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हाथरस : नारी के साथ भेदभाव क्यों, गर्भ में ही क्यों मार देते हैं बच्ची को

Fri, 01 Apr 2022 12:28 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 01 Apr 2022 12:28 AM IST
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Hathras: Why discrimination against women, why they kill the child in the womb
अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत नारी सशक्तीकरण की शपथ लेती अग्रसेन डिग्री कॉलेज की छात्राएं। ? - फोटो : SHAPHU
संवाद न्यूज एजेंसी, सादाबाद।
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कस्बा स्थित अग्रसेन डिग्री कॉलेज में बृहस्पतिवार को अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत संगोष्ठी एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। अध्यक्षता कॉलेज के अध्यक्ष जुगल किशोर अग्रवाल ने की। नारियों के साथ हो रहे भेदभाव पूर्ण व्यवहार को लेकर छात्राओं एवं शिक्षकाओं ने विचार व्यक्त किए।
उनका कहना था कि मां के गर्भ में कन्या आती है तो उसके जन्म लेने पूर्व ही उसकी हत्या क्यों कर दी जाती है ? संसार में नारियों की आधी आबादी से अधिक हिस्सेदारी है तो उनको सीमित अधिकारी क्यों दिए गए हैं। आज के युग नारी हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधा से कंधा मिलाकर कार्य कर रही हैं, फिर भी उनके साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है।
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- देश की नारी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। उस पर हो रही हिंसा एक विचारणीय पहलू है। उसे इसके लिए न्याय मिलना बहुत है आवश्यक है।
- निशा रावत, शिक्षका
हम सभी को मिलकर अपने अधिकारों को प्राप्त करने के लिए आवाज उठानी चाहिए। सरकार को महिलाओं की सुरक्षा के बारे में विशेष ध्यान देना चाहिए।
-डॉ. मोमिता सरकार
मैं उन परिवारों की घोर विरोधी हूं, जो अपनी बच्चियों को पढ़ने नहीं भेजते। मैं जब खेतों में छोटी बच्चियों को काम करते देखती हूं तो उनको देखकर काफी दुख होता है।
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-श्वेता कश्यप, छात्रा बीएससी प्रथम वर्ष
हमें अन्य परिवारों को बच्चियों को शिक्षा दिलाने के लिए प्रेरित करना होगा और उनको यह बताना होगा कि लड़कियां भी अपने पैरों खड़े होकर देश सेवा कर सकती है।
-श्वेता मिश्रा, बीए तृतीय वर्ष
महिलाओं को मिलकर पुराने विचारों एवं पुरानी रीति-रिवाज जो महिलाओं के उत्थान में बाधक हैं, उनका पुरजोर विरोध करना होगा। महिलाओं को प्रोत्साहित करना होगा।
-दिव्यांशी गौतम, बीएसी प्रथम वर्ष
आज भी समाज में महिलाएं पुरुषों के सामने आने से काफी डरती हैं। उनको यह डर समाप्त करना होगा। उनको खुलकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी चाहिए।
- पूजा सिंह, बीएससी प्रथम वर्ष
महिलाओं को खुद का मजबूत होना होगा। इसमें उनको शिक्षित करना उतना ही महत्वपूर्ण है, इसलिए हर परिवार को अपनी बच्चियों को पढ़ाना होगा, ताकि वह भी तरक्की में भागीदार बनें।
- नेहा बधौरिया, बीए प्रथम वर्ष
सरकार को गरीब वर्ग की छात्राओं को और अधिक सुविधाएं प्रदान करनी चाहिए, जिससे हर गरीब परिवार अपनी बच्चियों को अच्छी शिक्षा दिला सके और उन्हें आगे बढ़ा सके।
- नेहा परमार, बीए प्रथम वर्ष
आज के युग में महिलाएं पुरुषों से किसी भी काम में कम नहीं हैं। जरूरत है तो उन्हें सिर्फ बेहतर माहौल देने और आगे बढ़ने में सहयोग करने की।
-मोनिका चौधरी, बीए प्रथम वर्ष
हमें भी आधा अधिकार मिलना चाहिए। जब हमारी आबादी पुरुषों के बराबर है तो हमें अधिकार उनसे कम क्यों दिए गए हैं। सही मायने में महिलाओं को बराबरी का दर्जा मिले।
- मानवी भारद्वाज, बीएससी द्वितीय वर्ष
यह सभी जानते हैं कि महिलाओं में उतनी ही क्षमता है, जितनी पुरुषों में। यह बात महिलाओं ने कई मोर्चों पर सिद्ध भी की है, फिर भी उनके साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है।
- रूबी बघेल, बीएससी द्वितीय वर्ष
यह रहे कार्यक्रम में मौजूद
इनके अलावा देवेंद्री कुमारी, प्राची चौधरी, तनु कुमारी, वर्षा कुमारी ने भी विचार व्यक्त किए। अध्यक्षता कर रहे जुगल किशोर अग्रवाल ने कहा कि अमर उजाला द्वारा महिलाओं की जागरुकता के लिए चलाए जा रहे अपराजिता कार्यक्रम से उनमें जागृति आएगी और वह आगे बढ़कर समाज को नई दिशा देने में सहयोग देंगी।

इस अवसर पर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. हरेंद्र कुमार सिंह ने सभी का आभार जताया। इस मौके पर नवीन शर्मा एडवोकेट, मनीष कुमार शर्मा, धर्मेंद्र कुमार अग्रवाल, देवकीनंदन अग्रवाल, राजू लाला, दयाशंकर, कॉलेज सचिव मनीष कुमार अग्रवाल आदि उपस्थित थे।
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