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हाथरस : न डॉक्टर हैं, न मशीनें, उपचार के लिए भटक रहे मरीज

Tue, 19 Jul 2022 12:12 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 19 Jul 2022 12:12 AM IST
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Hathras: There are no doctors, no machines, patients wandering for treatment
हाथरस : कुरसंडा सीएचसी में कक्ष के सामने लगे ताले। संवाद - फोटो : SADABAD
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सादाबाद (हाथरस)
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ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के हालात बदतर हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कुरसंडा में इसकी बानगी देखी जा सकती है। यहां चिकित्सकों की कमी है। एक्सरे जैसे जरूरी चिकित्सा उपकरणों का अभाव है। सीएचसी पर एक होम्योपैथिक चिकित्सक, एक फार्मासिस्ट, एक लैब तकनीशियन और एक स्टाफ नर्स की ही तैनाती है। इनके अलावा अन्य कोई चिकित्सक या कर्मचारी यहां नहीं है। यहां जो भी मरीज आते हैं, उन्हें होम्योपैथिक चिकित्सक द्वारा ही उपचार दिया जाता है। अन्य चिकित्सकों के कक्षों पर ताले पड़े हुए हैं। फार्मासिस्ट को भी तीन जगह ड्यूटी करनी पड़ती है। नियमानुसार यहां पर करीब 24 चिकित्सक और कर्मियों का स्टाफ होना चाहिए, लेकिन महज छह का स्टाफ ही यहां है।
सीएचसी पर खारे पानी की भी समस्या है, इसलिए स्टाफ को पानी खरीदकर पीना पड़ता है। दवाओं की उपलब्धता तो बेहतर है, लेकिन उन्हें देने और लिखने वाला कोई नहीं है। सभी प्रकार की जांचों की सुविधा भी है। सीएचसी पर न किसी वार्डबॉय की तैनाती है और न किसी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की। स्वीपर भी हफ्ते में एक दिन आता है, इसलिए वहां तैनात कर्मचारियों को ही परिसर में सफाई करनी पड़ती है। नतीजा यह है कि स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने के लिए मरीजों को या तो सादाबाद आना पड़ता है या फिर निजी चिकित्सकों के पास जाना पड़ता है। सीएचसी की हालत देखकर लगता है कि स्वास्थ्य विभाग का इसकी तरफ कोई ध्यान नहीं है। तत्कालीन विधायक देवेंद्र अग्रवाल के कार्यकाल में कुरसंडा में सीएचसी का निर्माण कराया गया था। संवाद
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हमारे यहां डॉक्टरों के अलावा अन्य चिकित्सा कर्मियों की भी कमी है, इसलिए लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। जल्द कर्मियों की कमी दूर होने की संभावना है। सीएचसी पर सभी प्रकार की जांच की सुविधा है और दवाओं का स्टॉक भी पर्याप्त है। एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) भी लगाई जा रही है।
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-डॉ. जगदीश प्रसाद, प्रभारी चिकित्सक
मरीजों का दर्द
कान में तकलीफ है। इसकी दवा लेने आए हैं, लेकिन यहां ईएनटी चिकित्सक है ही नहीं, इसलिए सादाबाद जाना पड़ेगा। सरकार ने अस्पताल बनाने में इतना रुपया खर्च कर दिया, लेकिन डॉक्टर एक भी नहीं हैं।
-शालू
खुजली की दवा लेने आया हूं। कई दिनों से दवाई ले रहा हूं, लेकिन कोई फायदा नहीं मिला। दवा खाते हैं, तब तक तो ठीक रहते हैं, उसके बाद फिर खुजली हो जाती है। यहां खारे पानी की समस्या है।
-अशोक कुमार
खांसी की दवा लेने आए हैं। दवा तो मिल गई है, लेकिन पीने के पानी की समस्या है। यहां डॉक्टरों के कई कक्ष खाली हैं या ताले लगे हुए हैं, इसलिए बेहतर इलाज नहीं मिला पा रहा है। ऐसा अस्पताल बेकार है।

-रघुवीर सिंह
खांसी की दवा लेने आई हूं। पहले भी दवा ली थी। जब तक दवाई खाई थी, तब तक समस्या नहीं हुई। अब फिर वही समस्या है। एक ही डॉक्टर नहीं है यहां। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए।
-कमलेश देवी
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