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हाथरस : विदेशों तक हरियाली की अलख जगा चुके हैं हाथरस के ग्रीनमैन
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हाथरस : पर्यावरणविद् विजयपाल बघेल।
- फोटो : HATHRAS
गौरव भारद्वाज
हाथरस। यदि लक्ष्य के साथ मंजिल पर नजर हो तो मुकाम निश्चित ही मिलता है। ऐसा ही किया है गांव चंद्रगढ़ी निवासी विजयपाल बघेल ने। उन्होंने नौ साल की उम्र से पौधों के प्रति लगाव रखा। उन्होंने देश-विदेश तक पौधरोपण कर हरियाली की अलख जगाई है। संवाद
दादा से मिली पौधरोपण की प्रेरणा
हाथरस शहर से चंद किलोमीटर दूर गांव चंद्रगढ़ी में जन्मे विजयपाल बघेल अपने दादा के साथ शहर आ रहे थे। जब वह नौ साल के थे तो रास्ते में एक पेड़ कट रहा था। उसमें से पानी निकल रहा था। उन्होंने दादा से पूछा कि इस पेड़ के पानी क्यों निकल रहा है। दादा ने कहा कि वह पेड़ कट रहा है। इसके आंसू निकल रहे हैं। इसके साथ उन्होंने गांव में टोली बनाकर पौधे रोपना शुरू कर दिया। 1993 केंद्रीय पर्यावरण कमलनाथ थे। उनके द्वारा पर्यावरण वाहिनी बनाई गई। उन्हें इसका संयोजक बनाया गया। इससे उनको पर्यावरण की अलख जगाने का अवसर मिल गया।
ऑक्सीजन का कारखाना केवल पेड़
पर्यावरणविद व ग्रीनमैन के नाम से मशहूर विजयपाल ने बताया कि ऑक्सीजन बनाने का कारखाना केवल पेड़ होता है। पेड़ कम हो रहा है, इसलिए सांस कम हो रही हैं। प्रति व्यक्ति के पांच पौधे होने चाहिए। सवा सौ करोड़ की आबादी के हिसाब से 422 व्यक्ति प्रति पेड़ आ रहा है। देश में पौधरोपण की स्थिति दयनीय है। प्रत्येक भारतीय 28 पौधों पर जिंदा है। जो सच में रामभरोसे चल रहा है।
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इन देशों में जगा चुके हैं पौधरोपण की अलख
विजयपाल हिंदुस्तान के अलावा ब्राजील, जापान, भूटान, नेपाल, आस्ट्रेलिया, अमेरिका, इगलैंड और यूएन आदि देशों में पौधरोण की अलख जगा चुके हैं। उन्होंने बताया कि पोरबंदर से लेकर पानीपत तक 14 सौ किलोमीटर ग्रीन वॉल ऑफ इंडिया के तहत पौधरोपण हो रहा है, जो वर्ष 2030 पूरा होगा। इसके लिए भी उन्होंने पदयात्रा निकाली। पोरबंदर से कुरुक्षेत्र तक पांच करोड़ कदम चले। 100 दिन में 16 सौ किलोमीटर चलकर दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात के 28 जिलों में भ्रमण किया लोगों को पौधरोपण के लिए जागरूक किया।
अब जिले में भी कराएंगे पौधरोपण
हाथरस जिले का भूभाग 33 प्रतिशत हरा होना चाहिए, लेकिन मात्र ढाई प्रतिशत ही हरियाली है। मिशन सवा सौ करोड़ के तहत वर्षा ऋतु में डीएम से बात करके बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान भी चलाएंगे। जनक्रांति से हरित क्रांति लाने के लिए अभियान चलाया जाएगा। मुरसान के पास करवन नदी को फिर से उसका बदला स्वरूप वापस दिलाने के लिए मिशन जलशक्ति मंत्री से वार्ता भी हो चुकी है।
पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने भेंट किए कपड़े
विजयपाल का कहना है कि वर्ष 2004 में वह पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के साथ पौधरोपण कर रहे थे। एपीजी अब्दुल कलाम ने कहा कि विजयपाल मन तो हरा है, तन भी हरा कर लो। उन्हें हरे रंग के कपड़े भेंट किए। तब से वह हरे रंग के कपड़े पहन रहे हैं। आस्ट्रेलिया के मेलबर्न में एक कार्यशाला हुई, जिसमें उन्हें प्रमाणपत्र दिया गया। यह प्रमाणपत्र उन्हें ग्रीनमैन के नाम से दिया गया, इसलिए उनका नाम ग्रीनमैन पड़ गया।
