{"_id":"5e7f862b8ebc3e76951fcb55","slug":"hathras-someone-is-traveling-on-a-bicycle-on-foot-hathras-news-ali230167982","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाथरस: कोई पैदल तो कोई साइकिल से कर रहा सफर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाथरस: कोई पैदल तो कोई साइकिल से कर रहा सफर
विज्ञापन
हाथरस: तालाब चौराहे के निकट राहगीरों को खाद्य सामग्री वितरित करते समाजसेवी।
- फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
लॉकडाउन ने लोगों के सामने रोजी रोटी का संकट भी पैदा हो गया है। सब कुछ बंद होने के बाद अब लोग जैसे-तैसे अपने घरों तक पहुंचने को बैचेन हैं। सैकड़ों लोग हरियाणा, दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद से पैदल व साइकिल पर सवार होकर यहां से गंतव्य को जा रहे हैं। इन मुसाफिरों को समाजसेवियों ने खाने के पैकेट भी वितरित किए।
लॉकडाउन का असर सबसे ज्यादा मजदूर वर्ग के लोगों पर पड़ा है। यही कारण है कि प्राइवेट कंपनियों में काम करने वाले लोग अपने मूल निवास वाले घरों की ओर चल पड़े हैं, फिर चाहे उन्हें 500 किलोमीटर तक की दूरी पैदल ही क्यों न तय करनी पड़ी। एटा के सिड़पुरा निवासी दंपती श्यामलाल और गुड्डी देवी ने बताया कि वह हरियाणा के मानेश्वर में एक रेडीमेड कपड़ा बनाने की कंपनी में काम करते थे। लॉकडाउन के कारण कंपनी बंद हो गई है। ऐसे में खाने-पीने के सामान के लिए भी पैसा चाहिए। कंपनी बंद होने के कारण पैसे भी अपने पास नहीं है, इसलिए सोचा अपने गंाव ही चले। किसी वाहन की व्यवस्था नहीं हुई तो खुद की अपनी साइकिल पर सवार होकर चल दिए।
आलू की खुदाई का काम करने के लिए आगरा आए थे, लेकिन अब काम बंद हो गया है। ऐसे में खाने तक के लाले पड़ गए हैं, इसलिए अब पैदल की अपने गांव जा रहे हैं। धीरे-धीरे पहुंच जाएंगे।
विज्ञापन
-श्यामलाल, निवासी बदायूं
सोचा था कमाई करके पैसे घर भेजेंगे, लेकिन यहां तो अब अपना ही पेट भरने की चिंता हो रही है। आगरा से पैदल-पैदल बदायूं तक पहुंचेंगे। काम भी बंद हो गया है। कल से खाना नहीं खाया, यहां आकर कुछ लोगों ने हमें खाना दिया है।
-नन्ने, निवासी बदायूं
विज्ञापन
लॉकडाउन ने लोगों के सामने रोजी रोटी का संकट भी पैदा हो गया है। सब कुछ बंद होने के बाद अब लोग जैसे-तैसे अपने घरों तक पहुंचने को बैचेन हैं। सैकड़ों लोग हरियाणा, दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद से पैदल व साइकिल पर सवार होकर यहां से गंतव्य को जा रहे हैं। इन मुसाफिरों को समाजसेवियों ने खाने के पैकेट भी वितरित किए।
लॉकडाउन का असर सबसे ज्यादा मजदूर वर्ग के लोगों पर पड़ा है। यही कारण है कि प्राइवेट कंपनियों में काम करने वाले लोग अपने मूल निवास वाले घरों की ओर चल पड़े हैं, फिर चाहे उन्हें 500 किलोमीटर तक की दूरी पैदल ही क्यों न तय करनी पड़ी। एटा के सिड़पुरा निवासी दंपती श्यामलाल और गुड्डी देवी ने बताया कि वह हरियाणा के मानेश्वर में एक रेडीमेड कपड़ा बनाने की कंपनी में काम करते थे। लॉकडाउन के कारण कंपनी बंद हो गई है। ऐसे में खाने-पीने के सामान के लिए भी पैसा चाहिए। कंपनी बंद होने के कारण पैसे भी अपने पास नहीं है, इसलिए सोचा अपने गंाव ही चले। किसी वाहन की व्यवस्था नहीं हुई तो खुद की अपनी साइकिल पर सवार होकर चल दिए।
विज्ञापन
आलू की खुदाई का काम करने के लिए आगरा आए थे, लेकिन अब काम बंद हो गया है। ऐसे में खाने तक के लाले पड़ गए हैं, इसलिए अब पैदल की अपने गांव जा रहे हैं। धीरे-धीरे पहुंच जाएंगे।
विज्ञापन
-श्यामलाल, निवासी बदायूं
सोचा था कमाई करके पैसे घर भेजेंगे, लेकिन यहां तो अब अपना ही पेट भरने की चिंता हो रही है। आगरा से पैदल-पैदल बदायूं तक पहुंचेंगे। काम भी बंद हो गया है। कल से खाना नहीं खाया, यहां आकर कुछ लोगों ने हमें खाना दिया है।
-नन्ने, निवासी बदायूं

हाथरस: लॉकडाउन के दौरान डीसीएम में बैठकर अपने घर जाते लोग।- फोटो : HATHRAS