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Hathras News: गैर इरादतन हत्या के प्रयास में पति दोषी, कोर्ट ने सुनाई सात साल की सजा
Mon, 20 Jan 2025 03:39 AM IST
चमन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
Published by: चमन शर्मा
Updated Mon, 20 Jan 2025 03:39 AM IST
सार
14 मार्च 2012 को सुरेंद्र कुमार दीक्षित के पास फिर यह फोन पहुंचा कि वह दो लाख रुपये लेकर आएं, नहीं तो उसकी बेटी को मार देंगे। इस पर सुरेंद्र कुमार दीक्षित सासनी पहुंचे। वहां उन्होंने अपनी बेटी को तलाश किया, लेकिन बेटी विजयलक्ष्मी उन्हें नहीं मिली। बाद में विजयलक्ष्मी उन्हें थाना सासनी में गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिली।
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कोर्ट (प्रतीकात्मक फोटो)
- फोटो : एएनआई
विस्तार
हाथरस के अपर सत्र न्यायाधीश/एफटीसी प्रथम माधवी सिंह के न्यायालय ने दहेज की मांग पूरी न होने पर पत्नी के गैर इरादतन हत्या के प्रयास में पति को दोषी करार देते हुए सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोषी पर अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड न देने पर दोषी को अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। मामला थाना सासनी क्षेत्र के गांव दरकौली का है।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार सुरेंद्र कुमार दीक्षित निवासी श्यामजी एनक्लेव कमला नगर आगरा ने थाना सासनी में मुकदमा दर्ज कराते हुए कहा कि उन्होंने अपनी बेटी विजय लक्ष्मी की शादी अप्रैल 2007 में हेमंत पुत्र रमेश चंद्र निवासी दरकौली थाना सासनी के साथ की थी। सामर्थ्य के अनुसार दान दहेज दिया था। इसके बाद भी हेमंत और उसके परिजन अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर उनकी बेटी को प्रताड़ित करते थे। लड़की को मारपीट कर वापस मायके भेज देते थे और कहते थे कि रुपये लेकर आओ।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार 14 मार्च 2012 को सुरेंद्र कुमार दीक्षित के पास फिर यह फोन पहुंचा कि वह दो लाख रुपये लेकर आएं, नहीं तो उसकी बेटी को मार देंगे। इस पर सुरेंद्र कुमार दीक्षित सासनी पहुंचे। वहां उन्होंने अपनी बेटी को तलाश किया, लेकिन बेटी विजयलक्ष्मी उन्हें नहीं मिली। बाद में विजयलक्ष्मी उन्हें थाना सासनी में गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिली। मायके वाले विजयलक्ष्मी को उपचार के लिए अस्पताल ले गए। पुलिस ने इस मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया।
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विवेचक ने विवेचना करते हुए न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। इस मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी प्रथम) माधवी सिंह के न्यायालय में हुई। न्यायालय ने इस मामले में पीड़िता के पति हेमंत कुमार को दोषी मानते हुए उसे सात वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने इस मामले में पीड़िता की सास गायत्री देवी को 498 ए और 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम का दोषी मानते हुए उन्हें 6 महीने के सदाचरण की परिवीक्षा पर इस शर्त पर रिहा किया है कि वह 6 महीने के अंदर शांति कायम रखेगी और सदाचारी बनी रहेगी।