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हाथरस: विकास दुबे के एनकाउंटर को कुछ ने बताया ठीक तो कुछ ने पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल

Sat, 11 Jul 2020 12:15 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 11 Jul 2020 12:15 AM IST
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Hathras: Some told Vikas Dubey's encounter, and some questioned the police action
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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यूपी के मोस्ट वांटेड विकास दुबे के एनकाउंटर को लेकर राजनेताओं, अधिवक्ताओं व अन्य लोगों ने प्रतिक्रियाएं दी हैं। कुछ लोगों ने जहां पुलिस की इस कार्रवाई की सराहना की है तो कुछ का कहना है कि विकास का एनकाउंटर एक साजिश का हिस्सा है, जिसकी आड़ में कुछ राज दफ्न कर दिए गए हैं।
वर्ष 2001 में जब विकास दुबे ने एक दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री की थाने में हत्या की थी उसी समय उस पर सख्त कार्रवाई हो गई होती तो आज वह इतना बड़ा अपराधी नहीं बन पाता। सिस्टम में सुधार की जरूरत है। अपराधी की कोई जाति या धर्म नहीं होता।
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रामवीर उपाध्याय, विधायक सादाबाद
विकास दुबे का एनकाउंटर एक तरह से साजिश ही है। उसने तो उसने उज्जैन में समर्पण कर दिया था। उसके बाद यूपी में उसे पुलिस ने एनकाउंटर में मार दिया। विकास दुबे यदि जिंदा रहता तो कुछ राज खुलते।
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जसवंत सिंह यादव, एमएलसी व वरिष्ठ सपा नेता
दहशतगर्द विकास दुबे गुंडा और माफिया था। ऐसे लोग समाज में गंदगी फैलाते हैं। उसने आठ पुलिसकर्मियों की हत्या की थी। सुना है कि उज्जैन से आते समय भी उसने पुलिस से हथियार छीनकर भागने की कोशिश की। पुलिस ने अपने बचाव में उसका एनकाउंटर कर ठीक किया है। यदि वह नहीं मरता तो और लोगों को मारता।
हरीशंकर माहौर, विधायक भाजपा
विकास दुबे को साजिश के तहत मारा गया है। विकास दुबे मर गया और यूपी की सरकार बच गई। वह जिंदा रहता तो सत्ताधारी नेताओं के कई राज खुल जाते। जरूरत इस बात की थी कि उसे जिंदा रखकर सख्ती से पूछताछ की जाती और सफेदपोशों के चेहरे बेनकाब किए जाते।
चंद्रगुप्त विक्रमादित्य, जिलाध्यक्ष कांग्रेस।
कानपुर पुलिस हत्याकांड के साथ इसके मुख्य आरोपी दुर्दांत अपराधी विकास दुबे को मध्य प्रदेश से कानपुर लाते समय गाड़ी पलटने व उसके भागने पर पुलिस द्वारा उसे मार गिराए जाने के पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसके साथ ही पुलिस व आपराधिक राजनीतिक तत्वों के गठजोड़ की भी सही पहचान कर उन्हें सख्त से सख्त सजा दिलाई जानी चाहिए।
बनी सिंह जाटव, जिलाध्यक्ष बसपा
पुलिस ने कानून को अपने हाथ में लिया है। विकास दुबे ने उज्जैन में खुद पुलिस के समक्ष समर्पण किया था तो फिर वह रास्ते से भागने की कोशिश क्यों करता। पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के नियमों का पालन नहीं किया। एनकाउंटर में भी पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन नहीं किया। इस पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट द्वारा न्यायिक जांच कराई जानी चाहिए।
यज्ञदत्त गौतम, वरिष्ठ अधिवक्ता।
विकास दुबे का जो एनकाउंटर हुआ है। तथ्यात्मक व विधिक रूप से वह भले ही गलत प्रतीत होता है, लेकिन सामाजिक रूप से हर गुंडे का यही अंत होना चाहिए। पुलिस ने सामाजिक तौर पर ठीक कार्रवाई की है। जरूरत इस बात की है कि भविष्य में राजनीतिक संरक्षण में इस तरह के बदमाश न पनप सकें।
हरीश कुमार शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता
विकास दुबे जैसे हर दहशतगर्द का यही अंजाम होना चाहिए। सवाल इस बात का भी है कि आखिर इस तरह के अपराधी समाज में पैदा कैसे होते हैं। जिस राजनीतिक संरक्षण और जिस पुलिस अधिकारियों के संरक्षण में विकास दुबे इतना बड़ा अपराधी बना। उन पर भी सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

प्रवीण वार्ष्णेय, मानवाधिकार कार्यकर्ता।
विकास जैसे दहशतगर्द को इस दुनिया में जीवित रहने का हक नहीं था। वह समाज के लिए विनाशक था। यदि वह जीवित रहता तो और ज्यादा खून-खराबा करता। पुलिस ने आत्मरक्षा के लिए एनकाउंटर किया है। पुलिस की यह कार्रवाई बिल्कुल ठीक है। विकास जैसे और अपराधियों को भी इसी तरह की सजा मिलनी चाहिए।
शरद माहेश्वरी, शहर अध्यक्ष भाजपा।
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