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हाथरस : बारिश और कांवड़ यात्रा से रोडवेज को लाखों का नुकसान
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हाथरस : रोडवेज बस स्टैंड पर खड़ीं बसें। संवाद
- फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जुलाई माह में हो रही लगातार बारिश से आमजन को भले ही गर्मी से राहत मिल रही है, लेकिन परिवहन निगम की आमदनी पर इसका बुरा असर पड़ रहा है। रही-सही कसर कांवड़ यात्रा के चलते वाहनों के आवागमन पर लग रही पाबंदियां पूरी कर रही हैं। सोमवार को कांवड़ यात्रा के चलते कई जिलों में रोडवेज की बसें बस स्टैंड तक नहीं पहुंच पा रही है। वहीं बारिश के चलते यात्री कम ही सफर कर रहे हैं। इस कारण हाथरस डिपो को लाखों रुपये का नुकसान हर रोज उठाना पड़ रहा है। इसे लेकर डिपो के अधिकारी परेशान हैं।
उल्लेखनीय है कि हाथरस डिपो में वर्तमान में 77 बसें हैं। ये बसें हरिद्वार, मुरादाबाद, आगरा और अलीगढ़ आदि मार्गों पर चलती हैं। अब सावन के महीने में आए दिन बारिश हो रही है। वहीं कांवड़ यात्रा के चलते बसों को शहरों के अंदर प्रवेश नहीं मिल रहा है। इस कारण डिपो की बसें खाली दौड़ रही हैं।
पहले हाथरस डिपो की आमदनी करीब 10 लाख रुपये प्रतिदिन थी। अब यह आंकड़ा साढ़े सात लाख रुपये प्रतिदिन पर आकर टिक गया है। इस कारण डिपो को हर रोज लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (एआरएम) शशी रानी का कहना है कि बारिश के चलते आमदनी में गिरावट आई है। साथ ही कांवड़ यात्रा के चलते नो जगह-जगह नो एंट्री लागू है। इस कारण बसें बसस्टैंड तक नहीं पहुंच पा रही हैं। संवाद
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जुलाई माह में हो रही लगातार बारिश से आमजन को भले ही गर्मी से राहत मिल रही है, लेकिन परिवहन निगम की आमदनी पर इसका बुरा असर पड़ रहा है। रही-सही कसर कांवड़ यात्रा के चलते वाहनों के आवागमन पर लग रही पाबंदियां पूरी कर रही हैं। सोमवार को कांवड़ यात्रा के चलते कई जिलों में रोडवेज की बसें बस स्टैंड तक नहीं पहुंच पा रही है। वहीं बारिश के चलते यात्री कम ही सफर कर रहे हैं। इस कारण हाथरस डिपो को लाखों रुपये का नुकसान हर रोज उठाना पड़ रहा है। इसे लेकर डिपो के अधिकारी परेशान हैं।
उल्लेखनीय है कि हाथरस डिपो में वर्तमान में 77 बसें हैं। ये बसें हरिद्वार, मुरादाबाद, आगरा और अलीगढ़ आदि मार्गों पर चलती हैं। अब सावन के महीने में आए दिन बारिश हो रही है। वहीं कांवड़ यात्रा के चलते बसों को शहरों के अंदर प्रवेश नहीं मिल रहा है। इस कारण डिपो की बसें खाली दौड़ रही हैं।
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पहले हाथरस डिपो की आमदनी करीब 10 लाख रुपये प्रतिदिन थी। अब यह आंकड़ा साढ़े सात लाख रुपये प्रतिदिन पर आकर टिक गया है। इस कारण डिपो को हर रोज लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (एआरएम) शशी रानी का कहना है कि बारिश के चलते आमदनी में गिरावट आई है। साथ ही कांवड़ यात्रा के चलते नो जगह-जगह नो एंट्री लागू है। इस कारण बसें बसस्टैंड तक नहीं पहुंच पा रही हैं। संवाद
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