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हाथरस: खतरे से आगाह किया होता तो नहीं होता हादसा
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हाथरस: ओवरब्रिज का पत्थर गिरने से मृत मासूम की मौत पर विलाप करतीं महिलाएं।
- फोटो : SIKANDHRA RAHU
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिकंदराराऊ (हाथरस)
एनएच 91 पर निर्माणाधीन ओवरब्रिज के किनारों पर लगाई जा रहे सीमेंटेड पत्थर लगाने में बरती गई लापरवाही ही 10 वर्षीय बच्चे की मौत की वजह बन गई। इससे पहले भी इस पुल से दो बड़े पत्थर सड़क पर गिर चुके हैं, लेकिन गनीमत रही कि उस वक्त कोई हादसा नहीं हुआ। अगर निर्माण एजेंसी ने इससे सबक लिया होता और इन पत्थरों को गिरने से रोकने के साथ ही यहां चेतावनी बोर्ड लगाकर लोगों को आगाह करने का इंतजाम किया गया होता तो शायद इस मासूम की जान नहीं जाती।
निर्माणाधीन पुल के बगल से कासगंज रोड तक कच्चा रास्ता जाता है, जिस पर पूरे दिन आवागमन रहता है। बता दें कि गांव महामई मार्ग के ऊपर से यह ऊपरगामी पुल बन रहा है। फरीदाबाद गांव के ऊपर से होते हुए यह पुल कासगंज रोड पर जाकर खत्म होता है। इसके सहारे मिट्टी डाली गई है। यहीं से कच्चा रास्ता कासगंज रोड तक जाता है। ऊपरगामी पुल के आसपास महामई और गांव सराय के लोगों के खेत हैं। वहां तक दोनों गांवों के लोगों का आना-जाना रहता है।
निर्माण इकाई ने पुल की मिट्टी की सुरक्षा के लिए बड़े-बड़े पत्थर तो लगा दिए हैं, लेकिन इनको गिरने या सरकने से रोकने का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। अगर पूर्व में हुईं पत्थर गिरने की घटनाओं पर निर्माण इकाई ने गंभीरता दिखाई होती तो शायद इस हादसे को टाला जा सकता था। निर्माण इकाई की इस लापरवाही पर ही गांव वाले गुस्से में थे। ग्रामीणों का कहना है कि अगर यहां पत्थरों के गिरने से संबंधित कोई चेतावनी बोर्ड होता तो शायद आने-जाने वाले लोग यहां से निकलते समय सावधानी बरतते।
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पिता को खेत पर खाना देने जा रहा था मासूम
सिकंदराराऊ। पत्थर दबने से हुए हादसे में मृत 10 वर्षीय बच्चा अपने पिता को खेत पर खाना देने जा रहा था। उसके पिता को क्या पता था कि वह रास्ते में ही दुनिया छोड़ जाएगा। हादसे से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। माता-पिता सदमे की हालत में हैं। घर पर ढांढस बंधाने वालों का तांता लगा हुआ है।
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एनएच 91 पर निर्माणाधीन ओवरब्रिज के किनारों पर लगाई जा रहे सीमेंटेड पत्थर लगाने में बरती गई लापरवाही ही 10 वर्षीय बच्चे की मौत की वजह बन गई। इससे पहले भी इस पुल से दो बड़े पत्थर सड़क पर गिर चुके हैं, लेकिन गनीमत रही कि उस वक्त कोई हादसा नहीं हुआ। अगर निर्माण एजेंसी ने इससे सबक लिया होता और इन पत्थरों को गिरने से रोकने के साथ ही यहां चेतावनी बोर्ड लगाकर लोगों को आगाह करने का इंतजाम किया गया होता तो शायद इस मासूम की जान नहीं जाती।
निर्माणाधीन पुल के बगल से कासगंज रोड तक कच्चा रास्ता जाता है, जिस पर पूरे दिन आवागमन रहता है। बता दें कि गांव महामई मार्ग के ऊपर से यह ऊपरगामी पुल बन रहा है। फरीदाबाद गांव के ऊपर से होते हुए यह पुल कासगंज रोड पर जाकर खत्म होता है। इसके सहारे मिट्टी डाली गई है। यहीं से कच्चा रास्ता कासगंज रोड तक जाता है। ऊपरगामी पुल के आसपास महामई और गांव सराय के लोगों के खेत हैं। वहां तक दोनों गांवों के लोगों का आना-जाना रहता है।
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निर्माण इकाई ने पुल की मिट्टी की सुरक्षा के लिए बड़े-बड़े पत्थर तो लगा दिए हैं, लेकिन इनको गिरने या सरकने से रोकने का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। अगर पूर्व में हुईं पत्थर गिरने की घटनाओं पर निर्माण इकाई ने गंभीरता दिखाई होती तो शायद इस हादसे को टाला जा सकता था। निर्माण इकाई की इस लापरवाही पर ही गांव वाले गुस्से में थे। ग्रामीणों का कहना है कि अगर यहां पत्थरों के गिरने से संबंधित कोई चेतावनी बोर्ड होता तो शायद आने-जाने वाले लोग यहां से निकलते समय सावधानी बरतते।
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पिता को खेत पर खाना देने जा रहा था मासूम
सिकंदराराऊ। पत्थर दबने से हुए हादसे में मृत 10 वर्षीय बच्चा अपने पिता को खेत पर खाना देने जा रहा था। उसके पिता को क्या पता था कि वह रास्ते में ही दुनिया छोड़ जाएगा। हादसे से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। माता-पिता सदमे की हालत में हैं। घर पर ढांढस बंधाने वालों का तांता लगा हुआ है।