{"_id":"6689a97899de48bd980cca35","slug":"hathras-tragedy-overconfidence-of-servicemen-became-the-reason-for-pile-of-dead-bodies-2024-07-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hathras Tragady : सेवादारों का अति आत्मविश्वास बना लाशों के ढेर का कारण, पुलिस से ज्यादा खुद पर था भरोसा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hathras Tragady : सेवादारों का अति आत्मविश्वास बना लाशों के ढेर का कारण, पुलिस से ज्यादा खुद पर था भरोसा
Sun, 07 Jul 2024 03:34 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 07 Jul 2024 03:34 AM IST
सार
बाबा के सेवादारों को लग रहा था कि जिस तरह वे पहले के सत्संगों की व्यवस्था संभालते आए हैं, उसी तरह यहां भी संभाल लेंगे, लेकिन उनका यही आत्मविश्वास सैकड़ों लोगों की मौत का कारण बन गया।
विज्ञापन
file pic.....
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दो जुलाई को गांव फुलरई मुगलगढ़ी में हुए सत्संग में जुटी भीड़ इतनी थी कि अगर वहां सुरक्षा के लिए 500 पुलिस कर्मी भी तैनात किए जाते तो भी हालात संभालना मुश्किल था। बाबा के सेवादारों को लग रहा था कि जिस तरह वे पहले के सत्संगों की व्यवस्था संभालते आए हैं, उसी तरह यहां भी संभाल लेंगे, लेकिन उनका यही आत्मविश्वास सैकड़ों लोगों की मौत का कारण बन गया।
विज्ञापन
गौरतलब है कि जहां बाबा का सत्संग होता है, वहां हजारों की तादाद में बाबा के सेवादार व्यवस्था संभालते हैं। सुरक्षा व्यवस्था के लिए बाबा की नारायणी सेना और गरुण सेना के कमांडो तैनात रहते हैं, लेकिन अब तक जिन सत्संगों में इन सेवादारों ने व्यवस्था संभाली है, वहां शायद फुलरई मुगलगढ़ी की तरह लाखों की भीड़ नहीं रहती होगी। यहां भी आयोजकों को 60-70 हजार की भीड़ आने की उम्मीद थी, लेकिन यहां आकड़ा एक लाख से भी ऊपर पहुंच गया। इतनी भीड़ के बावजूद पुलिस की तरह से महज करीब 100 ही पुलिस कर्मी तैनात किए गए थे।
विज्ञापन
पुलिस कर्मियों ने भीड़ को संभालने की कोशिश भी की, लेकिन बाबा के सेवादार पुलिस कर्मियों से भिड़ने को तैयार हो गए। कहीं बखेड़ा न हो जाए, यह सोचकर पुलिस कर्मी वहां से हट गए और यातायात व्यवस्था संभालने में जुट गए। सुरक्षा इंतजामों को लेकर सेवादारों की यही मनमानी सत्संग के बाद ऐसे हादसे का कारण बन गई, जिसे शायद कभी नहीं भुलाया जा सकेगा। प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि भगदड़ के बाद वहां के जो हालात थे, उन्हें संभालना 500 पुलिस वालों के भी वश में नहीं था। रही-सही कसर सेवादारों ने पुलिस के बचाव कार्याें में बाधा डालकर पूरी कर दी।
विज्ञापन
मुश्किल होगी भीड़ वाले आयोजनों की अनुमति
गांव फुलरई मुगलगढ़ी में हुए हादसे के बाद अब इस तरह के भीड़ वाले आयोजनों की अनुमति बेहद मुश्किल होगी। इस हादसे ने भीड़ वाले आयोजनों से लोगों का मोह भी भंग कर दिया है। इस हादसे ने भोले बाबा के भविष्य को भी संकट में डाल दिया है।