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हाथरस : आशा कार्यकर्ताओं से पैसे लेने का वीडियो वायरल
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिकंदराराऊ (हाथरस)
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) हसायन में कार्यरत एक स्वास्थ्य कर्मी का आशा कार्यकर्ताओं और आशा संगिनियों से मानदेय जारी करने के नाम पर रुपये लेने का वीडियो वायरल हो रहा है। यह वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है।
इन दिनों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हसायन में कार्यरत बीसीपीएम आशा कार्यकर्ता व संगिनियों के मानदेय एवं अन्य कार्यों को देखने का जिम्मा संभालते हैं। आरोप है कि इन स्वास्थ्य कर्मी द्वारा मानदेय बनाने, गृह भ्रमण एवं डिलीवरी के नाम पर प्रत्येक आशा कार्यकर्ता से लगभग 400 से 500 रुपये प्रतिमाह वसूले जाते हैं। वायरल वीडियो में यह स्वास्थ्य कर्मी आशा कार्यकर्ताओं से वसूली करते समय रुपयों को अपनी जेब में रखते हुए दिख रहा है। आशा द्वारा कम रुपये देने पर पूरे रुपये देने के लिए दबाव भी बना रहा है।
आरोप है कि जो आशा कार्यकर्ता रुपये देने में आनाकानी करती हैं, उनका मानदेय रोक दिया जाता है या अन्य का तरीकों से उसे परेशान किया जाता है। रोका गया मानदेय बाद में पुन: जारी करने पर आधी-आधी धनराशि में फैसला किया जाता है। इससे आशाओं को खासी परेशानी झेलनी पड़ती है, लेकिन अधिकारियों द्वारा ध्यान न दिए जाने के कारण आशा कार्यकर्ता मजबूर हैं। संवाद
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) हसायन में कार्यरत एक स्वास्थ्य कर्मी का आशा कार्यकर्ताओं और आशा संगिनियों से मानदेय जारी करने के नाम पर रुपये लेने का वीडियो वायरल हो रहा है। यह वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है।
इन दिनों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हसायन में कार्यरत बीसीपीएम आशा कार्यकर्ता व संगिनियों के मानदेय एवं अन्य कार्यों को देखने का जिम्मा संभालते हैं। आरोप है कि इन स्वास्थ्य कर्मी द्वारा मानदेय बनाने, गृह भ्रमण एवं डिलीवरी के नाम पर प्रत्येक आशा कार्यकर्ता से लगभग 400 से 500 रुपये प्रतिमाह वसूले जाते हैं। वायरल वीडियो में यह स्वास्थ्य कर्मी आशा कार्यकर्ताओं से वसूली करते समय रुपयों को अपनी जेब में रखते हुए दिख रहा है। आशा द्वारा कम रुपये देने पर पूरे रुपये देने के लिए दबाव भी बना रहा है।
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आरोप है कि जो आशा कार्यकर्ता रुपये देने में आनाकानी करती हैं, उनका मानदेय रोक दिया जाता है या अन्य का तरीकों से उसे परेशान किया जाता है। रोका गया मानदेय बाद में पुन: जारी करने पर आधी-आधी धनराशि में फैसला किया जाता है। इससे आशाओं को खासी परेशानी झेलनी पड़ती है, लेकिन अधिकारियों द्वारा ध्यान न दिए जाने के कारण आशा कार्यकर्ता मजबूर हैं। संवाद
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