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हाथरस : वायरल बुखार के बीच डेंगू के डर से सहमे लोग

Wed, 02 Nov 2022 11:10 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 02 Nov 2022 11:10 PM IST
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Hathras: People scared of dengue amid viral fever
हाथरस : जिला अस्पताल की ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने के लिए लगी मरीजों की भीड़। संवाद - फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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मौसम में आए बदलाव के चलते वायरल बुखार ने लोगों को चपेट में ले शुरू कर दिया है। इसमें तेजी से गिरते रोगी के प्लेटलेट्स के कारण लोगों को डेंगू का खतरा सता रहा है। निजी और सरकारी अस्पतालों की वाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में रोजाना 40 से 45 प्रतिशत मरीज वायरल के आ रहे हैं। चिकित्सकों द्वारा दवा के साथ लोगों को सावधानी बरतने की सलाह भी दी जा रही है।
चिकित्सकों ने बताया कि इस बार वायरल बुखार आक्रामक रूप दिखा रहा है। नाक बहने, गले में खराश, आंखें लाल होना, जोड़ों में दर्द, जुकाम और तेज बुखार के लक्षणों के साथ प्लेटलेट्स कम होने की शिकायत भी मरीजों में सामने आ रही हैं। वायरल बुखार के स्वरूप में बदलाव आया है। जिला अस्पताल की ओपीडी में वायरल बुखार के बहुत ज्यादा मरीज आ रहे हैं। इस बार वायरल में प्लेटलेट्स कम होने की शिकायत ज्यादा देखने को मिल रही है। संवाद
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बच्चे और बुजुर्ग सबसे अधिक पीड़ित
डॉ. पीके श्रीवास्तव ने बताया कि वायरल बुखार की चपेट में ज्यादातर बच्चे, बुजुर्ग व ऐसे लोग आ रहे हैं, जिन्हें श्वांस, शुगर और किडनी से संबंधित रोग व दमा है। इसकी वजह इनका कमजोर इम्यून सिस्टम है। इम्युनिटी शरीर की वह अंदरूनी शक्ति होती है, जो संक्रमण से लड़ती है। इम्यून सिस्टम कमजोर होने से शरीर के सेल्स व टिश्यू वातावरण में मौजूद वायरस व बैक्टीरिया से लड़ने में समक्ष नहीं हो पाते और बीमारी की चपेट में आ जाते हैं। बहुत से लोगों को यह लगता है कि इम्यून सिस्टम एकदम से कमजोर हो जाता है, जबकि ऐसा नहीं है। इम्यून सिस्टम तब कमजोर होता है, जब लंबे समय तक लोग गलत खानपान को अपनाते हैं।
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खांसने-छींकने पर सावधानी न बरतने से बढ़ा वायरल
जिला महिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. शैली सिंह ने बताया कि वायरल इन्फेक्शन इस कदर फैला हुआ है कि परिवार में अगर छह लोग हैं तो उसमें से तीन से चार लोग इसके चलते बुखार की चपेट में हैं। वायरल के बढ़ने की वजह संक्रमित व्यक्ति द्वारा छींकने और खांसने के दौरान सावधानी न बरतना है। ज्यादातर पीड़ित वायरल की चपेट में आने के बाद खांसते और छींकते वक्त नाक और मुंह पर रुमाल नहीं रखते, जिससे हवा में फैलने वाले वायरस के संपर्क में आने पर परिवार के दूसरे लोग भी इसकी चपेट में आ जाते हैं। यदि वायरल से पीड़ित मरीज खांसने व छींकने के दौरान रुमाल या टिश्यू पेपर का उपयोग करें और दूसरों से हाथ मिलाने से परहेज करें तो काफी हद तक अन्य लोगों में वायरस को फैलने से रोका जा सकता है।
खुद न लें एंटीबायोटिक्स
डॉ. केके शर्मा ने बताया कि कई मरीज हालत ज्यादा बिगड़ने के बाद आते हैं। ये वह लोग होते हैं, जो कई दिनों तक खुद ही डॉक्टर बनकर अपनी समझ के अनुसार दवा की दुकानों से एंटीबायोटिक्स लेते रहते हैं। एंटी बायोटिक्स से बुखार हो ठीक हो जाता, लेकिन वायरस पर यह असर नहीं करती। वायरल बुखार के लक्षण सामने आते ही अच्छे मेडिसन विशेषज्ञ से इलाज करवाकर इसे गंभीर रूप धारण करने से रोका जा सकता है।
ऐसे करें वायरल बुखार से बचाव
- वायरस शरीर पर तभी हावी होते है, जब इम्यून सिस्टम कमजोर हो। इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए पौष्टिक आहार लें। इस मौसम में सेब, नींबू, आंवला, मौसमी, अनार, हरी सब्जियां, सलाद, अंकुरित अनाज, मेवे का सेवन किया जा सकता है।
- ड्रीहाइड्रेशन से बचने के लिए खूब पानी पीएं। जो लोग फील्ड में अधिक रहते हैं, उन्हें ज्यादा पानी पीना चाहिए।
- सात घंटे की नींद जरूर लें। रात को जल्दी सोने और सुबह जल्दी उठने की आदत डालें।
- फास्ट फूड और बाजार में खुले में फबिकने वाले खाद्य पदार्थ बिल्कुल न खाएं।
- साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। खाना खाने से पहले व बाद में अच्छी तरह हाथ साफ करें।
- किसी के इस्तेमाल किए तौलिये का प्रयोग न करें।
- प्रदूषण व धूल मिट्टी वाली सड़कों पर जाने से बचें। अगर जाना पड़े तो मास्क पहनें या फिर चिकित्सक के परामर्श के अनुसार कॉटन के कपड़े से मुंह व नाक ढककर निकलें।

- वायरल बुखार की चपेट में आने पर इलाज के दौरान ज्यादा से ज्यादा आराम करें।
इन दिनों वायरल बुखार तेजी से फैल रहा है। ऐसे में बुखार आने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। अपने आप एंटी बायोटिक्स न लें। मास्क का उपयोग जरूर करें। हमारे यहां आने वाले मरीजों में 40 से 45 फीसदी मरीज वायरल बुखार के आ रहे हैं।
-डॉ. सूर्य प्रकाश, सीएमएस जिला अस्पताल
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