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Hathras News: अपनों से बढ़कर बुजुर्गों की देखभाल कर रहीं कोमल
Sat, 23 May 2026 02:17 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Sat, 23 May 2026 02:17 AM IST
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कोमल सिंह, संचालिका वृद्ध आश्रम।
- फोटो : Samvad
आज के समय में जब कई लोग अपने बुजुर्ग माता-पिता को बोझ समझकर उनसे दूरी बना लेते हैं, ऐसे दौर में कोमल सिंह अपनों से बढ़कर बुजुर्गों का सहारा बनकर सेवा की मिसाल पेश कर रही हैं। आगरा रोड पर नगला भुस स्थित वृद्ध आश्रम में वह पिछले कई वर्षों से निस्वार्थ भाव से बुजुर्गाें की देखभाल कर रही हैं और उनके जीवन को सम्मान व स्नेह से भरने का प्रयास कर रही हैं।
मूल रूप से कानपुर की रहने वाली कोमल सिंह ने बीए और एलएलबी तक की शिक्षा प्राप्त की है। करीब 10 वर्षों से बुजुर्गाें की सेवा में समर्पित कोमल की तैनाती लगभग पांच वर्ष पूर्व हाथरस के नगला भुस वृद्ध आश्रम में हुई थी। तब से उन्होंने आश्रम में रहने वाले बुजुर्गों को ही अपना परिवार मान लिया है।
कोमल सिंह केवल आश्रम की संचालिका भर नहीं हैं, बल्कि वहां रह रहे प्रत्येक वृद्ध के लिए बेटी, सहारा और संबल बन चुकी हैं। उनके रहन-सहन, खान-पान और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों का वह हर समय पूरा ध्यान रखती हैं। किसी भी बुजुर्ग की तबीयत बिगड़ने पर वह स्वयं उन्हें अस्पताल लेकर जाती हैं और इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करती हैं।
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सेवा का उनका समर्पण इतना गहरा है कि कई बार जरूरत पड़ने पर वह बुजुर्गों को अपना रक्त भी दान कर चुकी हैं। आश्रम में रहने वाली एक वृद्ध महिला के गंभीर रूप से घायल होने पर कोमल ने उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया और स्वयं रक्त देकर उनकी जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज वह महिला स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी रही हैं।
कोमल कहती हैं कि जब लोग अपने बुजुर्ग माता-पिता को अकेला छोड़ देते हैं, तब उन्हें बहुत पीड़ा होती है। उनके माता-पिता सुषमा सिंह और खेम सिंह को भी अपनी बेटी के इस सेवा भाव पर गर्व है।
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मूल रूप से कानपुर की रहने वाली कोमल सिंह ने बीए और एलएलबी तक की शिक्षा प्राप्त की है। करीब 10 वर्षों से बुजुर्गाें की सेवा में समर्पित कोमल की तैनाती लगभग पांच वर्ष पूर्व हाथरस के नगला भुस वृद्ध आश्रम में हुई थी। तब से उन्होंने आश्रम में रहने वाले बुजुर्गों को ही अपना परिवार मान लिया है।
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कोमल सिंह केवल आश्रम की संचालिका भर नहीं हैं, बल्कि वहां रह रहे प्रत्येक वृद्ध के लिए बेटी, सहारा और संबल बन चुकी हैं। उनके रहन-सहन, खान-पान और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों का वह हर समय पूरा ध्यान रखती हैं। किसी भी बुजुर्ग की तबीयत बिगड़ने पर वह स्वयं उन्हें अस्पताल लेकर जाती हैं और इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करती हैं।
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सेवा का उनका समर्पण इतना गहरा है कि कई बार जरूरत पड़ने पर वह बुजुर्गों को अपना रक्त भी दान कर चुकी हैं। आश्रम में रहने वाली एक वृद्ध महिला के गंभीर रूप से घायल होने पर कोमल ने उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया और स्वयं रक्त देकर उनकी जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज वह महिला स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी रही हैं।
कोमल कहती हैं कि जब लोग अपने बुजुर्ग माता-पिता को अकेला छोड़ देते हैं, तब उन्हें बहुत पीड़ा होती है। उनके माता-पिता सुषमा सिंह और खेम सिंह को भी अपनी बेटी के इस सेवा भाव पर गर्व है।