{"_id":"636a976505684679a9613e92","slug":"hathras-the-doors-of-the-temples-remained-closed-for-nine-hours-during-the-lunar-eclipse-no-worship-hathras-news-ali3043116145","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाथरस : चंदग्रहण में नौ घंटे बंद रहे मंदिरों के कपाट, नहीं हुई पूजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाथरस : चंदग्रहण में नौ घंटे बंद रहे मंदिरों के कपाट, नहीं हुई पूजा
विज्ञापन
हाथरस : चंद्रग्रहण के चलते शहर के घंटाघर स्थित मंदिर श्रीगोविंद भगवान के द्वार पर लगे ताले। संवा?
- फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
कार्तिक पूर्णिमा यानि देव दिवाली के दिन साल के आखिरी चंद्रग्रहण की वजह से सुबह मंगला आरती के बाद मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए। शाम को छह बजकर 53 मिनट पर ग्रहण के मोक्ष के बाद मंदिरों और घरों में सफाई कर पूजा-अर्चना की गई। देवों को प्रसन्न करने के लिए दीपक जलाए गए।
उल्लेखनीय है नवंबर माह में दिवाली के दिन सूर्यग्रहण के चलते पर्वों की तिथियाें में उलटफेर हुआ था। अब मंगलवार को कार्तिक पूर्णिमा पर चंद्रगहण के नौ घंटे पहले सुबह आठ बजकर 53 मिनट पर सूतककाल शुरू हो गया। इस कारण शहर के रामदरबार, नवग्रह, किला परिसर स्थित दाऊजी मंदिर, रूई की मंडी स्थित कन्हैया जी मंदिर, गुड़िहाई बाजार स्थित दाऊजी मंदिर में सुबह मंगला आरती की।
इसके बाद मंदिरों के कपाट पूरे दिन बंद रहे। इस वजह से पूरे दिन देव दिवाली पर पूजा-अर्चना का क्रम बंद रहा। इस दौरान लोगों ने घरों में मंत्र जाप आदि मौखिक अनुष्ठान किए। शाम को ग्रहण के मोक्ष के बाद सफाई की गई। घरों में गंगाजल का छिड़काव किया गया। पूजा-अर्चना की गई। देवों को प्रसन्न करने के लिए दीपक जलाए गए। भजन-कीर्तन के साथ श्रद्धालुओं ने आस्था के संगम में डुबकी लगाई। लोगों ने ग्रहण के बाद दान भी किया। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
कार्तिक पूर्णिमा यानि देव दिवाली के दिन साल के आखिरी चंद्रग्रहण की वजह से सुबह मंगला आरती के बाद मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए। शाम को छह बजकर 53 मिनट पर ग्रहण के मोक्ष के बाद मंदिरों और घरों में सफाई कर पूजा-अर्चना की गई। देवों को प्रसन्न करने के लिए दीपक जलाए गए।
उल्लेखनीय है नवंबर माह में दिवाली के दिन सूर्यग्रहण के चलते पर्वों की तिथियाें में उलटफेर हुआ था। अब मंगलवार को कार्तिक पूर्णिमा पर चंद्रगहण के नौ घंटे पहले सुबह आठ बजकर 53 मिनट पर सूतककाल शुरू हो गया। इस कारण शहर के रामदरबार, नवग्रह, किला परिसर स्थित दाऊजी मंदिर, रूई की मंडी स्थित कन्हैया जी मंदिर, गुड़िहाई बाजार स्थित दाऊजी मंदिर में सुबह मंगला आरती की।
विज्ञापन
इसके बाद मंदिरों के कपाट पूरे दिन बंद रहे। इस वजह से पूरे दिन देव दिवाली पर पूजा-अर्चना का क्रम बंद रहा। इस दौरान लोगों ने घरों में मंत्र जाप आदि मौखिक अनुष्ठान किए। शाम को ग्रहण के मोक्ष के बाद सफाई की गई। घरों में गंगाजल का छिड़काव किया गया। पूजा-अर्चना की गई। देवों को प्रसन्न करने के लिए दीपक जलाए गए। भजन-कीर्तन के साथ श्रद्धालुओं ने आस्था के संगम में डुबकी लगाई। लोगों ने ग्रहण के बाद दान भी किया। संवाद
विज्ञापन