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हाथरस : पत्नी की हत्या मामले में पति को उम्रकैद
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
पत्नी की हत्या मामले में दोषी पाए जाने पर एडीजे कोर्ट संख्या चार ने उसके पति को आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड नहीं देने पर उसे अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार थाना सासनी क्षेत्र के गांव चौब सिंह पुत्र दाताराम निवासी लोहर्रा थाना सासनी की बहन चंद्रकला की शादी सासनी के गांव महुआ की नगरिया (जिरौली) निवासी शिवलाल पुत्र रामस्वरूप के साथ हुई थी। 6 दिसंबर 2016 की सुबह चौब सिंह को सूचना मिली कि उसकी बहन चंद्रकला की हत्या उसके पति शिवलाल ने गला घोंटकर कर दी है। इस सूचना पर चौब सिंह व अन्य लोग गांव महुआ की नगरिया पहुंचे तो वहां देखा कि चंद्रकला का शव मकान की छत पर रखा था और शिवलाल वहां से फरार था। उसने इसकी सूचना पुलिस को दी।
पुलिस ने धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज कर शव का पोस्टमार्टम कराया। आरोपी शिवलाल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। विवेचना के बाद विवेचना अधिकारी ने उसके खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। इस मामले की सुनवाई अपर जिला जज कोर्ट संख्या चतुर्थ पारुल वर्मा के न्यायालय में हुई। दोनो पक्षों के तर्क सुनने के बाद कोर्ट ने आरोपी शिवलाल को दोषी मानते हुए उसे आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न देने पर शिवलाल को छह माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी प्रतिभा सिंह राजपूत ने पैरवी की। संवाद
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पत्नी की हत्या मामले में दोषी पाए जाने पर एडीजे कोर्ट संख्या चार ने उसके पति को आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड नहीं देने पर उसे अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार थाना सासनी क्षेत्र के गांव चौब सिंह पुत्र दाताराम निवासी लोहर्रा थाना सासनी की बहन चंद्रकला की शादी सासनी के गांव महुआ की नगरिया (जिरौली) निवासी शिवलाल पुत्र रामस्वरूप के साथ हुई थी। 6 दिसंबर 2016 की सुबह चौब सिंह को सूचना मिली कि उसकी बहन चंद्रकला की हत्या उसके पति शिवलाल ने गला घोंटकर कर दी है। इस सूचना पर चौब सिंह व अन्य लोग गांव महुआ की नगरिया पहुंचे तो वहां देखा कि चंद्रकला का शव मकान की छत पर रखा था और शिवलाल वहां से फरार था। उसने इसकी सूचना पुलिस को दी।
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पुलिस ने धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज कर शव का पोस्टमार्टम कराया। आरोपी शिवलाल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। विवेचना के बाद विवेचना अधिकारी ने उसके खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। इस मामले की सुनवाई अपर जिला जज कोर्ट संख्या चतुर्थ पारुल वर्मा के न्यायालय में हुई। दोनो पक्षों के तर्क सुनने के बाद कोर्ट ने आरोपी शिवलाल को दोषी मानते हुए उसे आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न देने पर शिवलाल को छह माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी प्रतिभा सिंह राजपूत ने पैरवी की। संवाद
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