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हाथरस : बलिदान दिवस पर याद किए गए वीर गोकुला जाट
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हाथरस : गोकुला जाट के छवि चित्र पर पुष्प अर्पित कर वीरता को नमन करते जाट समाज के लोग। संवाद
- फोटो : SADABAD
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सादाबाद (हाथरस)
सहकारी संघ बिसावर पर रविवार को जाट समाज कल्याण समिति के बैनर तले अमर शहीद वीर गोकुला जाट का बलिदान दिवस सादगी से मनाया गया। वक्ताओं ने वीर गोकुला जाट के बलिदान को याद कर उन्हें नमन किया।
कार्यक्रम में शहीद गोकुला जाट के वीरता के किस्से सुनाए गए। समिति अध्यक्ष उदयपाल सिंह ने कहा कि वीर गोकुला जाट ने औरंगजेब से लोहा लिया था। सन 1666 के निकट दिल्ली औए आसपास इलाकों में औरंगजेब का आतंक था। हिंदुओं को इस्लाम कबूल कराना, हिंदू महिलाओं का अपहरण, हत्या के अलावा मंदिरों को गिराकर मस्जिदों का निर्माण बड़े पैमाने पर कराया जा रहा था। मथुरा छावनी से गांव सिहोरा पर हमला किया गया। तब वीर गोकुला ने मुगल सेना से लोहा लिया और जाटों की फौज बनाकर उसे धूल चटा दी।
बाद में औरंगजेब को दिल्ली से मथुरा आना पड़ा। उस समय औरंगजेब ने वीर गोकुला जाट को कई रियासत सौंपने का प्रस्ताव भेजा था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया। सन 1670 में 7000 किसानों के साथ वीर गोकुला जाट को आगरा में बंदी बनाकर उनकी हत्या कर दी गई, इसलिए गोकुला जाट को वीर गोकुला जाट के नाम से जाना जाता है। जाट का दूसरा नाम बलिदान है। बिसावर के रहने वाले वीर गोकुला जाट की भूमि पर आज तक उनकी प्रतिमा स्थापित नहीं हो पाई है। इसके लिए कई बार प्रयास किया गया है। वीर गोकुला जाट को पूरा विश्व जानता है।
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कार्यक्रम में अशोक कुमार, पदम सिंह, अशोक चौधरी, डॉ. भगवान सिंह, सुभाष चौधरी, जीवन लाल आदि मौजूद रहे। संवाद
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सहकारी संघ बिसावर पर रविवार को जाट समाज कल्याण समिति के बैनर तले अमर शहीद वीर गोकुला जाट का बलिदान दिवस सादगी से मनाया गया। वक्ताओं ने वीर गोकुला जाट के बलिदान को याद कर उन्हें नमन किया।
कार्यक्रम में शहीद गोकुला जाट के वीरता के किस्से सुनाए गए। समिति अध्यक्ष उदयपाल सिंह ने कहा कि वीर गोकुला जाट ने औरंगजेब से लोहा लिया था। सन 1666 के निकट दिल्ली औए आसपास इलाकों में औरंगजेब का आतंक था। हिंदुओं को इस्लाम कबूल कराना, हिंदू महिलाओं का अपहरण, हत्या के अलावा मंदिरों को गिराकर मस्जिदों का निर्माण बड़े पैमाने पर कराया जा रहा था। मथुरा छावनी से गांव सिहोरा पर हमला किया गया। तब वीर गोकुला ने मुगल सेना से लोहा लिया और जाटों की फौज बनाकर उसे धूल चटा दी।
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बाद में औरंगजेब को दिल्ली से मथुरा आना पड़ा। उस समय औरंगजेब ने वीर गोकुला जाट को कई रियासत सौंपने का प्रस्ताव भेजा था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया। सन 1670 में 7000 किसानों के साथ वीर गोकुला जाट को आगरा में बंदी बनाकर उनकी हत्या कर दी गई, इसलिए गोकुला जाट को वीर गोकुला जाट के नाम से जाना जाता है। जाट का दूसरा नाम बलिदान है। बिसावर के रहने वाले वीर गोकुला जाट की भूमि पर आज तक उनकी प्रतिमा स्थापित नहीं हो पाई है। इसके लिए कई बार प्रयास किया गया है। वीर गोकुला जाट को पूरा विश्व जानता है।
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कार्यक्रम में अशोक कुमार, पदम सिंह, अशोक चौधरी, डॉ. भगवान सिंह, सुभाष चौधरी, जीवन लाल आदि मौजूद रहे। संवाद