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हाथरस। यदि लक्ष्य के साथ मंजिल पर नजर हो तो मुकाम निश्चित ही मिलता है। ऐसा ही किया है गांव चंद्रगढ़ी निवासी विजयपाल बघेल ने। उन्होंने नौ साल की उम्र से पौधों के प्रति लगाव रखा। उन्होंने देश-विदेश तक पौधरोपण कर हरियाली की अलख जगाई है। संवाद
दादा से मिली पौधरोपण की प्रेरणा
हाथरस शहर से चंद किलोमीटर दूर गांव चंद्रगढ़ी में जन्मे विजयपाल बघेल अपने दादा के साथ शहर आ रहे थे। जब वह नौ साल के थे तो रास्ते में एक पेड़ कट रहा था। उसमें से पानी निकल रहा था। उन्होंने दादा से पूछा कि इस पेड़ के पानी क्यों निकल रहा है। दादा ने कहा कि वह पेड़ कट रहा है। इसके आंसू निकल रहे हैं। इसके साथ उन्होंने गांव में टोली बनाकर पौधे रोपना शुरू कर दिया। 1993 केंद्रीय पर्यावरण कमलनाथ थे। उनके द्वारा पर्यावरण वाहिनी बनाई गई। उन्हें इसका संयोजक बनाया गया। इससे उनको पर्यावरण की अलख जगाने का अवसर मिल गया।
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ऑक्सीजन का कारखाना केवल पेड़
पर्यावरणविद व ग्रीनमैन के नाम से मशहूर विजयपाल ने बताया कि ऑक्सीजन बनाने का कारखाना केवल पेड़ होता है। पेड़ कम हो रहा है, इसलिए सांस कम हो रही हैं। प्रति व्यक्ति के पांच पौधे होने चाहिए। सवा सौ करोड़ की आबादी के हिसाब से 422 व्यक्ति प्रति पेड़ आ रहा है। देश में पौधरोपण की स्थिति दयनीय है। प्रत्येक भारतीय 28 पौधों पर जिंदा है। जो सच में रामभरोसे चल रहा है।
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इन देशों में जगा चुके हैं पौधरोपण की अलख
विजयपाल हिंदुस्तान के अलावा ब्राजील, जापान, भूटान, नेपाल, आस्ट्रेलिया, अमेरिका, इगलैंड और यूएन आदि देशों में पौधरोण की अलख जगा चुके हैं। उन्होंने बताया कि पोरबंदर से लेकर पानीपत तक 14 सौ किलोमीटर ग्रीन वॉल ऑफ इंडिया के तहत पौधरोपण हो रहा है, जो वर्ष 2030 पूरा होगा। इसके लिए भी उन्होंने पदयात्रा निकाली। पोरबंदर से कुरुक्षेत्र तक पांच करोड़ कदम चले। 100 दिन में 16 सौ किलोमीटर चलकर दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात के 28 जिलों में भ्रमण किया लोगों को पौधरोपण के लिए जागरूक किया।
अब जिले में भी कराएंगे पौधरोपण
हाथरस जिले का भूभाग 33 प्रतिशत हरा होना चाहिए, लेकिन मात्र ढाई प्रतिशत ही हरियाली है। मिशन सवा सौ करोड़ के तहत वर्षा ऋतु में डीएम से बात करके बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान भी चलाएंगे। जनक्रांति से हरित क्रांति लाने के लिए अभियान चलाया जाएगा। मुरसान के पास करवन नदी को फिर से उसका बदला स्वरूप वापस दिलाने के लिए मिशन जलशक्ति मंत्री से वार्ता भी हो चुकी है।
पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने भेंट किए कपड़े
विजयपाल का कहना है कि वर्ष 2004 में वह पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के साथ पौधरोपण कर रहे थे। एपीजी अब्दुल कलाम ने कहा कि विजयपाल मन तो हरा है, तन भी हरा कर लो। उन्हें हरे रंग के कपड़े भेंट किए। तब से वह हरे रंग के कपड़े पहन रहे हैं। आस्ट्रेलिया के मेलबर्न में एक कार्यशाला हुई, जिसमें उन्हें प्रमाणपत्र दिया गया। यह प्रमाणपत्र उन्हें ग्रीनमैन के नाम से दिया गया, इसलिए उनका नाम ग्रीनमैन पड़ गया।