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Hathras News: शीतकालीन अवसाद है तो चिकित्सकों से लें सलाह
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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
कोरोना के बाद से लोगों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में वृद्धि हुई है। कोरोना के समय में काफी समय तक लोग अपने-अपने घरों में रहे, जिस कारण वह कहीं न कहीं मानसिक तनाव का शिकार हुए हैं। वहीं, ठंड के मौसम में भी मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों सामने आते हैं, खासतौर पर सर्दी पर लोग विंटर डिप्रेशन (शीतकालीन अवसाद) का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में चिकित्सकों का कहना है कि यदि कोई शीतकालीन अवसाद की समस्या से परेशान है तो वह जिला अस्पताल में बने मनकक्ष में काउंसिलिंग के लिए आ सकता है।
शहर की रहने वाली 23 वर्षीय एक युवती अपने माता-पिता के साथ नींद का कम आना, खाना अत्यधिक खाना, वजन का बढ़ना, चिड़चिड़ापन, किसी काम में मन न लगना, बात-बात में रोना, सिरदर्द की समस्या को लेकर मानसिक स्वास्थ्य विभाग में पहुंची। युवती के परिजनों ने बताया कि उसे यह दिक्कत साल 2020 की सर्दी के मौसम से है। शुरू में उन्हें लगा था कि युवती बहाने बना रही है, लेकिन उसकी परिस्थिति ज्यादा गंभीर हो गई। जिसके बाद उनकी काउंसिलिंग की जा रही है। इसके अलावा युवती को हर दिन एक्सरसाइज करने, पौष्टिक आहार लेने, सोने और जागने का वक्त निर्धारित करने और अपनी दिक्क्तों को साझा करने के लिए कहा गया।
जिला अस्पताल में तैनात साइकेट्रिस्ट सोशल वर्कर नीलिमा मधु हांसदा बताती हैं कि शीतकालीन अवसाद की समस्या सर्दियों के महीनों में आती है और बसंत के शुरू होने पर खत्म हो जाती है। इस अवस्था में लोग अपने जीवन को सुखद नहीं महसूस करते हैं। जिससे दिन- प्रतिदिन के कार्य करने में कठिनाई होती है। इससे बचाव के लिए पौष्टिक आहार लेना बेहद जरूरी है। इसके अलावा सोने के लिए एक समय तय करना चाहिए और अपनी समस्याओं को साझा करना चाहिए।
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- सर्दी के मौसम में ठंड के कारण नर्वस सुकड़ने लगती हैं, जिससे दिमाग पर असर पड़ता है। व्यक्ति हाईपोथर्मिया का भी शिकार हो सकता है। यह सीजनल इफेक्टिव डिसऑर्डर डिप्रेशन का रूप है। यह डिप्रेशन डाइट को प्रभावित, नींद न आना, भावनात्मक रूप से कमजोर कर देने वाला होता है। - डॉ. एमआई आलम, नोडल अधिकारी, मानसिक स्वास्थ्य
यह हैं लक्षण
मन उदास रहना, खुशी न महसूस करना, प्रतिदिन के कार्य पहले की तरह न कर पाना, पहले जिन कार्यों को करने में मन लगता था अब मन न लगना। छोटी-छोटी बातों में गुस्सा या चिड़चिड़ापन होना, रोना आना, भूख कम या ज्यादा लगना, वजन बढ़ना, लोगों से मिलना जुलना कम कर देना, पढ़ाई में मन न लगना आदि।
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कोरोना के बाद से लोगों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में वृद्धि हुई है। कोरोना के समय में काफी समय तक लोग अपने-अपने घरों में रहे, जिस कारण वह कहीं न कहीं मानसिक तनाव का शिकार हुए हैं। वहीं, ठंड के मौसम में भी मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों सामने आते हैं, खासतौर पर सर्दी पर लोग विंटर डिप्रेशन (शीतकालीन अवसाद) का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में चिकित्सकों का कहना है कि यदि कोई शीतकालीन अवसाद की समस्या से परेशान है तो वह जिला अस्पताल में बने मनकक्ष में काउंसिलिंग के लिए आ सकता है।
शहर की रहने वाली 23 वर्षीय एक युवती अपने माता-पिता के साथ नींद का कम आना, खाना अत्यधिक खाना, वजन का बढ़ना, चिड़चिड़ापन, किसी काम में मन न लगना, बात-बात में रोना, सिरदर्द की समस्या को लेकर मानसिक स्वास्थ्य विभाग में पहुंची। युवती के परिजनों ने बताया कि उसे यह दिक्कत साल 2020 की सर्दी के मौसम से है। शुरू में उन्हें लगा था कि युवती बहाने बना रही है, लेकिन उसकी परिस्थिति ज्यादा गंभीर हो गई। जिसके बाद उनकी काउंसिलिंग की जा रही है। इसके अलावा युवती को हर दिन एक्सरसाइज करने, पौष्टिक आहार लेने, सोने और जागने का वक्त निर्धारित करने और अपनी दिक्क्तों को साझा करने के लिए कहा गया।
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जिला अस्पताल में तैनात साइकेट्रिस्ट सोशल वर्कर नीलिमा मधु हांसदा बताती हैं कि शीतकालीन अवसाद की समस्या सर्दियों के महीनों में आती है और बसंत के शुरू होने पर खत्म हो जाती है। इस अवस्था में लोग अपने जीवन को सुखद नहीं महसूस करते हैं। जिससे दिन- प्रतिदिन के कार्य करने में कठिनाई होती है। इससे बचाव के लिए पौष्टिक आहार लेना बेहद जरूरी है। इसके अलावा सोने के लिए एक समय तय करना चाहिए और अपनी समस्याओं को साझा करना चाहिए।
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- सर्दी के मौसम में ठंड के कारण नर्वस सुकड़ने लगती हैं, जिससे दिमाग पर असर पड़ता है। व्यक्ति हाईपोथर्मिया का भी शिकार हो सकता है। यह सीजनल इफेक्टिव डिसऑर्डर डिप्रेशन का रूप है। यह डिप्रेशन डाइट को प्रभावित, नींद न आना, भावनात्मक रूप से कमजोर कर देने वाला होता है। - डॉ. एमआई आलम, नोडल अधिकारी, मानसिक स्वास्थ्य
यह हैं लक्षण
मन उदास रहना, खुशी न महसूस करना, प्रतिदिन के कार्य पहले की तरह न कर पाना, पहले जिन कार्यों को करने में मन लगता था अब मन न लगना। छोटी-छोटी बातों में गुस्सा या चिड़चिड़ापन होना, रोना आना, भूख कम या ज्यादा लगना, वजन बढ़ना, लोगों से मिलना जुलना कम कर देना, पढ़ाई में मन न लगना आदि।