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हाथरस: समर्थकों से विचार-विमर्श के बाद ही उठाऊंगा अगला कदम: रामवीर
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हाथरस: पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय।
- फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
सादाबाद के विधायक व पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय ने फिर दोहराया है कि वह अपने समर्थकों से विचार-विमर्श के बाद ही अगला राजनीतिक कदम उठाएंगे। इसके लिए वह अपने समर्थकों से लगातार संपर्क भी कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि उनके बेटे चिरागवीर उपाध्याय अपना निर्णय लेने में खुद सक्षम हैं। पूर्व मंत्री अपने निवास पर पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1996 में भी वह अपने समर्थकों से विचार-विमर्श के उपरांत ही बसपा में शामिल हुए थे। बसपा ने उन्हें पूरा सम्मान भी दिया। जब-जब प्रदेश में बसपा की सरकार बनी, तब-तब उन्हें मंत्री बनाया गया। उनकी पत्नी बसपा से सांसद भी बनीं। उनके छोटे भाई मुकुल उपाध्याय को भी बसपा ने इगलास से टिकट दिया और मुकुल इगलास से विधायक बने। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जब से बसपा से उनका निलंबन हुआ है, तब से लगातार कयासबाजी चल रही हैं, लेकिन वह अभी किसी दल में नहीं जा रहे। उनके समर्थकों की जहां राय होगी। वह अपना राजनीतिक कदम उसी हिसाब से उठाएंगे।
अपने बेटे चिरागवीर को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि चिरागवीर बालिग हैं। वह खुद अपना निर्णय लेने में सक्षम हैं। यदि भाजपा उन्हें लखनऊ से ज्वाइन कराना चाहती है तो वह ज्वाइन कर सकते हैं। उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उपाध्याय ने दावा किया कि लंबे समय से यहां के लोग जिले की मांग करते रहे थे और उन्होंने यह बात उस समय बहन मायावती के समक्ष रखी थी। वर्ष 1997 में उन्होंने यहां के लोगों की भावनाओं को देखते हुए बहन मायावती से स्पष्ट कह दिया था कि यदि हाथरस को जिला नहीं बनाया गया तो वह मंत्री पद और विधायक दोनों से इस्तीफा दे देंगे। इसके चलते 3 मई 1997 को तत्कालीन सरकार ने जिला बनाया।
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तदुपरांत उन्होंने काफी बड़े मीतई में बिजलीघर की स्थापना कराई। सादाबाद में बिजलीघर की क्षमतावृद्धि कराई। दर्जनों और स्थानों पर बिजलीघर बनवाए। गांव-गांव में सड़कें बनर्वाइं। उन्होंने कहा कि जितना विकास उन्होंने अपने मंत्री रहते हुए कराया, उतना विकास हाथरस का पहले कभी नहीं हुआ। तालाब चौराहे पर ओवरब्रिज जरूर बन रहा है, लेकिन इसे लेकर भी वह कई बार विधानसभा में मांग कर चुके थे।
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सादाबाद के विधायक व पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय ने फिर दोहराया है कि वह अपने समर्थकों से विचार-विमर्श के बाद ही अगला राजनीतिक कदम उठाएंगे। इसके लिए वह अपने समर्थकों से लगातार संपर्क भी कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि उनके बेटे चिरागवीर उपाध्याय अपना निर्णय लेने में खुद सक्षम हैं। पूर्व मंत्री अपने निवास पर पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1996 में भी वह अपने समर्थकों से विचार-विमर्श के उपरांत ही बसपा में शामिल हुए थे। बसपा ने उन्हें पूरा सम्मान भी दिया। जब-जब प्रदेश में बसपा की सरकार बनी, तब-तब उन्हें मंत्री बनाया गया। उनकी पत्नी बसपा से सांसद भी बनीं। उनके छोटे भाई मुकुल उपाध्याय को भी बसपा ने इगलास से टिकट दिया और मुकुल इगलास से विधायक बने। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जब से बसपा से उनका निलंबन हुआ है, तब से लगातार कयासबाजी चल रही हैं, लेकिन वह अभी किसी दल में नहीं जा रहे। उनके समर्थकों की जहां राय होगी। वह अपना राजनीतिक कदम उसी हिसाब से उठाएंगे।
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अपने बेटे चिरागवीर को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि चिरागवीर बालिग हैं। वह खुद अपना निर्णय लेने में सक्षम हैं। यदि भाजपा उन्हें लखनऊ से ज्वाइन कराना चाहती है तो वह ज्वाइन कर सकते हैं। उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उपाध्याय ने दावा किया कि लंबे समय से यहां के लोग जिले की मांग करते रहे थे और उन्होंने यह बात उस समय बहन मायावती के समक्ष रखी थी। वर्ष 1997 में उन्होंने यहां के लोगों की भावनाओं को देखते हुए बहन मायावती से स्पष्ट कह दिया था कि यदि हाथरस को जिला नहीं बनाया गया तो वह मंत्री पद और विधायक दोनों से इस्तीफा दे देंगे। इसके चलते 3 मई 1997 को तत्कालीन सरकार ने जिला बनाया।
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तदुपरांत उन्होंने काफी बड़े मीतई में बिजलीघर की स्थापना कराई। सादाबाद में बिजलीघर की क्षमतावृद्धि कराई। दर्जनों और स्थानों पर बिजलीघर बनवाए। गांव-गांव में सड़कें बनर्वाइं। उन्होंने कहा कि जितना विकास उन्होंने अपने मंत्री रहते हुए कराया, उतना विकास हाथरस का पहले कभी नहीं हुआ। तालाब चौराहे पर ओवरब्रिज जरूर बन रहा है, लेकिन इसे लेकर भी वह कई बार विधानसभा में मांग कर चुके थे।