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हाथरस : कहीं आमने-सामने की टक्कर तो कहीं त्रिकोणीय मुकाबले के आसार

Tue, 22 Feb 2022 12:29 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 22 Feb 2022 12:29 AM IST
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Hathras: If there is a face-to-face collision, there is a possibility of a triangular contest.
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
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जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर मतदान संपन्न हो गया है। अब नतीजों पर सबकी नजर है। तीनों सीटों पर अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। मतदान के बाद सोमवार को भी लोग चुनाव परिणाम को लेकर चर्चाओं में मशगूल रहे और अपने-अपने हिसाब से आकलन करते दिखाई दिए।
कहीं आमने-सामने तो कहीं त्रिकोणीय मुकाबले के आसार बन रहे हैं। चुनाव परिणाम 10 मार्च को आएगा। ऐसे में अब सबको बेसब्री से परिणाम वाले दिन का इंतजार है।
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सादाबाद में रामवीर की प्रतिष्ठा दांव पर, रालोद से मिली कड़ी चुनौती
जिले की सादाबाद विधानसभा सीट पर पूर्व मंत्री और प्रदेश के कद्दावर नेता रामवीर उपाध्याय की प्रतिष्ठा दांव पर है। लगातार पांच बार से जिले की अलग-अलग सीटों से बसपा से विधायक निर्वाचित हुए रामवीर उपाध्याय को इस बार भाजपा ने सादाबाद से मैदान में उतारा। वर्ष 2017 में जब भाजपा की प्रचंड लहर थी।
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तब भी पूरे अलीगढ़ मंडल में भाजपा यह सीट नहीं जीत पाई थी। रविवार को जब मतदान हुआ तो रामवीर का सीधा मुकाबला सपा-रालोद गठबंधन के प्रत्याशी गुड्डू चौधरी से देखने को मिला। रालोद और सपा का परंपरागत वोट गुड्डू चौधरी के खाते में जाता दिखा और साथ ही किसान आंदोलन का असर भी इस सीट पर देखने को मिला।
रालोद मुखिया जयंत चौधरी ने भी इस सीट को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया था और वह कई बार यहां प्रचार करने आए थे। वहीं भाजपा को मतदान के दौरान ध्रुवीकरण से विजय की आस रही। बसपा से डॉ. अविन शर्मा और कांग्रेस से मथुरा प्रसाद ने चुनाव लड़ा। डॉ. अविन शर्मा भी बसपा के सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले के चलते मैदान में उतरे। उल्लेखनीय है कि रामवीर उपाध्याय अस्वस्थ हैं और वह अपना वोट डालने भी नहीं आ सके। रामवीर के परिजनों ने ही उनके चुनाव की कमान संभाली।
हाथसर सदर सीट पर भाजपा से मुकाबला करते दिखी बसपा और सपा
हाथरस सदर सीट पर भाजपा ने वर्तमान विधायक हरीशकंर माहौर का टिकट काटकर आगरा की पूर्व मेयर अंजुला माहौर को मैदान में उतारा था। शुरू में बाहरी होने के कारण अंजुला का विरोध हुआ था लेकिन कुछ अन्य दावेदारों के इस विरोध का आम मतदाताओं में कोई असर नहीं देखने को मिला।
सदर सीट पर योगी और मोदी के नाम पर खासा वोट भाजपा को मिला। इस सीट पर बसपा ने संजीव कुमार काका और सपा ने ब्रजमोहन राही को प्रत्याशी बनाया। सपा आज तक इस सीट पर जीत हासिल नहीं कर पाई। पिछले चुनाव को छोड़ दें तो बसपा लगातार चार बार इस सीट पर विजयी रही है।
मतदान के दौरान जब रुझान देखने को मिले तो इस सीट पर भाजपा और बसपा में टक्कर देखने को मिली। सपा प्रत्याशी भी कई स्थानों पर मुकाबले में दिखाई दिए। कांग्रेस से इस सीट पर कुलदीप कुमार को प्रत्याशी बनाया था।
सिकंदराराऊ में जातीय गणित पर टिकी जीत, मुकाबला त्रिकोणीय
मतदान के दौरान मिले रुझानों से सिकंदराराऊ सीट पर जोरदार मुकाबला देखने को मिला। ठाकुर बाहुल्य इस सीट पर भाजपा को सपा और बसपा से कड़ी चुनौती मिली। जातीय समीकरण इस सीट पर हावी रहे। भाजपा ने जहां वर्तमान विधायक वीरेंद्र सिंह राना को मैदान में उतारा था तो बसपा ने उन्हीं के सजातीय उम्मीदवार अवधेश कुमार सिंह को टिकट दी थी।

सपा ने पिछड़ा वर्ग के डॉ. ललित बघेल पर दांव लगाया था। रुझान में यहां यहां मुकाबला त्रिकोणीय होता नजर आया। भाजपा को जहां ध्रुवीकरण से जीत की उम्मीद रही तो बसपा सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर मैदान में दिखी। सपा को परंपरागत वोट के अलावा पिछड़े वर्ग के मतदाताओं से जीत की आस रही। वैसे रुझान में इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिला।
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