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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hathras News ›   Hathras: The fragrance of the country should be read in my eyes, who am I not to be asked my name...

हाथरस : मेरी आंखों में पढ़ी जाए वतन की खुशबू, कौन हूं मुझसे मेरा नाम न पूछा जाए...

Mon, 03 Jan 2022 12:00 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 03 Jan 2022 12:00 AM IST
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Hathras: The fragrance of the country should be read in my eyes, who am I not to be asked my name...
सम्मेलन में कवियों का सम्मान करते विधायक वीरेंद्र सिंह राना। - फोटो : SIKANDHRA RAHU
संवाद न्यूज एजेंसी, सिकंदराराऊ।
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कोई हिंदुत्व कि इस्लाम न पूछा जाए, मरने के बाद का अंजाम न पूछा जाए, मेरी आंखों में पढ़ी जाए वतन की खुशबू, कौन हूं मुझसे मेरा नाम न पूछा जाए... कवि एवं शायर बलवीर सिंह पौरुष की पुण्य स्मृति में एकता साहित्य संस्था के तत्वावधान में मुरली कृष्णा मंगल धाम में आयोजित कवि सम्मेलन सह मुशायरा में जब कुंवर जावेद ने यह कविता पढ़ी तो सदन तालियों से गूंज उठा।
सम्मलेन की अध्यक्षता फिल्म निर्माता व निर्देशक परिवार से जुड़ी पूर्व विधायक एवं समाजसेवी पुष्पा चौहान ने की। संचालन कवि अवशेष विमल ने किया। मंच पर सह अध्यक्ष के रूप में संतोष पौरुष विराजमान रही। अतिथि के रूप में अंतरराष्ट्रीय गीतकार डॉ. विष्णु सक्सेना, विधायक वीरेंद्र सिंह राना, पूर्व ब्लॉक प्रमुख पति सुमंत किशोर सिंह एवं व्यापारी नेता विपिन वार्ष्णेय उपस्थित रहे। अतिथियों ने मां शारदे के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।
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पुष्पा सिंह चौहान ने संबोधित करते हुए कहा कि बलवीर सिंह पौरुष हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं पर पकड़ रखते थे, इस कारण वे कवि और शायर दोनों के ही चहेते रहे। सरस्वती वंदना दिल्ली से पधारी चर्चित कवयित्री रजनी सिंह अवनि ने की।
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आगरा से पधारे कवि सचिन दीक्षित ने ओज स्वर में काव्य पाठ करते हुए ़
मैंने बहुत सम्मान किया है बापू वाली सीखों का, लेकिन फिर भी कर्जदार हूं भगत सिंह की चीखों का...
ओज कवि मनवीर मधुर ने भले बिखरे स्वयं का घर, ये कीमत कौन देता है, अगर बेखौफ जीते तो हो, तो हिम्मत कौन देता है का पाठ किया।
रीवा से पधारे ओजकवि राधाकांत पांडेय ने कविता पढ़ी।
राष्ट्र समूचा उन बेटों की यशगाथा गाए जो, मातृभूमि के हेतु मृत्यु का आलिंगन करते हैं।
झांसी के शायर अर्जुन सिंह चांद शेर पढ़ वाहवाही लूटी। - चलो हम गांव में कुछ दिन गुजारें, शहर में हर तरफ काला धुआं है।
नागपुर से पधारे हास्य कवि हेमंत मोहरे और धौलपुर से पधारे हास्य कवि रामबाबू सिकरवार ने श्रोताओं को हंसा हंसा कर लोट पोट किया। दिल्ली के युवा गीतकार सर्जन शीतल और अंतरराष्ट्रीय गीतकार डॉ. विष्णु सक्सेना ने गीतों की वर्षा की।

कार्यक्रम में विजय भारत कुलश्रेष्ठ, बबलू सिसोदिया, कृष्ण कुमार राघव, संजीव भटनागर, शरीफ अली, राजुल चौहान, पंकज गुप्ता, नीरज वैश्य, कमलनयन, स्नेहलता सिंह, रामजीलाल, जसावत, प्रबल प्रताप सिंह, सूरज बजाज, प्रदीप गर्ग, चंचल गुप्ता, जयपाल सिंह चौहान, मुकेश चौहान, तरुण सिंह राणा, मीरा महेश्वरी, कमला जादौन, कमलेश शर्मा, साधना चौहान, मुकुल गुप्ता, भद्र पाल सिंह चौहान , प्रमोद विषधर, शुभम आजाद, रजाक नाचीज, आतिश सोलंकी, शमशुल अहद शम्स, बारिश उझियांवी, साबिर अली साबिर, डॉक्टर दानिश कैफ़ी, शमीम खान, समीम, शशि बाला वार्ष्णेय, राज कुमारी गुप्ता आदि उपस्थित थे। अंत में आयोजक त्रिशूल सिंह पौरुष, ज्ञानेंद्र पौरुष व रंजीत पौरुष ने सबका आभार व्यक्त किया।
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