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हाथरस : आसपास धमाके हो रहे हैं, मैं कुछ साथियों के साथ बंकर में हूं
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हाथरस : यूक्रेन में फंसा आशीष। संवाद
- फोटो : HATHRAS
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
खारकीव सिटी में बम के धमाकों की आवाज सुनाई दे रही है। यहां की स्थिति बहुत ही खराब हैं। हम यहां सभी धमाकों की आवाज से घबराए हुए हैं। मैं यहां अपने कुछ साथियों के साथ बंकर में हूं। ये बातें यूक्रेन की खारकीव सिटी में फंसे आवास कॉलोनी निवासी आशीष पुत्र रमेश चंद्र ने व्हाट्सएप कॉल के जरिये अमर उजाला को बताई। आशीष ने बताया कि इस समय खारकीव रेड जोन में हैं।
शहर की आवास विकास कॉलोनी निवासी आशीष यूक्रेन की खारकीव इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रहे हैं। वह एमबीबीएस के चौथे सेमेस्टर में हैं। उन्होंने बताया कि यहां दूतावास में कोई फोन नहीं उठा रहा है। दूतावास से लगातार संपर्क करने के प्रयास जारी हैं। बेस्टन साइड में फंसे इंडियन स्टूडेंट को निकाला गया है। हम रसियन बॉर्डर से 35 किमी दूर हैं। सोशल मीडिया के जरिये हमें यह संदेश मिला है कि अभी हम बंकरों में ही सुरक्षित रहें। यहां इस शहर में बने मेट्रो स्टेशन में लोग ठहर कर खुद को सुरक्षित कर रहे हैं।
आशीष ने बताया कि यहां से लगातार मैं अपने परिजनों के संपर्क में हूं। मेरे साथ एक अलीगढ़, दो हरियाणा, एक बदायूं और एक लखनऊ के रहने वाले भी हैं। हम सभी बंकर में रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि यूक्रेन सरकार ने इमरजेंसी में टेलीग्राम पर ग्रुप के माध्यम से सुपर मार्केट के खुलने की जानकारी दी थी तो वहां से खाने के सामान ले आए। यहां दूसरी साइड पर रोमोनिया बार्डर हैं। उन्होंने बताया कि मेरे पिता रमेश चंद्र रेलवे में सेक्शन इंजीनियर के पद पर मुंबई में तैनात हैं। मेरी परिवार के सभी सदस्य अलग अलग स्थान पर हैं। परिवार के लोग लगातार प्रशासन के संपर्क में हैं। संवाद
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खारकीव सिटी में बम के धमाकों की आवाज सुनाई दे रही है। यहां की स्थिति बहुत ही खराब हैं। हम यहां सभी धमाकों की आवाज से घबराए हुए हैं। मैं यहां अपने कुछ साथियों के साथ बंकर में हूं। ये बातें यूक्रेन की खारकीव सिटी में फंसे आवास कॉलोनी निवासी आशीष पुत्र रमेश चंद्र ने व्हाट्सएप कॉल के जरिये अमर उजाला को बताई। आशीष ने बताया कि इस समय खारकीव रेड जोन में हैं।
शहर की आवास विकास कॉलोनी निवासी आशीष यूक्रेन की खारकीव इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रहे हैं। वह एमबीबीएस के चौथे सेमेस्टर में हैं। उन्होंने बताया कि यहां दूतावास में कोई फोन नहीं उठा रहा है। दूतावास से लगातार संपर्क करने के प्रयास जारी हैं। बेस्टन साइड में फंसे इंडियन स्टूडेंट को निकाला गया है। हम रसियन बॉर्डर से 35 किमी दूर हैं। सोशल मीडिया के जरिये हमें यह संदेश मिला है कि अभी हम बंकरों में ही सुरक्षित रहें। यहां इस शहर में बने मेट्रो स्टेशन में लोग ठहर कर खुद को सुरक्षित कर रहे हैं।
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आशीष ने बताया कि यहां से लगातार मैं अपने परिजनों के संपर्क में हूं। मेरे साथ एक अलीगढ़, दो हरियाणा, एक बदायूं और एक लखनऊ के रहने वाले भी हैं। हम सभी बंकर में रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि यूक्रेन सरकार ने इमरजेंसी में टेलीग्राम पर ग्रुप के माध्यम से सुपर मार्केट के खुलने की जानकारी दी थी तो वहां से खाने के सामान ले आए। यहां दूसरी साइड पर रोमोनिया बार्डर हैं। उन्होंने बताया कि मेरे पिता रमेश चंद्र रेलवे में सेक्शन इंजीनियर के पद पर मुंबई में तैनात हैं। मेरी परिवार के सभी सदस्य अलग अलग स्थान पर हैं। परिवार के लोग लगातार प्रशासन के संपर्क में हैं। संवाद
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