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हाथरस : कोरोना काल में उद्योग-धंधे प्रभावित, बिजली की खपत हुई कम
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गौरव भारद्वाज
हाथरस। कोरोना संक्रमण का यहां के उद्योग-धंधों पर भी असर पड़ा। यहां की फैक्टरियों की मशीनरी बंद रही। इस कारण बिजली की खपत काफी कम हुई है। बिजली विभाग का राजस्व भी घटना है।
शहर में रेडीमेड गारमेंट्स, हैंडीक्राफ्ट, पावरलूम, हींग, दाल, रंग-गुलाल जैसे उद्योग हैं। कोरोना काल का असर यहां के उद्योग-धंधे पर पड़ा। कई औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन बंद रहा तो कई में काफी कम उत्पादन हुआ। इसके चलते मशीनरी बंद रही और बिजली की खपत कम हुई। यदि आंकड़े देखें तो वर्ष 2019 में 1351 मेगावाट बिजली की खपत हुई। उसके बाद वर्ष 2020 में बिजली खपत का आंकड़ा 55 मेगावाट घटते हुए 1295 पर पहुंच गया।
वर्ष 2021 में कोरोना ने मार्च में फिर से पांव पसारे तो बिजली की खपत 930 मेगावाट हुई। बिजली की खपत कम होने से महकमे का राजस्व भी गिरा है। अधिशासी अभियंता परीक्षण प्रमोद कुशवाहा का कहना है कि कोरोना के चलते कई उद्योग-धंधे कम हुए हैं। इस कारण बिजली की खपत प्रभावित हुई है। संवाद
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हाथरस। कोरोना संक्रमण का यहां के उद्योग-धंधों पर भी असर पड़ा। यहां की फैक्टरियों की मशीनरी बंद रही। इस कारण बिजली की खपत काफी कम हुई है। बिजली विभाग का राजस्व भी घटना है।
शहर में रेडीमेड गारमेंट्स, हैंडीक्राफ्ट, पावरलूम, हींग, दाल, रंग-गुलाल जैसे उद्योग हैं। कोरोना काल का असर यहां के उद्योग-धंधे पर पड़ा। कई औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन बंद रहा तो कई में काफी कम उत्पादन हुआ। इसके चलते मशीनरी बंद रही और बिजली की खपत कम हुई। यदि आंकड़े देखें तो वर्ष 2019 में 1351 मेगावाट बिजली की खपत हुई। उसके बाद वर्ष 2020 में बिजली खपत का आंकड़ा 55 मेगावाट घटते हुए 1295 पर पहुंच गया।
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वर्ष 2021 में कोरोना ने मार्च में फिर से पांव पसारे तो बिजली की खपत 930 मेगावाट हुई। बिजली की खपत कम होने से महकमे का राजस्व भी गिरा है। अधिशासी अभियंता परीक्षण प्रमोद कुशवाहा का कहना है कि कोरोना के चलते कई उद्योग-धंधे कम हुए हैं। इस कारण बिजली की खपत प्रभावित हुई है। संवाद
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