोटो उनके पास हैं। पुलिस यह विरोधाभास साफ करने में नाकाम रही कि वह अन्य आरोपियों की तलाश में वहां क्यों गई थी। इसके अलावा दो अन्य आरोपी अब तक फरार हैं। पीड़ित के हिम्मत दिखाकर आरोपी को रंगे हाथों पकड़ने के बावजूद पुलिस की सतही जांच, तकनीकी व भौतिक साक्ष्यों को जुटाने में बरती गई लापरवाही का सीधा फायदा अभियुक्त को अदालत में मिला और वह जमानत पाने में सफल रहा।