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Hathras Birthday: हाथरस को जिला बने हुए 27 साल, न मिला ट्रांसपोर्ट नगर और न बना मेडिकल कॉलेज

Fri, 03 May 2024 10:23 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: चमन शर्मा Updated Fri, 03 May 2024 10:23 PM IST
सार

हाथरस को जिला बने हुए आज 27 साल पूरे हो गए हैं। इतना लंबा समय बीतने के बाद भी यह जिला कई बुनियादी सुविधाओं का मोहताज है। जिला कारागार सहित कई जिला स्तरीय कार्यालय आज तक यहां नहीं खुल सके हैं। ट्रांसपोर्ट नगर बनने का इंतजार आज भी अधूरा है तो मेडिकल कॉलेज का सपना भी टालमटोल में फंसा हुआ है। जिला न्यायालय को अभी तक नया भवन नहीं मिल सका है।

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Hathras has been a district for 27 years
जनपद जनक रामवीर उपाध्याय की मूर्ति का अनावरण करती जिला पंचायत अध्यक्ष व सदर विधायक - फोटो : संवाद

विस्तार

हाथरस के आगरा रोड स्थित अग्रवाल सेवा सदन में शुक्रवार को पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय के परिवार के तत्वावधान में हाथरस जिले की 27वीं वर्षगांठ कार्यकर्ता सम्मेलन के रूप में मनाई। कार्यक्रम आयोजक रामेश्वर उपाध्याय द्वारा सभी अतिथियों का फूलमाला पहनकर स्वागत किया।

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कार्यक्रम की शुरुआत जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा उपाध्याय, भाजपा प्रत्याशी अनूप प्रधान वाल्मीकि व सदर विधायक अंजुला सिंह माहौर ने रामवीर उपाध्याय की प्रतिमा के समक्ष केक काटा। इस बीच रामेश्वर उपाध्याय ने कहा के हाथरस के लोगों की सेवा में तत्पर रहना मैंने बड़े भाई रामवीर उपाध्याय से सीखा है। सीमा उपाध्याय ने कहा, हम जिस मुकाम पर हैं वह सभी मेरे सामने बैठे सभी लोगों की मेहनत व आशीर्वाद की देन है। उपाध्याय जी से सीखा है की किस तरीके से लोगों के सुख-दुख में शामिल होते हुए उनके कामों को करना है। भरोसा दिलाती हूं कि अंतिम सांस तक आप लोगों के के साथ सेवा करूंगी। विधायक अंजुला सिंह माहौर ने ब्राह्मण समाज को अपनी रीड़ की हड्डी बताया। कहा, मेरे राजनीतिक सफर में ब्राह्मण समाज का अहम योगदान रहा है। अनूप प्रधान वाल्मीकि ने कहा कि रामवीर उपाध्याय के अंदर जो चुंबकीय आकर्षण था जो उनसे एक बार मिल लेता था तो उन्हीं का होकर रह जाता था। 
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कार्यक्रम में लगे रामवीर उपाध्याय अमर रहें के नारे 
कार्यक्रम में हिमांशु दीक्षित, रजत चतुर्वेदी, आकाश रावत व उनके साथियों ने जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा उपाध्याय को रामवीर उपाध्याय की पत्थर से बनी एक प्रतिमा भेंट की। जिसे देख सीमा उपाध्याय भावुक हो गईं। कार्यक्रम में रामवीर उपाध्याय अमर रहे के नारों गूंजे। 
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हाथरस जन्मदिवस
कार्यक्रम में ये लोग रहे उपस्थिति
कार्यक्रम को विनोद उपाध्याय, चिराग उपाध्याय, डीपी भारती, शरद माहेश्वरी, श्वेता दिवाकर, सत्यप्रिया आर्य, श्याम सुंदर शर्मा बंटी, ब्रजेश वशिष्ठ, प्रशांत बौहरे, केके दीक्षित, भीकम सिंह चौहान, राकेश शर्मा, दीपक रफी, आशु कवि अनिल बौहरे, नानक चंद्र पचौरी आदि ने संबोधित किया। अध्यक्षता हर स्वरूप शर्मा व व्यापारी आशीष दीक्षित ने की। इस दौरान धर्मेद्र सिंह पीलू ब्लॉक प्रमुख, पिंकी चौधरी, शैलू पहलवान, हर्ष कांत कुशवाहा, निहाल सिंह दिवाकर, प्रवेश परमार, सोमेश यादव, बनवारी लाल सिकरवार, मदन मोहन गौड़, डॉ. महेंद्र पाल शर्मा, रजनीश कुशवाहा, राम प्रकाश नगाइच, चक्रवर्ती पाठक, सुनील गौतम, हरिओम चौधरी, श्याम अग्निहोत्री, बंटी शर्मा, चौधरी राजवीर सिंह, यतेंद्र वैद्य, रामनिवास शर्मा पूर्व प्रधान आदि उपस्थित रहे।

न मिला ट्रांसपोर्ट नगर बसा, न मेडिकल कॉलेज ही बना

हाथरस को जिला बने हुए आज 27 साल पूरे हो गए हैं। इतना लंबा समय बीतने के बाद भी यह जिला कई बुनियादी सुविधाओं का मोहताज है। जिला कारागार सहित कई जिला स्तरीय कार्यालय आज तक यहां नहीं खुल सके हैं। ट्रांसपोर्ट नगर बनने का इंतजार आज भी अधूरा है तो मेडिकल कॉलेज का सपना भी टालमटोल में फंसा हुआ है। जिला न्यायालय को अभी तक नया भवन नहीं मिल सका है।

