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हाथरस : इलाज के लिए दूसरे जिलों में जा रहे मरीज
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हाथरस : बागला जिला अस्पताल में लगी दांतों के एक्सरे की मशीन। संवाद
- फोटो : HATHRAS
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घनश्याम सिंह
हाथरस। मरीजों के बोझ से चरमराते सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ की संख्या घट रही है। संसाधनों के टोटा की वजह से मरीजों को ठीक से इलाज नहीं मिल पाता है। मजबूर होकर उन्हें दूसरे जनपदों का रुख करना पड़ता है। जिला अस्पताल में चिकित्सकों के 28 पद स्वीकृत हैं। लेकिन, इनमें सिर्फ 10 डॉक्टरों की ही तैनाती है। चार में से एक भी ईएमओ की तैनाती नहीं है। ऐसा ही कुछ हाल जिला महिला अस्पताल का है। 14 डॉक्टरों के स्वीकृत पदों के सापेक्ष मात्र छह डॉक्टरों की तैनाती यहां पर है, जिनमें से दो चिकित्सीय अवकाश पर हैं एक डॉक्टर बिना अवकाश स्वीकृत कराए ही कई महीने से गैर हाजिर चल रही हैं।
वहीं सीमित संसाधन और कम होती दवाओं की गहरी समस्या है। इसके चलते जनता को स्वास्थ्य सेवाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। शहर का जिला अस्पताल व जिला महिला अस्पताल सबसे पुराना है। सबसे अधिक एडवांस मेडिकल टेक्नोलॉजी यहां पर उपलब्ध होनी चाहिए थी। लेकिन दोनों अस्पताल सबसे पिछड़े अस्पताल बनकर रह गए हैं। जरा सी बीमारी पर भी मरीजों को अलीगढ़ व आगरा रेफर कर दिया जाता है। संवाद
नहीं हैं एमआरआई और डायलिसिस जैसी सुविधाएं
जिला अस्पताल में यहां जिले जैसे सुविधाएं नहीं हैं। डॉक्टरों की कमी है और संसाधनों का अभाव है। यहां पर अभी भी एमआरआई और डायलिसिस जैसी सुविधाएं नहीं हैं। स्पेशलिस्ट डॉक्टर होना तो यहां पर बहुत दूर की बात है। फिजीशियन तक नहीं हैं। इसके अलावा जिला अस्पताल की इमरजेंसी में एक भी ईएमओ की तैनाती नहीं हैं, इमरजेंसी में अस्पताल के डॉक्टरों की ही ड्यूटी रहती है।
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नहीं हो पाते दांतों के एक्स-रे
कहने को तो जिला अस्पताल में दांतों के एक्स-रे की मशीन लगी हुई है, लेकिन यह एक्सरे मशीन सफेद हाथी साबित हो रही है। जिसके कारण दांत से संबंधित रोग वाले मरीजों को निजी डॉक्टरों के यहां का रुख करना पड़ता है।
महिला अस्पताल में 30 और जिला अस्पताल में हैं 70 बेड
कहने को तो जिला महिला अस्पताल है, यहां पर कम से कम 100 बेड होने चाहिए थे, लेकिन संयुक्त अस्पताल होने के कारण 30 महिला अस्पताल के बेड और 70 जिला अस्पताल के बेड हैं।
यह नहीं है जिला अस्पताल में
- कोर्डियोलॉजिस्ट नहीं है, हृदय रोगों का उपचार नहीं मिल पाता।
- न्यूरोलॉजिस्ट नहीं है, सिर की चोट और ऐसी बीमारी वाले मरीजों को उपचार नहीं मिलता।
- एंडक्रोनोलॉजिस्ट नहीं है, लीवर और अन्य ऐसी बीमारी का उपचार नहीं हो पाता।
- डर्मोटोलोजिस्ट नहीं है, त्वचा संबंधी रोगों का उपचार नहीं मिलता है।
- एमआरआई की सुविधा नहीं है, जिसके कारण रोगों का डायग्नोसिस नहीं हो पाता।
- बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। जिस कारण बच्चों को सही उपचार नहीं मिलता है।
जिले में इतने हैं सरकारी अस्पताल
- एक जिला अस्पताल।
- एक जिला महिला अस्पताल।
- सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र।
- 25 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र।
- दो नगरीय स्वास्थ्य इकाई।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्याप्त चिकित्सकों की नहीं है तैनाती
जिले में सात सामुदायकि स्वास्थ्य केंद्र हैं। जिन पर प्रसूति रोग विशेषज्ञ के सात पद स्वीकृत हैं, जबकि दो की तैनाती है। इसी प्रकार बेहोशी वाले नौ डॉक्टरों के सापेक्ष एक ही हैं। बाल रोग विशेषज्ञ एक भी नहीं है। रेडियोलॉजिस्ट सात के सापेक्ष मात्र एक है। जनरल सर्जन स्वीकृत पद नौ के सापेक्ष एक है। जनरल फिजीशियन सात के सापेक्ष दो हैं। नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ सात पदों के सापेक्ष एक भी नहीं है।
- मैंने जब से कार्यभार संभाला है, तब से सुविधाएं बेहतर करने का प्रयास जारी है। अस्पताल परिसर में ही अपना आवास बनाया है। इन्हीं संसाधनों में अच्छी से अच्छी स्वास्थ्य सुविधा जनता को दिए जाने की कोशिश की जा रही है।
- डॉ. नरेश गोयल, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल।
- हमारे यहां डॉक्टरों की काफी कमी है। वहीं अन्य संसाधनों की भी कमी चल रही है। फिर भी जो सुविधा हमारे पास है, उसी से मरीजों को बेहतर उपचार देने का प्रयास है। जल्द ही डायलिसिस यूनिट भी बन कर तैयार हो जाएगी।
- डॉ. सूर्य प्रकाश, सीएमएस जिला अस्पताल।
- हमारे पास विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। जिसे लेकर शासन को भी पत्र भेज चुके हैं। जो जनशक्ति व संसाधन हम पर हैं, उन्हीं से अच्छे से अच्छा कार्य करने का प्रयास कर रहे हैं। उम्मीद है आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवा और बेहतर होगी। - डॉ, एएस वशिष्ठ, सीएमओ।
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हाथरस। मरीजों के बोझ से चरमराते सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ की संख्या घट रही है। संसाधनों के टोटा की वजह से मरीजों को ठीक से इलाज नहीं मिल पाता है। मजबूर होकर उन्हें दूसरे जनपदों का रुख करना पड़ता है। जिला अस्पताल में चिकित्सकों के 28 पद स्वीकृत हैं। लेकिन, इनमें सिर्फ 10 डॉक्टरों की ही तैनाती है। चार में से एक भी ईएमओ की तैनाती नहीं है। ऐसा ही कुछ हाल जिला महिला अस्पताल का है। 14 डॉक्टरों के स्वीकृत पदों के सापेक्ष मात्र छह डॉक्टरों की तैनाती यहां पर है, जिनमें से दो चिकित्सीय अवकाश पर हैं एक डॉक्टर बिना अवकाश स्वीकृत कराए ही कई महीने से गैर हाजिर चल रही हैं।
वहीं सीमित संसाधन और कम होती दवाओं की गहरी समस्या है। इसके चलते जनता को स्वास्थ्य सेवाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। शहर का जिला अस्पताल व जिला महिला अस्पताल सबसे पुराना है। सबसे अधिक एडवांस मेडिकल टेक्नोलॉजी यहां पर उपलब्ध होनी चाहिए थी। लेकिन दोनों अस्पताल सबसे पिछड़े अस्पताल बनकर रह गए हैं। जरा सी बीमारी पर भी मरीजों को अलीगढ़ व आगरा रेफर कर दिया जाता है। संवाद
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नहीं हैं एमआरआई और डायलिसिस जैसी सुविधाएं
जिला अस्पताल में यहां जिले जैसे सुविधाएं नहीं हैं। डॉक्टरों की कमी है और संसाधनों का अभाव है। यहां पर अभी भी एमआरआई और डायलिसिस जैसी सुविधाएं नहीं हैं। स्पेशलिस्ट डॉक्टर होना तो यहां पर बहुत दूर की बात है। फिजीशियन तक नहीं हैं। इसके अलावा जिला अस्पताल की इमरजेंसी में एक भी ईएमओ की तैनाती नहीं हैं, इमरजेंसी में अस्पताल के डॉक्टरों की ही ड्यूटी रहती है।
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नहीं हो पाते दांतों के एक्स-रे
कहने को तो जिला अस्पताल में दांतों के एक्स-रे की मशीन लगी हुई है, लेकिन यह एक्सरे मशीन सफेद हाथी साबित हो रही है। जिसके कारण दांत से संबंधित रोग वाले मरीजों को निजी डॉक्टरों के यहां का रुख करना पड़ता है।
महिला अस्पताल में 30 और जिला अस्पताल में हैं 70 बेड
कहने को तो जिला महिला अस्पताल है, यहां पर कम से कम 100 बेड होने चाहिए थे, लेकिन संयुक्त अस्पताल होने के कारण 30 महिला अस्पताल के बेड और 70 जिला अस्पताल के बेड हैं।
यह नहीं है जिला अस्पताल में
- कोर्डियोलॉजिस्ट नहीं है, हृदय रोगों का उपचार नहीं मिल पाता।
- न्यूरोलॉजिस्ट नहीं है, सिर की चोट और ऐसी बीमारी वाले मरीजों को उपचार नहीं मिलता।
- एंडक्रोनोलॉजिस्ट नहीं है, लीवर और अन्य ऐसी बीमारी का उपचार नहीं हो पाता।
- डर्मोटोलोजिस्ट नहीं है, त्वचा संबंधी रोगों का उपचार नहीं मिलता है।
- एमआरआई की सुविधा नहीं है, जिसके कारण रोगों का डायग्नोसिस नहीं हो पाता।
- बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। जिस कारण बच्चों को सही उपचार नहीं मिलता है।
जिले में इतने हैं सरकारी अस्पताल
- एक जिला अस्पताल।
- एक जिला महिला अस्पताल।
- सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र।
- 25 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र।
- दो नगरीय स्वास्थ्य इकाई।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्याप्त चिकित्सकों की नहीं है तैनाती
जिले में सात सामुदायकि स्वास्थ्य केंद्र हैं। जिन पर प्रसूति रोग विशेषज्ञ के सात पद स्वीकृत हैं, जबकि दो की तैनाती है। इसी प्रकार बेहोशी वाले नौ डॉक्टरों के सापेक्ष एक ही हैं। बाल रोग विशेषज्ञ एक भी नहीं है। रेडियोलॉजिस्ट सात के सापेक्ष मात्र एक है। जनरल सर्जन स्वीकृत पद नौ के सापेक्ष एक है। जनरल फिजीशियन सात के सापेक्ष दो हैं। नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ सात पदों के सापेक्ष एक भी नहीं है।
- मैंने जब से कार्यभार संभाला है, तब से सुविधाएं बेहतर करने का प्रयास जारी है। अस्पताल परिसर में ही अपना आवास बनाया है। इन्हीं संसाधनों में अच्छी से अच्छी स्वास्थ्य सुविधा जनता को दिए जाने की कोशिश की जा रही है।
- डॉ. नरेश गोयल, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल।
- हमारे यहां डॉक्टरों की काफी कमी है। वहीं अन्य संसाधनों की भी कमी चल रही है। फिर भी जो सुविधा हमारे पास है, उसी से मरीजों को बेहतर उपचार देने का प्रयास है। जल्द ही डायलिसिस यूनिट भी बन कर तैयार हो जाएगी।
- डॉ. सूर्य प्रकाश, सीएमएस जिला अस्पताल।
- हमारे पास विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। जिसे लेकर शासन को भी पत्र भेज चुके हैं। जो जनशक्ति व संसाधन हम पर हैं, उन्हीं से अच्छे से अच्छा कार्य करने का प्रयास कर रहे हैं। उम्मीद है आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवा और बेहतर होगी। - डॉ, एएस वशिष्ठ, सीएमओ।