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हाथरस : पंचायत चुनाव के चलते घटी गेहूं की आवक
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
पंचायत चुनाव का असर मंडी समिति में गेहूं की आवक पर भी पड़ा है। ग्रामीण क्षेत्र में इन-दिनों हर कोई चुनाव में व्यस्त है। यही वजह है कि मंडी में गेहूं की आवक घट गई है। मंडी परिसर में इन-दिनों सन्नाटा पसरा हुआ है। गेहूं खरीद में करीब 30 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। इसे लेकर आढ़तिया खासे परेशान हैं।
उल्लेखनीय है कि हाथरस मंडी में इन-दिनों करीब 200 दुकानों पर गेहूं की खरीद हो रही है। दाना पतला होने के कारण किसानों के गेहूं को क्रय केंद्रों पर आपत्ति लगाकर फेल किया जा रहा है। किसान 1,700 से 1,800 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर किसान को गेहूं बेच रहे हैं, लेकिन अब चुनाव के चलते आढ़तियों के यहां भी सन्नाटा पसर रहा है।
आढ़तियों का कहना है कि इन-दिनों उनके यहां गेहूं की आवक 30 फीसदी तक कम हो गई है। आवक में कमी का असर मंडी समिति के राजस्व पर भी दिख रहा है। उनके राजस्व में भी कमी आई है। इससे मंडी अधिकारियों के चेहरे पर भी चिंता की लकीरें हैं।
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पंचायत चुनाव का असर मंडी समिति में गेहूं की आवक पर भी पड़ा है। ग्रामीण क्षेत्र में इन-दिनों हर कोई चुनाव में व्यस्त है। यही वजह है कि मंडी में गेहूं की आवक घट गई है। मंडी परिसर में इन-दिनों सन्नाटा पसरा हुआ है। गेहूं खरीद में करीब 30 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। इसे लेकर आढ़तिया खासे परेशान हैं।
उल्लेखनीय है कि हाथरस मंडी में इन-दिनों करीब 200 दुकानों पर गेहूं की खरीद हो रही है। दाना पतला होने के कारण किसानों के गेहूं को क्रय केंद्रों पर आपत्ति लगाकर फेल किया जा रहा है। किसान 1,700 से 1,800 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर किसान को गेहूं बेच रहे हैं, लेकिन अब चुनाव के चलते आढ़तियों के यहां भी सन्नाटा पसर रहा है।
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आढ़तियों का कहना है कि इन-दिनों उनके यहां गेहूं की आवक 30 फीसदी तक कम हो गई है। आवक में कमी का असर मंडी समिति के राजस्व पर भी दिख रहा है। उनके राजस्व में भी कमी आई है। इससे मंडी अधिकारियों के चेहरे पर भी चिंता की लकीरें हैं।
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