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हाथरस : 100 साल तक यही स्थिति रही तो भारत में एक भी जैनी नहीं बचेगा : निर्भय सागर
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हाथरस : प्रवचन देते आचार्य निर्भय सागर जी महाराज। संवाद
- फोटो : HATHRAS
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हलवाई खाना स्थित पंचायती दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में शुक्रवार को प्रवचन करते हुए आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज के प्रवचन हुए। उन्होंने देश, धर्म, समाज व लव जेहाद आदि पर विषयों पर चर्चा की। उन्होंने प्रवचन में कहा कि आने वाले 100 साल में देश में यही स्थिति बनी रही तो एक भी जैनी नहीं बचेगा, इसलिए कम से कम चार पुत्र होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि जैन दर्शन के अनुसार अयोध्या नगरी देवों द्वारा बसाई गई थी। जब भी वहां खुदाई होती है तो वहां जैन मूर्तियां निकलती हैं।
उन्होंने महंगाई पर चर्चा करते हुए कहा कि कहीं कोई महंगाई नही है। पहले हम एक सब्जी साथ 20 लोग बैठकर खाना खा लिया करते थे। अब सब्जियां चार बन रही हैं, लेकिन कोई खाने वाले नहीं हैं। जब आपके एक पुत्र होगा तो आप न तो धर्म के काम कर सकेंगे और न ही समाज व देश के बारे में सोच सकेंगे, इसलिए कम से कम चार पुत्र होना आवश्यक है। जो देश, धर्म, समाज व जैन कुल की सेवा कर सकें। आपके घर में बच्चे नहीं हैं तो यह धन किस काम का है। आपका एक पुत्र देश सेवा में जा सकता है, दूसरा पुत्र नौकरी कर सकता है, तीसरा पुत्र खेती कर सकता है और चौथा पुत्र समाज की सेवा कर सकता है।
उन्होंने कहा कि फिरोजाबाद के चंदवाड़ा स्थित चंद्रप्रभु भगवान जैन मंदिर में 17 हजार जैन समाज के लोगों को जिंदा दफना दिया गया था। आज भी वहां खोदने पर कंकाल ही निकलते हैं। छह महीने तक जैन धर्म की पुस्तकों की होली जलाई गई थी। उन्होंने बताया कि जब भारत से पाकिस्तान अलग हुआ तो उस समय वहां 75 हजार जैन परिवार और 268 मंदिर थे, लेकिन अब वहां एक भी जैन परिवार नहीं है। इसी तरह ईराक और ईरान में रत्नों का व्यापार जैन समाज के लोग करते थे। धीरे-धीरे वहां भी एक भी जैन परिवार नही बचा। धीरे-धीरे जैन धर्म जम्मू-कश्मीर, असोम, बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल में समाप्त हो गया है। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ में जैन समाज के 500 परिवार हैं, लेकिन बच्चे मात्र 89 हैं। अगर यही स्थिति रही तो भारत में जैन समाज के लोग पूरी तरह से समाप्त हो जाएंगे।
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इस मौके पर श्री जैन नवयुवक सभा के अध्यक्ष उमाशंकर जैन, संजीव जैन भूरा, कमलेश जैन, सुधीर जैन, राकेश जैन, राजेश जैन, विशाल जैन, पंकज जैन, अमित जैन, मोनू जैन, धर्मेंद्र जैन, मुकेश जैन, तन्नू जैन, कपिल जैन आदि थे। संवाद
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हलवाई खाना स्थित पंचायती दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में शुक्रवार को प्रवचन करते हुए आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज के प्रवचन हुए। उन्होंने देश, धर्म, समाज व लव जेहाद आदि पर विषयों पर चर्चा की। उन्होंने प्रवचन में कहा कि आने वाले 100 साल में देश में यही स्थिति बनी रही तो एक भी जैनी नहीं बचेगा, इसलिए कम से कम चार पुत्र होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि जैन दर्शन के अनुसार अयोध्या नगरी देवों द्वारा बसाई गई थी। जब भी वहां खुदाई होती है तो वहां जैन मूर्तियां निकलती हैं।
उन्होंने महंगाई पर चर्चा करते हुए कहा कि कहीं कोई महंगाई नही है। पहले हम एक सब्जी साथ 20 लोग बैठकर खाना खा लिया करते थे। अब सब्जियां चार बन रही हैं, लेकिन कोई खाने वाले नहीं हैं। जब आपके एक पुत्र होगा तो आप न तो धर्म के काम कर सकेंगे और न ही समाज व देश के बारे में सोच सकेंगे, इसलिए कम से कम चार पुत्र होना आवश्यक है। जो देश, धर्म, समाज व जैन कुल की सेवा कर सकें। आपके घर में बच्चे नहीं हैं तो यह धन किस काम का है। आपका एक पुत्र देश सेवा में जा सकता है, दूसरा पुत्र नौकरी कर सकता है, तीसरा पुत्र खेती कर सकता है और चौथा पुत्र समाज की सेवा कर सकता है।
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उन्होंने कहा कि फिरोजाबाद के चंदवाड़ा स्थित चंद्रप्रभु भगवान जैन मंदिर में 17 हजार जैन समाज के लोगों को जिंदा दफना दिया गया था। आज भी वहां खोदने पर कंकाल ही निकलते हैं। छह महीने तक जैन धर्म की पुस्तकों की होली जलाई गई थी। उन्होंने बताया कि जब भारत से पाकिस्तान अलग हुआ तो उस समय वहां 75 हजार जैन परिवार और 268 मंदिर थे, लेकिन अब वहां एक भी जैन परिवार नहीं है। इसी तरह ईराक और ईरान में रत्नों का व्यापार जैन समाज के लोग करते थे। धीरे-धीरे वहां भी एक भी जैन परिवार नही बचा। धीरे-धीरे जैन धर्म जम्मू-कश्मीर, असोम, बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल में समाप्त हो गया है। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ में जैन समाज के 500 परिवार हैं, लेकिन बच्चे मात्र 89 हैं। अगर यही स्थिति रही तो भारत में जैन समाज के लोग पूरी तरह से समाप्त हो जाएंगे।
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इस मौके पर श्री जैन नवयुवक सभा के अध्यक्ष उमाशंकर जैन, संजीव जैन भूरा, कमलेश जैन, सुधीर जैन, राकेश जैन, राजेश जैन, विशाल जैन, पंकज जैन, अमित जैन, मोनू जैन, धर्मेंद्र जैन, मुकेश जैन, तन्नू जैन, कपिल जैन आदि थे। संवाद