फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hathras News ›   Holika Dahan done from Gokashta women making cow dung wood in Gaushala

Hathras News: गोकाष्ट से होगा होलिका दहन, गोशाला में महिलाएं बना रही हैं गोबर की लकड़ियां

Sun, 26 Feb 2023 07:52 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: चमन शर्मा Updated Sun, 26 Feb 2023 07:52 PM IST
सार

स्वयं सहायता समूह के जरिए महिलाओं को भी रोजगार मुहैया हो रहा है। वहीं इस बार होने वाली होलिका स्थलों पर सरकारी होली में इन लकड़ियों का ही प्रयोग किया जाएगा। इस समूह के जरिये इन लकड़ियों का अंतिम संस्कार के लिए भी बिक्री की जाएगी। अब तक 6 टन से अधिक लकड़ी को तैयार किया जा चुका है।

विज्ञापन
Holika Dahan done from Gokashta women making cow dung wood in Gaushala
गोकाष्ठ बना रहीं महिलाएं - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आपने पंचगव्य के बारे में सुना होगा। अब उस पंचगव्य में से गोबर की उपयोगिता में स्वयं सहायता समूह ने नवाचार कर दिखाया है। समूह की महिलाएं पराग डेयरी स्थित गोशाला में गोकाष्ट बना रही हैं। इस बार होली में इसी गोकाष्ट से होलिका दहन होगा।

विज्ञापन


जिले में जिलाधिकारी अर्चना वर्मा की पहल पर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के माध्यम से सासनी स्थित पराग डेयरी में गोबर की लकड़ी तैयार की जा रही हैं। इस इकाई के शुरू होने से जहां लकड़ी के लिए पेड़ों का कटान कम होगा, वहीं धुआं कम होने से पर्यावरण के लिए भी यह कम नुकसानदेह साबित होगी।
विज्ञापन


स्वयं सहायता समूह के जरिए महिलाओं को भी रोजगार मुहैया हो रहा है। वहीं इस बार होने वाली होलिका स्थलों पर सरकारी होली में इन लकड़ियों का ही प्रयोग किया जाएगा। इस समूह के जरिये इन लकड़ियों का अंतिम संस्कार के लिए भी बिक्री की जाएगी। अब तक 6 टन से अधिक लकड़ी को तैयार किया जा चुका है।
विज्ञापन
विज्ञापन


ऐसे तैयार होती है गोबर की लकड़ी तैयार
गोबर से लकड़ी तैयार करने के लिए दो दिन तक गोबर को सुखाया जाता है। नमी कम होने पर मशीन में डालकर घुमाया जाता है। इसके बाद लकड़ी तैयार की जाती है। लकड़ी को तैयार होने के बाद इसे जलाने के लिए एक दिन पूरी तरह से सूखाया जाता है।

6 क्विंटल लकड़ी तैयार होने से बचेगा एक पेड़
गोबर की लकड़ी का उत्पादन करने से पेड़ों के कटान में कमी आएगी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार अगर गोबर से छह क्विंटल जलौनी लकड़ी तैयार की जाए तो एक पेड़ को कटने से बचाया जा सकता है, इससे पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।

गोबर के उपलों से अधिक सुरक्षित है गोबर की लकड़ी
गांवों में ज्यादातर गोबर के उपले जलाने में प्रयोग किए जाते हैं। गोबर में मिथेन गैस की अधिकता होने के कारण इसे जलाने पर धुआं भी ज्यादा निकलता है, जबकि गोकाष्ट को होलो सिलिंडर की आकृति में तैयार किया जाता है। लकड़ी के बीच में छेद होने पर जलाने पर हवा पास होती है और आसानी से जलने के साथ धुआं भी कम होता है।


इस इकाई के संचालन से महिलाओं को रोजगार के अवसर खुले हैं। निर्माण इकाई से मिलने वाली आमदनी की 80 फीसदी धनराशि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को दी जाएगी। इस बार होलिका दहन में भी गोबर की लकड़ी का प्रयोग किया जाएगा। - रंजन कुमार, जिला प्रबंधक, एनआरएलएम।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed