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नहीं लौटाऊंगा अवार्ड : पिल्लै
hathras
Updated Mon, 09 Nov 2015 12:17 AM IST
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हाथरस। हॉकी के पूर्व कप्तान धनराज पिल्लै ने देश में असहिष्णुता के मसले पर कहा है कि वह कोई भी अवार्ड लौटाने वाले नहीं हैं। पिल्लै ने कहा कि बहुत मेहनत और संघर्ष के बाद उन्होंने यह अवार्ड हासिल किए हैं। असहिष्णुता है या नहीं, यह लोगों के नजरिये पर निर्भर करता है। पिल्लै सेंट फ्रांसिस इंटर कॉलेज के वार्षिक समारोह में शिरकत करने पहुंचे थे। मीडिया से बातचीत में उन्होंने असहिष्णुता को लेकर ज्यादा कुछ नहीं कहा। मालूम हो कि उन्हें सरकार ने साल 1999 में राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार दिया गया था और साल 2000 में पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है। कई साहित्यकार और फिल्मकार इस मसले पर अपने सम्मान वापस कर चुके हैं। हालांकि कोई खिलाड़ी अवार्ड वापसी की लिस्ट में अभी तक शामिल नहीं हुआ है।
हॉकी की वर्तमान दशा पर 16 साल तक देश के लिए हॉकी खेलने वाले पिल्लै ने कहा कि पहले कुछ ही देश हॉकी खेलते थे, अब बांग्लादेश की भी हॉकी टीम है। यही वजह रही कि हमें ज्यादा जीत मिलीं। संसाधनों के अभाव में देश की हॉकी दूसरे देशों से काफी पिछड़ गई है। हालांकि हॉकी इंडिया लीग से खेल में सुधार की उम्मीद बंधी है। खिलाडियों के लिए स्कोप भी बढ़ा है और देश में एस्टोटर्फ के मैदान भी। पिल्लै से जब यह पूछा गया कि स्कूली स्तर पर किस तरह हॉकी को बढ़ावा दिया जा सकता है, उन्होंने कहा कि सीबीएसई के पाठ्यक्रम में दादा (मेजर ध्यानचंद) और खुद उन पर आधारित एक चैप्टर है।
चार बार ओलंपिक खेलों और चार बार वर्ल्ड चैंपियनशिप में देश के लिए खेल चुके धनराज पिल्लै ने कहा कि हॉकी ने उन्हें सबकुछ दिया है। वह अपनी आखिरी सांस तक हॉकी को बढ़ाने का काम करते रहेंगे। कभी न भूल सकने वाले पल पर पूछे सवाल पर पिल्लै ने कहा कि सिडनी ओलंपिक में हॉलैंड पर भारत ने 1-0 से बढ़त बना ली थी। यह मैच बहुत महत्वपूर्ण था। महज 38 सेंकेड पहले हॉलैंड ने गोल दागकर यह मैच भारत से छीन लिया। पिल्लै को यह हार इतनी चुभी कि वे इसे सपने में भी याद करना नहीं चाहते हैं।
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हॉकी की वर्तमान दशा पर 16 साल तक देश के लिए हॉकी खेलने वाले पिल्लै ने कहा कि पहले कुछ ही देश हॉकी खेलते थे, अब बांग्लादेश की भी हॉकी टीम है। यही वजह रही कि हमें ज्यादा जीत मिलीं। संसाधनों के अभाव में देश की हॉकी दूसरे देशों से काफी पिछड़ गई है। हालांकि हॉकी इंडिया लीग से खेल में सुधार की उम्मीद बंधी है। खिलाडियों के लिए स्कोप भी बढ़ा है और देश में एस्टोटर्फ के मैदान भी। पिल्लै से जब यह पूछा गया कि स्कूली स्तर पर किस तरह हॉकी को बढ़ावा दिया जा सकता है, उन्होंने कहा कि सीबीएसई के पाठ्यक्रम में दादा (मेजर ध्यानचंद) और खुद उन पर आधारित एक चैप्टर है।
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चार बार ओलंपिक खेलों और चार बार वर्ल्ड चैंपियनशिप में देश के लिए खेल चुके धनराज पिल्लै ने कहा कि हॉकी ने उन्हें सबकुछ दिया है। वह अपनी आखिरी सांस तक हॉकी को बढ़ाने का काम करते रहेंगे। कभी न भूल सकने वाले पल पर पूछे सवाल पर पिल्लै ने कहा कि सिडनी ओलंपिक में हॉलैंड पर भारत ने 1-0 से बढ़त बना ली थी। यह मैच बहुत महत्वपूर्ण था। महज 38 सेंकेड पहले हॉलैंड ने गोल दागकर यह मैच भारत से छीन लिया। पिल्लै को यह हार इतनी चुभी कि वे इसे सपने में भी याद करना नहीं चाहते हैं।
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