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हाथरस : कहीं बंद तो कहीं जर्जर हालत में हैं बेसिक स्कूलों के शौचालय

Tue, 02 Aug 2022 11:34 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 02 Aug 2022 11:34 PM IST
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Hathras: Somewhere closed and somewhere in a dilapidated condition, toilets of basic schools
हाथरस : प्राथमिक विद्यालय गोशाला बालक का बंद शौचालय। संवाद - फोटो : HATHRAS
घनश्याम सिंह-
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हाथरस। एक तरफ तो अभियान चलाकर परिषदीय विद्यालयों का कायाकल्प करने का दावा बेसिक शिक्षा विभाग कर रहा है तो दूसरी ओर ग्राम पंचायतों की तरफ से ऑपरेशन कायाकल्प के तहत बनवाए गए परिषदीय विद्यालयों के शौचालय का बुरा हाल है। कहीं शौचालय बंद हैं तो कहीं इनकी हालत जर्जर है। लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी बच्चों को स्कूलों में शौचालय की सुविधा नहीं मिल पा रही है। मानकविहीन सामग्री एवं बजट का बंदरबांट होने से अधिकांश स्कूलों के शौचालय निष्प्रयोज्य हैं।
हालत यह है कि कहीं शौचालयों में पानी की आपूर्ति नहीं है तो कहीं संचालन से पूर्व ही इन शौचालयों के टाइल्स टूट गए हैं। कुछ परिषदीय विद्यालयों में शौचालयों की पड़ताल की गई तो इनकी बदहाली का सच सामने आया। शौचालय सक्रिय न होने से महिला अध्यापकों और छात्राओं को सबसे ज्यादा असुविधा का सामना करना पड़ता है। संवाद
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रमनपुर में एक शौचालय पर ताला, दूसरा बदहाल
नगर क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय रमनपुर में एक शौचालय पर ताला लगा हुआ था तो दूसरे शौचालय की हालत बहुत ही खराब थी। शहर के रमनपुर चौक स्थित प्राथमिक स्कूल में तो शौचालय ही नहीं है। नगला भोजा स्थित स्कूल में शौचालय का हाल देखा गया तो यहां भी कायाकल्प योजना के तहत लाखों रुपये खर्च करके बनाए गए शौचालयों पर ताले जड़े हुए थे। संवाद
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एक परिसर में तीन स्कूल, शौचालय प्रयोग लायक नहीं
शहर के गोशाला स्थित संविलियन स्कूल के परिसर में तीन स्कूल और दो आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन हो रहा है। यहां भी कायाकल्प योजना के तहत दो शौचालय तो बने हैं, लेकिन निर्माण में मानक की अनदेखी की गई है। पानी की आपूर्ति न होने से लाखों रुपये की लागत से बना शौचालय शोपीस बना हुआ है और विभागीय निष्क्रियता की गवाही दे रहा है। शौचालय सक्रिय न होने से शिक्षक-शिक्षिकाओं व बच्चों को काफी असुविधाओं का सामना करना पड़ता है।
- 1235 स्कूल हैं जिले में बेसिक शिक्षा के
- 264 संविलियन विद्यालय
- 761 प्राथमिक विद्यालय
- 210 उच्च प्राथमिक विद्यालय
इस तरह मिलता है अनुरक्षण अनुदान
- एक से 30 छात्र संख्या पर 10 हजार रुपये
- 31 से 100 छात्र संख्या पर 25 हजार रुपये
- 101 से 250 छात्र संख्या पर 50 हजार रुपये
- 251 से 1000 छात्र संख्या तक 75 हजार रुपये
विद्यालय की स्थिति काफी खराब है। शौचालयों में पानी की आपूर्ति नहीं है, इसलिए यहां ताले लगे हुए हैं। बच्चों को शौच के लिए बाहर जाना पड़ा है। एक परिसर में तीन स्कूलों का संचालन हो रहा है। इनमें करीब 180 बच्चे पढ़ने आते हैं। एक स्कूल का भवन को काफी जर्जर हालत में है। इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को भी बता चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

-रहीशपाल शर्मा, एसएमसी अध्यक्ष
विद्यालयों में जो शौचालय जर्जर अवस्था में हैं, उनकी सूचना ग्राम पंचायत को भेजी गई, ताकि ग्राम पंचायतस्तर पर उनमें सुधार हो सके। अगर कहीं पर किसी विद्यालय में शौचालय पर ताले लगे हुए हैं तो यह गलत है। प्रधानाध्यापक शौचालय का ताला खोलकर रखें, ताकि बच्चे उसका प्रयोग कर सकें, अन्यथा विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-भुवन प्रकाश, प्रभारी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।
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