हाथरस को जिले का तमगा जरूर मिल गया है, लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं के मामले में इसकी हालत कई तहसीलों से भी बदतर है। जिले में स्वास्थ्य सेवाएं बेहद लचर हैं। व्यवसायिक शिक्षा की व्यवस्था नहीं है। हालांकि जिला न्यायालय के नए भवन और जेल के लिए भूमि चयनित हो चुकी है और इनका निर्माण कार्य भी शुरू हो गया है, लेकिन भवन तैयार होने में कितना वक्त लगेगा, इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता। जिले में ट्रांसपोर्ट नगर की मांग काफी पुरानी है। दो दशक पहले इसकी प्रक्रिया शुरू जरूर हो गई, लेकिन आगे नहीं बढ़ सकी। कई अहम ट्रेनों का ठहराव हाथरस जंक्शन स्टेशन पर नहीं होता। यहां के परंपरागत उद्योग-धंधों का भी विकास नहीं हुआ। हींग और रेडीमेड गारमेंट्स उद्योग जरूर ओडीओपी की वजह से कुछ हद तक पनपे हैं, लेकिन उम्मीद से काफी कम हैं।
जिले की वर्षगांठ के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में भावुक हुईं जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा उपाध्याय को समझातीं सदर विधायक
सत्ता बदलने पर इगलास तहसील छिन गई
हाथरस को तीन मई 1997 को बसपा के शासनकाल में जिला बनाया गया था। इसमें तत्कालीन ऊर्जा व परिवहन मंत्री रामवीर उपाध्याय की अहम भूमिका रही। अलीगढ़ जिले की हाथरस, सिकंदराराऊ और इगलास और मथुरा जिले की सादाबाद तहसील को मिलाकर हाथरस को जिले का दर्जा दिया गया, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद तत्कालीन कल्याण सिंह सरकार ने इगलास तहसील को हाथरस से अलग कर फिर से अलीगढ़ जिले में शामिल कर दिया। बाद में मानक पूरे करने के लिए सासनी को तहसील का दर्जा दिया गया। हालांकि इगलास क्षेत्र आज भी हाथरस लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है।

वर्ष 2004 में सरकार ने खत्म कर दिया था जिला
वर्ष 2004 में इस जिले को तत्कालीन मुलायम सिंह सरकार ने समाप्त करने की घोषणा कर दी। स्थिति यह हो गई कि जनपद न्यायालय तो इस जिले में ही संचालित रहा, लेकिन पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्थाएं फिर अलीगढ़ और मथुरा से संचालित होने लगी। इससे जिले की तरक्की पर काफी असर पड़ा और सबकुछ थम गया। लगभग तीन साल बाद वर्ष 2007 में हाईकोर्ट के आदेश पर जिला फिर बहाल हो गया।

उद्योग-धंधों को नहीं मिला प्रोत्साहन

जिला बनने के बाद लोगों को यह उम्मीद थी कि उद्योग-धंधों का काफी विकास होगा। हाथरस फिर एक बार पहले की भांति कानपुर के बाद प्रदेश में दूसरा औद्योगिक शहर माना जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। शहर में रंग-गुलाल उद्योग, दाल उद्योग, हस्तशिल्प के अलावा सिकंदराराऊ के पुरदिलनगर के मूंगा-मोती उद्योग, सासनी के कांच उद्योग, बिसावर के चांदी उद्योग को सरकारी प्रोत्साहन नहीं मिला। ऐसे में हाथरस का दलहन उद्योग, मूंगा-मोती उद्योग, सासनी का कांच उद्योग दम तोड़ गए। शहर के तीन बड़े मिल भी खत्म हो गए।

स्वास्थ्य और शिक्षा में जिला फिसड्डी
हाथरस जिला सबसे ज्यादा स्वास्थ्य सेवाओं में फिसड्डी है। जिला स्तरीय सरकारी अस्पताल हैं, लेकिन यहां भी पर्याप्त चिकित्सक व संसाधन नहीं है। इस जिले के बाद में जो जनपद बने, वहां मेडिकल कॉलेज खुल गए, लेकिन 27 साल बाद भी हाथरस जिले में मेडिकल कॉलेज नहीं बना। छोटी बीमारियों के लिए भी यहां के मरीजों को आगरा या अलीगढ़ भेजा जाता है। यहां सरकारी व्यवसायिक शिक्षा के नाम पर कोई उच्च संस्थान नहीं है। सात दशक पुराने एमजी पॉलीटेक्निक को भी इंजीनियरिंग कॉलेज का दर्जा नहीं मिला।

कई जिला स्तरीय दफ्तर भी नहीं
जिले में अभी भी विकास प्राधिकरण नहीं हैं। भूगर्भ जल विभाग, पर्यटन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण विभाग के कार्यालय नहीं है। नेडा का दफ्तर यहां नहीं हैं। सहकारी बैंक का कार्यक्षेत्र अलीगढ़ और मथुरा जिलों के अधीन है। पिछले 27 साल में जिले में कोई नई नगर पंचायत नहीं बनी और न हीं कोई नया विकास खंड सृजित हुआ।

पांच बार बदला जा चुका है जिले के नाम
हाथरस जिले के नाम पर भी सियासत हुई। बसपा ने अपने शासनकाल में जब इसे जिला घोषित किया तो इसका नाम महामाया नगर रखा। इसके बाद फिर कल्याण सिंह की सरकार बनी तो जिले का नाम हाथरस कर दिया गया। फिर बसपा की सरकार बनने पर जिले का नाम महामाया नगर कर दिया गया। सपा की सरकार बनी तो जिले का नाम फिर हाथरस कर दिया गया।

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