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हाथरस : 38 वर्ष पुराने फर्जी एनकाउंटर मामले में तीन दरोगा व एक सिपाही फरार

Sat, 26 Feb 2022 12:41 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 26 Feb 2022 12:41 AM IST
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Hathras: Three constables and a constable absconding in the 38-year-old fake encounter case
गोविंद उपाध्याय
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हाथरस। 38 साल पुराने एक बहुचर्चित फर्जी एनकाउंटर मामले में तीन दरोगा व एक सिपाही के खिलाफ न्यायालय ने गैरजमानती वारंट जारी किए हैं। इस बहुचर्चित मामले में 15 पुलिसकर्मी आरोपी हैं। इसमें से एक की मृत्यु हो चुकी है, जबकि 10 कोर्ट में पेश हो चुके हैं। शेष चार लंबे समय से फरार चल रहे हैं। इनकी कुर्की की कार्यवाही भी हो चुकी है। पुलिस अभी तक इन्हें गिरफ्तार नहीं कर पाई है। अब न्यायालय ने इस मामले में सुनवाई के लिए पांच अप्रैल की तिथि नियत की है।
38 साल पुराने एनकाउंटर की कहानी एटा से शुरू हुई। 15 जनवरी 1983 को एटा कचहरी से कुछ पुलिसकर्मियों ने मनवीर सिंह एडवोकेट के बिस्तर से एक ग्रामीण हीरालाल पुत्र बलवंत सिंह निवासी-महमूदपुर, सिकंदराराऊ को दिन-दहाड़े उठा लिया था। वहां कचहरी परिसर में अधिवक्ताओं ने इसका कड़ा विरोध किया था। पुलिस ने इसे कई दिन तक सिकंदराराऊ थाने में हिरासत में रखा और फिर इसे हसायन पुलिस के सुपुर्द कर दिया। इसके बाद हीरालाल को चंदपा पुलिस अपने कब्जे में ले आई। उसके बाद चंदपा पुलिस ने 5 फरवरी 1983 को चंदपा के गांव अर्जुनपुर के निकट बंबा पुल पर मुठभेड़ में मार गिराना दर्शाया। पुलिस की इस मुठभेड़ पर सवाल उठे।
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शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता रायवीर सिंह ने इस मामले की शिकायत उच्च स्तर तक की। मामले की जांच सीबीसीआईडी ने की और 10 जनवरी 1987 को थाना चंदपा में मुकद्दमा दर्ज हुआ था। इस मामले में 15 पुलिसकर्मियों के विरुद्ध न्यायालय में आरोप-पत्र दाखिल हुआ। इनमें आठ दरोगा केएम उपाध्याय, बीडी दुबे, अनिल कुमार शर्मा, धर्मसिंह यादव, आरके त्यागी, सत्यप्रकाश शर्मा, हरिश्चचंद्र विद्यार्थी, केवल सिंह के अलावा कांस्टेबिल श्याम सिंह, रूपराम, धनपाल, बहादुर खां, राजवीर, हरिश्चंद्र शामिल थे। इस मामले में अभी तक न्यायालय में 10 लोग हाजिर हैं। केवल सिंह की मृत्यु हो चुकी है। अभी इस मामले में बीडी दुबे, धर्मसिंह यादव, हरिश्चंद्र विद्यार्थी, राजवीर फरार चल रहे हैं। न्यायालय ने इनके गैर जमानती वारंट जारी कर दिए हैं। कोर्ट में अब इस मामले में अगली तिथि 5 अप्रैल नियत है। संवाद
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कथित एनकाउंटर पर तत्कालीन एसएसपी ने पुलिस टीम की थपथपाई थी पीठ
हाथरस। यह एनकाउंटर मामला उस समय काफी चर्चित रहा था। ग्रामीण हीरालाल के एनकाउंटर पर उस समय तत्कालीन एसएसपी अलीगढ़ वीपी सिंह ने पुलिस टीम की पीठ थपथपाई थी। संवाद
एनकाउंटर की हुई थी मजिस्ट्रेटी जांच
हाथरस। इस एनकाउंटर की मजिस्ट्रेटी जांच हाथरस के तत्कालीन एसडीएम हाथरस ने की थी। उन्होंने जनता से साक्ष्य लेकर प्रदेश सरकार को यह सिफारिश भेजी कि इस एनकाउंटर की जांच सीबीसीआईडी से कराई जाए। इस सिफारिश पर प्रदेश सरकार ने अमल कर सीबीसीआईडी को जांच के आदेश दिए। संवाद

मेरठ सेक्टर से आगरा सेक्टर ट्रांसफर हुई थी जांच
हाथरस। पुलिस विभाग ने इस जांच को सीबीसीआईडी मेरठ सेक्टर के सुपुर्द किया था। तब तत्कालीन सीबीसीआईडी मेरठ के इंस्पेक्टर धर्मसिंह हाथरस आए थे। तब इस मामले की शिकायत करने वाले अधिवक्ता रायवीर सिंह ने जांच में की जा रही खानापूर्ति का शक होने पर डीजीपी से जांच को हटवाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। तब उसी दिन इस मामले की जांच मेरठ से आगरा सेक्टर स्थानांतरित हो गई थी। आगरा के तत्कालीन निरीक्षक वीकेएस चौहान ने प्राथमिक जांच पूरी कर थाना चंदपा मेें 10 जनवरी 1987 को मुकदमा दर्ज करा दिया। जिसमें रायवीर सिंह एडवोकेट वादी मुकदमा बने। जिसमें साक्ष्य संकलन करते हुए 15 पुलिसवालों के विरुद्ध 25 अप्रैल 1996 को न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल कर दिया। इन 15 अभियुक्तों में पुलिस के आठ दरोगा, 6 सिपाही और एक ड्राइवर शामिल थे। संवाद
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