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हाथरस : जिला अस्पताल में नहीं बाल रोग विशेषज्ञ, बच्चों को नहीं मिल रहा इलाज
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हाथरस : बागला जिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ खाली पड़ा कमरा। संवाद
- फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जिला अस्पताल में लंबे समय से बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। इस कारण यहां बच्चों को उपचार के लिए लेकर आने वालों को निराशा हाथ लगती है। बच्चों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता। ऐसे में तीमारदारों को अपने बच्चे को निजी चिकित्सक के यहां उपचार के लिए ले जाना पड़ता है और ज्यादा खर्चा करना पड़ता है।
हाथरस को जिला बने 25 साल हो गए, लेकिन यहां का जिला अस्पताल अभी भी डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। यहां न तो दिल के मर्ज के डॉक्टर हैं और न हीं बच्चों के रोग का इलाज करने वाले विशेषज्ञ ही हैं। इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर (ईएमओ) न होने के कारण अस्पताल में नियुक्त डॉक्टरों को ही ईएमओ की ड्यूटी करनी पड़ रही है। यहां बच्चों को उपचार के लिए लाने वाले लोगों को या तो हर दिन निराशा हाथ लगती है या फिर दूसरे डॉक्टर को ही बच्चों को दिखाकर दवा ले जाते हैं।
सुबह से अस्पताल में अपने बेटे को दवा दिलवाने के लिए लाया हूं, लेकिन यहां बच्चों के डॉक्टर न होने की जानकारी मिली है। अब ऐसे में गरीब लोगों के बच्चों का उपचार कैसे होगा। किसी निजी चिकित्सक को ही दिखाना पड़ेगा।
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-दीपक निवासी सोखना
बेटी को उपचार के लिए अस्पताल लाई हूं। यहां आकर पता चला है कि बच्चों के डॉक्टर नहीं हैं। अस्पताल में काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। डॉक्टर न होने के कारण बच्चे का उपचार निजी चिकित्सक से कराना पड़ेगा।
-नीतू निवासी कछपुरा
अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। इस संबंध में शासन पत्र भेजा जा चुका है, ताकि बाल रोग विशेषज्ञ मिल सकें।
-डॉ. सूर्यप्रकाश, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
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जिला अस्पताल में लंबे समय से बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। इस कारण यहां बच्चों को उपचार के लिए लेकर आने वालों को निराशा हाथ लगती है। बच्चों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता। ऐसे में तीमारदारों को अपने बच्चे को निजी चिकित्सक के यहां उपचार के लिए ले जाना पड़ता है और ज्यादा खर्चा करना पड़ता है।
हाथरस को जिला बने 25 साल हो गए, लेकिन यहां का जिला अस्पताल अभी भी डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। यहां न तो दिल के मर्ज के डॉक्टर हैं और न हीं बच्चों के रोग का इलाज करने वाले विशेषज्ञ ही हैं। इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर (ईएमओ) न होने के कारण अस्पताल में नियुक्त डॉक्टरों को ही ईएमओ की ड्यूटी करनी पड़ रही है। यहां बच्चों को उपचार के लिए लाने वाले लोगों को या तो हर दिन निराशा हाथ लगती है या फिर दूसरे डॉक्टर को ही बच्चों को दिखाकर दवा ले जाते हैं।
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सुबह से अस्पताल में अपने बेटे को दवा दिलवाने के लिए लाया हूं, लेकिन यहां बच्चों के डॉक्टर न होने की जानकारी मिली है। अब ऐसे में गरीब लोगों के बच्चों का उपचार कैसे होगा। किसी निजी चिकित्सक को ही दिखाना पड़ेगा।
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-दीपक निवासी सोखना
बेटी को उपचार के लिए अस्पताल लाई हूं। यहां आकर पता चला है कि बच्चों के डॉक्टर नहीं हैं। अस्पताल में काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। डॉक्टर न होने के कारण बच्चे का उपचार निजी चिकित्सक से कराना पड़ेगा।
-नीतू निवासी कछपुरा
अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। इस संबंध में शासन पत्र भेजा जा चुका है, ताकि बाल रोग विशेषज्ञ मिल सकें।
-डॉ. सूर्यप्रकाश, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक