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हाथरस: जागरूकता के अभाव में कागजों में सिमट गई कृषक वृक्षधन योजना
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जिले में मुख्यमंत्री कृषक वृक्षधन योजना जागरूकता के अभाव में कागजों में सिमट गई। योजना के तहत पौधे लगाने के साथ देखभाल करने पर 35 रुपये की राशि किस्तों में दी जानी थी। इस योजना का जिले के एक भी किसान को लाभ नहीं मिला है। विभागीय अधिकारियों का पौधरोपण पर ही ध्यान रहा।
उल्लेखनीय कि प्रदेश सरकार द्वारा हरियाली की अलख जगाने के साथ किसान की आय को बढ़ाने के लिए इस योजना की शुरुआत की गई है। योजना के तहत यदि कोई किसान अपने खेत में अमरूद, आम या अन्य कोई पौधे लगाता है। उनकी देखभाल करता है तो उसे गड्ढा खोदने से लेकर पौधे की देखभाल करने पर किस्तों में 35 रुपये की राशि दी जानी थी। योजना का लाभ भूमिहीन और कृषकों को मिलना था।
योजना में महिलाओं को प्राथमिकता दी गई थी। वन विभाग की ओर से निशुल्क पौधे उपलब्ध होने थे, लेकिन जागरूकता के अभाव में यह योजना कागजों में ही सिमटकर रह गई। क्षेत्रीय वन अधिकारी एसआर ओझा ने बताया कि योजना का लाभ विशेष श्रेणी के लोगों को दिया जाना था। ग्राम विकास विभाग की ओर योजना का लाभ दिया जाना था, लेकिन योजना का लाभ लोगों को नहीं मिल पाया है।
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जिले में मुख्यमंत्री कृषक वृक्षधन योजना जागरूकता के अभाव में कागजों में सिमट गई। योजना के तहत पौधे लगाने के साथ देखभाल करने पर 35 रुपये की राशि किस्तों में दी जानी थी। इस योजना का जिले के एक भी किसान को लाभ नहीं मिला है। विभागीय अधिकारियों का पौधरोपण पर ही ध्यान रहा।
उल्लेखनीय कि प्रदेश सरकार द्वारा हरियाली की अलख जगाने के साथ किसान की आय को बढ़ाने के लिए इस योजना की शुरुआत की गई है। योजना के तहत यदि कोई किसान अपने खेत में अमरूद, आम या अन्य कोई पौधे लगाता है। उनकी देखभाल करता है तो उसे गड्ढा खोदने से लेकर पौधे की देखभाल करने पर किस्तों में 35 रुपये की राशि दी जानी थी। योजना का लाभ भूमिहीन और कृषकों को मिलना था।
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योजना में महिलाओं को प्राथमिकता दी गई थी। वन विभाग की ओर से निशुल्क पौधे उपलब्ध होने थे, लेकिन जागरूकता के अभाव में यह योजना कागजों में ही सिमटकर रह गई। क्षेत्रीय वन अधिकारी एसआर ओझा ने बताया कि योजना का लाभ विशेष श्रेणी के लोगों को दिया जाना था। ग्राम विकास विभाग की ओर योजना का लाभ दिया जाना था, लेकिन योजना का लाभ लोगों को नहीं मिल पाया है।
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