फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hathras News ›   Hathras: Potato yield fell by 25 to 30 percent from last year

हाथरस : पिछले साल से 25 से 30 फीसदी गिरी आलू की पैदावार

Wed, 02 Mar 2022 11:57 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 02 Mar 2022 11:57 PM IST
विज्ञापन
Hathras: Potato yield fell by 25 to 30 percent from last year
हाथरस : आलू की खोदाई करते मजदूर। संवाद - फोटो : HATHRAS
घनश्याम सिंह-
विज्ञापन

हाथरस। आलू उत्पादन में अग्रणी इस क्षेत्र में पिछले साल की अपेक्षा आलू की पैदावार में इस साल 25 से 30 फीसदी की कमी आई है। इसके पीछे मौसम का अनुकूल न होना और अन्य कारण किसान बता रहे हैं। वहीं कुछ किसानों का कहना है कि डीएपी की गुणवत्ता सही न होना भी इसका एक कारण है। जहां पर किसान 60 से 65 कट्टे प्रति बीघा आलू की पैदावार होने की उम्मदी लगाए गए हुए थे, वहां पर 40 से 45 कट्टा प्रति बीघा आलू की पैदावार निकल आ रही है।
पिछले दो साल से किसान को आलू का अच्छा भाव मिलने के बाद किसान ने इस बार आलू की पैदावार के लिए क्षेत्रफल यह सोच कर बढ़ाया कि आलू की पैदावार अच्छी होगी और फिर उसका भाव भी अच्छा ले सकेंगे। लेकिन बार बार मौसम के परिवर्तन ने आलू की पैदावार को 25 से 30 फीसदी तक घटा दिया है। इसे लेकर किसान आलू उत्पादक किसान परेशान हैं। संवाद
विज्ञापन

जिले में 52 हजार हेक्टेयर से अधिक आलू की पैदावार
हाथरस। पिछले साल 48,520 हेक्टेयर में आलू की फसल हुई थी। इससे पहले 45,360 हेक्टेयर में आलू की पैदावार हुई थी, जबकि इस वर्ष जिले में 52 हजार से अधिक क्षेत्र में आलू की पैदावार हुई है। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन

मौसम में कई बार हुए उतार-चढ़ाव के कारण इस वर्ष आलू की पैदावार में पिछले वर्ष की तुलना में 25 से 30 फीसदी कम निकल रही है। इसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार मौसम और खाद का सही न होना है।
-देशदीपक यादव, किसान
आलू की पैदावार भले ही कम हुई है, लेकिन पिछले साल की तुलना में आलू का क्षेत्रफल बढ़ा हुआ है। आलू का अच्छा भाव लेने के लिए उसे कोल्ड स्टोर में रख रहे हैं, ताकि भाव अधिक होने पर उसे बेच सकें।
-डालचंद्र बघेल, किसान
आलू की फसल में खूब लाग लगाई, लेकिन पैदावार पिछले साल की अपेक्षा काफी कम है। इसके पीछे डीएपी का सही न होना है। सरकारी दुकानों पर डीएपी नहीं मिली और न निजी दुकानों से डीएपी खरीदा, वह भी नकली था। तभी तो आलू की फसल पर उसका असर ही नहीं दिखा।
-बच्चू सिंह यादव, किसान
जहां आलू की पैदावार 60 से 65 बोरा प्रति बीघा होता था, वहां इस बार खोदाई में आलू 40 से 45 बोरा प्रति बीघा ही आलू निकल रहा है। इसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार डीएपी खाद है, क्योंकि प्राइवेट से खरीदा गया डीएपी सही नहीं था।

-गौरीशंकर वर्मा, किसान
इस बार जिले में 52 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में आलू की फसल हुई है। किसानों से मिल रही जानकारी के अनुसार पैदावार पिछले साल की अपेक्षा कम होना बताया जा रहा है। इसके लिए मौसम का अनुकूल न होना और खाद की गुणवत्ता सही न होने की जानकारी किसान दे रहे हैं।
-अनीता यादव, जिला उद्यान अधिकारी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed