{"_id":"61900930498d1231ef3b87b1","slug":"hathras-kamala-bazaar-named-after-chacha-nehru-s-wife-hathras-news-ali278082779","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाथरस : चाचा नेहरू की पत्नी के नाम पर पड़ा कमला बाजार का नाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाथरस : चाचा नेहरू की पत्नी के नाम पर पड़ा कमला बाजार का नाम
विज्ञापन
हाथरस : कमला नेहरू बाजार के नाम का लगा पत्थर। संवाद
- फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
शहर स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी तमाम यादें संजोए हुए है। आजादी से पूर्व पंडित जवाहर लाल नेहरू पत्नी कमला नेहरू के साथ हाथरस आए थे। उस समय शहर के एक बाजार का नाम कमला नेहरू बाजार रखा गया था। इसे अब कमला बाजार के नाम से जाना जाता है। कमला नेहरू बाजार के नाम का शिलालेख भी मंदिर के द्वार पर लगा हुआ है।
देशभर में आजादी की खातिर आंदोलन चल रहा था। अंग्रेजों से लोहा लेने के लिए क्रांतिकारी लोगों को एकजुट करने में लगे हुए थे। हाथरस में भी स्वाधीनता संग्राम का बिगुल बजा हुआ था। इस दौरान सन 1932 से पूर्व भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू व उनकी पत्नी कमला नेहरू हाथरस आए थे। सासनी गेट से क्रांति चौक की ओर जाने वाले बाजार में उन्होंने आंदोलनकारियों को संबोधित किया था। उसी समय इस बाजार को कमला नेहरू बाजार का नाम दिया गया। बाद में इसे मान्यता मिल गई और कमला बाजार स्थित कामेश्वर महादेव मंदिर के द्वार पर कमला नेहरू बाजार का शिलालेख भी लगाया गया, जो आज तक लगा हुआ है। वर्तमान में इस बाजार को कमला बाजार के नाम से जाना जाता है।
इस बारे में बुजुर्ग बताते हैं कि चाचा नेहरू और कमला नेहरू ने भाषणों से आंदोलनकारियों में जान फूंक दी थी। कुछ लोगों के साथ मिलकर उन्होंने अंग्रेजों को टक्कर देने की रणनीति भी तैयार की। चाचा नेहरू के भाषणों से स्थानीय लोग काफी प्रभावित हुए। धीरे-धीरे आजादी की लड़ाई लड़ने वालों की फौज हाथरस में तैयार हो गई। उस सभा की याद कमला नेहरू बाजार से जुड़ी हुई है। जो सासनी गेट से बख्तावर गली के मोड़ तक है। शहर के कई लोग इस हकीकत के बारे में नहीं जानते होंगे। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
शहर स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी तमाम यादें संजोए हुए है। आजादी से पूर्व पंडित जवाहर लाल नेहरू पत्नी कमला नेहरू के साथ हाथरस आए थे। उस समय शहर के एक बाजार का नाम कमला नेहरू बाजार रखा गया था। इसे अब कमला बाजार के नाम से जाना जाता है। कमला नेहरू बाजार के नाम का शिलालेख भी मंदिर के द्वार पर लगा हुआ है।
देशभर में आजादी की खातिर आंदोलन चल रहा था। अंग्रेजों से लोहा लेने के लिए क्रांतिकारी लोगों को एकजुट करने में लगे हुए थे। हाथरस में भी स्वाधीनता संग्राम का बिगुल बजा हुआ था। इस दौरान सन 1932 से पूर्व भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू व उनकी पत्नी कमला नेहरू हाथरस आए थे। सासनी गेट से क्रांति चौक की ओर जाने वाले बाजार में उन्होंने आंदोलनकारियों को संबोधित किया था। उसी समय इस बाजार को कमला नेहरू बाजार का नाम दिया गया। बाद में इसे मान्यता मिल गई और कमला बाजार स्थित कामेश्वर महादेव मंदिर के द्वार पर कमला नेहरू बाजार का शिलालेख भी लगाया गया, जो आज तक लगा हुआ है। वर्तमान में इस बाजार को कमला बाजार के नाम से जाना जाता है।
विज्ञापन
इस बारे में बुजुर्ग बताते हैं कि चाचा नेहरू और कमला नेहरू ने भाषणों से आंदोलनकारियों में जान फूंक दी थी। कुछ लोगों के साथ मिलकर उन्होंने अंग्रेजों को टक्कर देने की रणनीति भी तैयार की। चाचा नेहरू के भाषणों से स्थानीय लोग काफी प्रभावित हुए। धीरे-धीरे आजादी की लड़ाई लड़ने वालों की फौज हाथरस में तैयार हो गई। उस सभा की याद कमला नेहरू बाजार से जुड़ी हुई है। जो सासनी गेट से बख्तावर गली के मोड़ तक है। शहर के कई लोग इस हकीकत के बारे में नहीं जानते होंगे। संवाद
विज्ञापन