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Hathras: दुष्कर्म के दोषी को आजीवन कारावास, पीड़िता के बयानों की सजा में रही भूमिका

Sat, 18 Jan 2025 04:26 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: चमन शर्मा Updated Sat, 18 Jan 2025 04:26 AM IST
सार

पिता ने थाने में तहरीर देकर कहा था कि उनकी सात वर्षीय बेटी 3 जून 2019 घर के बाहर खेल रही थी। तभी मोहल्ले का निवासी एक व्यक्ति उनकी बेटी को टॉफी दिलाने के बहाने अपने साथ ले गया। जब काफी देर तक उनकी बेटी वापस नहीं आई।

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Life imprisonment to the accused for raping a girl
दोषी को सजा - फोटो : प्रतीकात्मक

विस्तार

हाथरस के विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) चित्रा शर्मा के न्यायालय ने सात वर्षीय बालिका से दुष्कर्म के दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोषी पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इस बच्ची को आरोपी टॉफी दिलवाने के बहाने अपने साथ ले गया था और उसके साथ दुष्कर्म किया था। 

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अभियोजन पक्ष के अनुसार थाना सादाबाद क्षेत्र के एक गांव की रहने वाले व्यक्ति ने थाने में तहरीर देकर कहा था कि उनकी सात वर्षीय बेटी 3 जून 2019 घर के बाहर खेल रही थी। तभी मोहल्ले का निवासी एक व्यक्ति उनकी बेटी को टॉफी दिलाने के बहाने अपने साथ ले गया। जब काफी देर तक उनकी बेटी वापस नहीं आई तो वह और उनकी पत्नी उसे ढूंढते हुए आबादी से थोड़ी दूर झोपड़ी के पास पहुंचे। उन्होंने देखा कि वह व्यक्ति उनकी बेटी के साथ झोपड़ी में बुरा काम कर रहा था। 
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जैसे ही उस व्यक्ति ने उन्हें देखा तो वह भाग गया। उनकी बेटी लहूलुहान अवस्था में पड़ी थी। इस मामले में थाना सादाबाद में मुकदमा दर्ज हुआ। विवेचक ने विवेचना करते हुए घटनास्थल का निरीक्षण कर नक्शा नजरी तैयार किया। पुलिस ने न्यायालय में आरोपी के विरुद्ध आरोपपत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) चित्रा शर्मा के न्यायालय में हुई। 

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न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के उपरांत आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोषी पर 50 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड न देने पर दोषी को अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। अर्थदंड की धनराशि वसूल होने के बाद नियमानुसार बतौर प्रतिकर पीड़िता के चिकित्सकीय व्यय और पुनर्वास की पूर्ति के लिए प्रदान की जाएगी।

सात गवाहों की हुई न्यायालय में गवाही
एडीजीसी मुकेश कुमार चौधरी ने बताया कि इस प्रकरण में वादी सहित सात साक्षियों को परीक्षित कराया और उनकी गवाही से अभियुक्त को न्यायालय में दोष सिद्ध किया गया। मामले में पीड़िता के बयानों ने अभियुक्त को सजा दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

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