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हाथरस : लाभार्थियों को बांटे ग्रामीण आवासीय प्रमाणपत्र
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना के तहत शनिवार को कलेक्ट्रेट सभागार में डीएम रमेश रंजन ने लाभार्थियों को (ग्रामीण आवासीय प्रमाण पत्र) घरौनी का वितरण किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का प्रसारण भी वहां मौजूद लोेगों को दिखाया गया।
डीएम ने कहा कि यह शासन की महत्वाकांक्षी योजना है। स्वामित्व स्कीम केंद्रीय पंचायतराज मंत्रालय और राज्यों के पंचायतराज, राजस्व और भारतीय सर्वेक्षण विभाग का सामूहिक प्रयास है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के लिए एक एकीकृत संपत्ति सत्यापन के लिए समाधान देना है। इसमें नवीनतम ड्रोन सर्वेक्षण तकनीक को शामिल किया गया है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्र में ग्रामीण आबादी के क्षेत्रों का सीमांकन किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण आबादी क्षेत्र में संपत्ति मालिकों को प्रॉपर्टी कार्ड जारी करके संपत्ति के मालिकाना हक संबंधी विवादों को कम करना और उनके नागरिक अधिकारों का संरक्षण करना है।
ऑटोमेटेड कर संग्रह अभिलेखों के माध्यम से पंचायतों में कर संग्रह का दायरा बढ़ाना और सार्वजनिक उपयोग की भूमि की पहचान करके अतिक्रमण रोकना है। साथ ही कार्यक्रम के तहत बनाए गए नक्शों का लाभ उठाते हुए बेहतर गुणवत्ता वाली ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (जीपीडीपी) का निर्माण करना है। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को ऋण और अन्य वित्तीय लाभ प्राप्त करने के लिए अपनी संपत्ति को एक वित्तीय परिसंपत्ति के रूप में प्रयोग करने के सक्षम बनाते हुए उन्हें वित्तीय स्थिरता प्रदान करना और ग्रामीण नियोजन के लिए सटीक भूमि अभिलेखों (आबादी बंदोबस्त) का निर्माण करना है।
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एडीएम (वित्त/राजस्व) डॉ. बंसल अग्रवाल ने स्वामित्त योजना के तहत जिले में की गई कार्रवाई के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कुल 259 ग्रामों में कुल 5,3284 आवासीय अभिलेख घरौनी तैयार की गई है। इस अवसर पर प्रभारी अधिकारी कलेक्ट्रेट वेद सिंह चौहान, अपर जिला सूचना विज्ञान अधिकारी आलोक माहेश्वरी, ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर मनोज उपाध्याय, लाभार्थी एवं अन्य संबंधित अधिकारी/कर्मचारी आदि मौजूद थे। संवाद
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प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना के तहत शनिवार को कलेक्ट्रेट सभागार में डीएम रमेश रंजन ने लाभार्थियों को (ग्रामीण आवासीय प्रमाण पत्र) घरौनी का वितरण किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का प्रसारण भी वहां मौजूद लोेगों को दिखाया गया।
डीएम ने कहा कि यह शासन की महत्वाकांक्षी योजना है। स्वामित्व स्कीम केंद्रीय पंचायतराज मंत्रालय और राज्यों के पंचायतराज, राजस्व और भारतीय सर्वेक्षण विभाग का सामूहिक प्रयास है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के लिए एक एकीकृत संपत्ति सत्यापन के लिए समाधान देना है। इसमें नवीनतम ड्रोन सर्वेक्षण तकनीक को शामिल किया गया है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्र में ग्रामीण आबादी के क्षेत्रों का सीमांकन किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण आबादी क्षेत्र में संपत्ति मालिकों को प्रॉपर्टी कार्ड जारी करके संपत्ति के मालिकाना हक संबंधी विवादों को कम करना और उनके नागरिक अधिकारों का संरक्षण करना है।
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ऑटोमेटेड कर संग्रह अभिलेखों के माध्यम से पंचायतों में कर संग्रह का दायरा बढ़ाना और सार्वजनिक उपयोग की भूमि की पहचान करके अतिक्रमण रोकना है। साथ ही कार्यक्रम के तहत बनाए गए नक्शों का लाभ उठाते हुए बेहतर गुणवत्ता वाली ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (जीपीडीपी) का निर्माण करना है। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को ऋण और अन्य वित्तीय लाभ प्राप्त करने के लिए अपनी संपत्ति को एक वित्तीय परिसंपत्ति के रूप में प्रयोग करने के सक्षम बनाते हुए उन्हें वित्तीय स्थिरता प्रदान करना और ग्रामीण नियोजन के लिए सटीक भूमि अभिलेखों (आबादी बंदोबस्त) का निर्माण करना है।
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एडीएम (वित्त/राजस्व) डॉ. बंसल अग्रवाल ने स्वामित्त योजना के तहत जिले में की गई कार्रवाई के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कुल 259 ग्रामों में कुल 5,3284 आवासीय अभिलेख घरौनी तैयार की गई है। इस अवसर पर प्रभारी अधिकारी कलेक्ट्रेट वेद सिंह चौहान, अपर जिला सूचना विज्ञान अधिकारी आलोक माहेश्वरी, ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर मनोज उपाध्याय, लाभार्थी एवं अन्य संबंधित अधिकारी/कर्मचारी आदि मौजूद थे। संवाद