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हाथरस : निर्दलीय भी दिखा चुके हैं विधानसभा चुनाव में दम
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दल जोर-शोर से तैयारी कर रहे हैं। हर बार चुनाव में यह भी होता है कि जब कुछ दावेदारों को टिकट नहीं मिलता तो वह बागी होकर निर्दलीय भी मैदान में चुनाव लड़ते हैं। ऐसे में वह बड़े दलों के प्रत्याशियों की जीत की राह भी मुश्किल कर देते हैं। इस जिले में भी कई बार बड़े दलों के प्रत्याशी चुनाव हार चुके हैं और निर्दलीय जीत हासिल कर चुके हैं।
सिकंदराराऊ विधानसभा सीट का इतिहास देखें तो इस सीट पर अब तक अब तक चार बार निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव जीत चुके हैं। इसकी शुरुआत वर्ष 1962 से हुई। उस समय नेकराम शर्मा ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीता। उसके बाद फिर इसी सीट पर वर्ष 167 में नेकराम शर्मा ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीता और कांग्रेस के ओ सिंह को करीब सात हजार वोटों से चुनाव हराया। इस सीट पर निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत का सिलसिला यहीं नहीं थमा।
तदुपरांत इससे अगला चुनाव निर्दलीय जगदीश गांधी ने आरपीआई के उम्मीदवार को पांच हजार वोटों से हराकर जीता। उसके बाद वर्ष 2002 में निर्दलीय अमर सिंह यादव वहां से चुनाव जीत गए। तब उन्होंने भाजपा के यशपाल सिंह चौहान को परास्त किया था। हालांकि हाथरस विधानसभा सीट पर जनता ने कभी निर्दलीय उम्मीदवार को नहीं जिताया और यहां दलीय उम्मीदवारों के बीच ही मुकाबला होता रहा। पूरे देश में जब कांग्रेस की लहर चल रही थी तो वर्ष 1957 में स्वाधीनता सेनानी टीकाराम पुजारी ने सादाबाद सीट से निर्दलीय जीतकर क्षेत्र में अपनी पकड़ साबित कर दी थी। संवाद
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अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दल जोर-शोर से तैयारी कर रहे हैं। हर बार चुनाव में यह भी होता है कि जब कुछ दावेदारों को टिकट नहीं मिलता तो वह बागी होकर निर्दलीय भी मैदान में चुनाव लड़ते हैं। ऐसे में वह बड़े दलों के प्रत्याशियों की जीत की राह भी मुश्किल कर देते हैं। इस जिले में भी कई बार बड़े दलों के प्रत्याशी चुनाव हार चुके हैं और निर्दलीय जीत हासिल कर चुके हैं।
सिकंदराराऊ विधानसभा सीट का इतिहास देखें तो इस सीट पर अब तक अब तक चार बार निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव जीत चुके हैं। इसकी शुरुआत वर्ष 1962 से हुई। उस समय नेकराम शर्मा ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीता। उसके बाद फिर इसी सीट पर वर्ष 167 में नेकराम शर्मा ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीता और कांग्रेस के ओ सिंह को करीब सात हजार वोटों से चुनाव हराया। इस सीट पर निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत का सिलसिला यहीं नहीं थमा।
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तदुपरांत इससे अगला चुनाव निर्दलीय जगदीश गांधी ने आरपीआई के उम्मीदवार को पांच हजार वोटों से हराकर जीता। उसके बाद वर्ष 2002 में निर्दलीय अमर सिंह यादव वहां से चुनाव जीत गए। तब उन्होंने भाजपा के यशपाल सिंह चौहान को परास्त किया था। हालांकि हाथरस विधानसभा सीट पर जनता ने कभी निर्दलीय उम्मीदवार को नहीं जिताया और यहां दलीय उम्मीदवारों के बीच ही मुकाबला होता रहा। पूरे देश में जब कांग्रेस की लहर चल रही थी तो वर्ष 1957 में स्वाधीनता सेनानी टीकाराम पुजारी ने सादाबाद सीट से निर्दलीय जीतकर क्षेत्र में अपनी पकड़ साबित कर दी थी। संवाद
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