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हाथरस : आवास योजना : पंजीकरण किसी और का, लाभ किसी और दिया
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हाथरस : आवास न मिलने से पीड़ित गांव खोंडा निवासी भुल्लन सिंह। संवाद
- फोटो : SADABAD
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सादाबाद (हाथरस)
प्रधानमंत्री आवास योजना में हेराफेरी का मामला सामने आया है। पंजीकरण आईडी किसी की और आवास योजना का लाभ किसी और को दिया गया है। हेराफेरी के चलते डेढ़ साल से आवास के लिए भटक रहे एक गरीब बेसहारा भूमिहीन व्यक्ति को आज तक आवास का लाभ नहीं मिला। इस मामले की शिकायत शनिवार को डीएम और उप्र राजस्व परिषद के सदस्य और नोडल अधिकारी रजनीश गुप्ता के समक्ष पीड़ित ने की।
पीड़ित सहपऊ क्षेत्र के गांव खोंड़ा निवासी भुल्लन सिंह पुत्र विशंभर सिंह ने अधिकारियों को दिए शिकायती पत्र में कहा है कि वह बेसहारा, गरीब और भूमिहीन व्यक्ति है। करीब डेढ़ साल पहले उसका पुराना पैत्रक कच्चा मकान बारिश की वजह से गिर गया था, तब तत्कालीन उपजिलाधिकारी द्वारा उसे गांव के अन्य लोगों के मकान में दया के आधार पर विस्थापित कराया गया था। वह अब भी अन्य लोगों के मकान में ही निवास कर रहा है। उस पर अपना खुद का कोई मकान नहीं है।
उसके परिवार को पात्र मानते हुए आवेदन के पश्चात आवासीय योजना में आवास आवंटित किया गया, जिसका विवरण पात्रता सूची में है और कंप्यूटर में भी दर्ज है। आरोप है कि उसका आवास सरकारी कर्मचारियों व तत्कालीन ग्राम प्रधान, सचिव की मिली भगत से अभिलेखों में दर्ज होने के पश्चात भी किसी अन्य व्यक्ति को प्रदान कर दिया गया। पीड़ित ने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को भी पत्र भेजकर की है। पीड़ित ने पूरे प्रकरण की जांच कराकर आवास योजना के तहत उसे आवास का लाभ दिए जाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की है। संवाद
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प्रधानमंत्री आवास योजना में हेराफेरी का मामला सामने आया है। पंजीकरण आईडी किसी की और आवास योजना का लाभ किसी और को दिया गया है। हेराफेरी के चलते डेढ़ साल से आवास के लिए भटक रहे एक गरीब बेसहारा भूमिहीन व्यक्ति को आज तक आवास का लाभ नहीं मिला। इस मामले की शिकायत शनिवार को डीएम और उप्र राजस्व परिषद के सदस्य और नोडल अधिकारी रजनीश गुप्ता के समक्ष पीड़ित ने की।
पीड़ित सहपऊ क्षेत्र के गांव खोंड़ा निवासी भुल्लन सिंह पुत्र विशंभर सिंह ने अधिकारियों को दिए शिकायती पत्र में कहा है कि वह बेसहारा, गरीब और भूमिहीन व्यक्ति है। करीब डेढ़ साल पहले उसका पुराना पैत्रक कच्चा मकान बारिश की वजह से गिर गया था, तब तत्कालीन उपजिलाधिकारी द्वारा उसे गांव के अन्य लोगों के मकान में दया के आधार पर विस्थापित कराया गया था। वह अब भी अन्य लोगों के मकान में ही निवास कर रहा है। उस पर अपना खुद का कोई मकान नहीं है।
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उसके परिवार को पात्र मानते हुए आवेदन के पश्चात आवासीय योजना में आवास आवंटित किया गया, जिसका विवरण पात्रता सूची में है और कंप्यूटर में भी दर्ज है। आरोप है कि उसका आवास सरकारी कर्मचारियों व तत्कालीन ग्राम प्रधान, सचिव की मिली भगत से अभिलेखों में दर्ज होने के पश्चात भी किसी अन्य व्यक्ति को प्रदान कर दिया गया। पीड़ित ने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को भी पत्र भेजकर की है। पीड़ित ने पूरे प्रकरण की जांच कराकर आवास योजना के तहत उसे आवास का लाभ दिए जाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की है। संवाद
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