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हाथरस: गिरते जल स्तर को बचाने की कवायद तेज
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जिले में भूजल सप्ताह अभियान मनाया जा रहा है। इस अभियान के तहत गिरते भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए विभिन्न विभागों की मदद से तमाम प्रयास व लोगों को जागरूक किया जा रहा है। मनरेगा द्वारा इस अभियान की कड़ी में पौधरोपण से लेकर तालाबों की खुदाई और टरिंच बनाए जा रहे हैं।
शासन के निर्देश पर भूजल सप्ताह अभियान मनाया जा रहा है। इसके तहत लघु एवं सिंचाई विभाग को नोडल विभाग नामित किया गया है। लघु एवं सिंचाई विभाग की ओर से जिले में गिरते भूजल स्तर का आकलन किया जाता है। साथ ही विभाग की ओर से इस जलस्तर को बचाए रखने व जल स्तर को बढ़ाने के लिए तमाम तरीके की कार्य योजना तैयार कर उन पर कार्य किया जाता है। वर्तमान में अन्य विभागों को भी इस अभियान में शामिल किया गया है।
बेसिक शिक्षा विभाग से लेकर ग्राम्य विकास विभाग तक को इस अभियान में जोड़ा गया है। अभियान के तहत प्रतियोगिताओं का आयोजन कर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इस क्रम में मनरेगा से कार्य योजना तैयार कर काम किए जा रहे हैं। पीडी एके मिश्रा ने बताया कि अब तक जल संचयन को लेकर 6.39 लाख पौधे रोपे गए हैं। 842 टरिंच, 116 तालाब बनाए जा रहे हैं। अब तक 44 तालाब पूरे हो चुके हैं। जुलाई माह के अंत तक सभी तालाबों का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पांच खेतों में बड़े तालाब भी बनाए गए हैं, जिसके माध्यम से लोगों को रोजगार भी मुहैया हो रहा है।
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दूसरों को नसीहत, खुद पर अमल नहीं
हाथरस। शासन व प्रशासन की ओर से गिरते भूजल स्तर को बचाने के लिए कई उपाय किए जा रहे हैं। यहां तक कि जिला प्रशासन ने सभी सरकारी भवनों व निजी भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के निर्देश जारी किए हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिले की ज्यादातर नई बनी हुई सरकारी बिल्डिंगों में भी वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं बनाए गए हैं।
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जिले में भूजल सप्ताह अभियान मनाया जा रहा है। इस अभियान के तहत गिरते भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए विभिन्न विभागों की मदद से तमाम प्रयास व लोगों को जागरूक किया जा रहा है। मनरेगा द्वारा इस अभियान की कड़ी में पौधरोपण से लेकर तालाबों की खुदाई और टरिंच बनाए जा रहे हैं।
शासन के निर्देश पर भूजल सप्ताह अभियान मनाया जा रहा है। इसके तहत लघु एवं सिंचाई विभाग को नोडल विभाग नामित किया गया है। लघु एवं सिंचाई विभाग की ओर से जिले में गिरते भूजल स्तर का आकलन किया जाता है। साथ ही विभाग की ओर से इस जलस्तर को बचाए रखने व जल स्तर को बढ़ाने के लिए तमाम तरीके की कार्य योजना तैयार कर उन पर कार्य किया जाता है। वर्तमान में अन्य विभागों को भी इस अभियान में शामिल किया गया है।
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बेसिक शिक्षा विभाग से लेकर ग्राम्य विकास विभाग तक को इस अभियान में जोड़ा गया है। अभियान के तहत प्रतियोगिताओं का आयोजन कर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इस क्रम में मनरेगा से कार्य योजना तैयार कर काम किए जा रहे हैं। पीडी एके मिश्रा ने बताया कि अब तक जल संचयन को लेकर 6.39 लाख पौधे रोपे गए हैं। 842 टरिंच, 116 तालाब बनाए जा रहे हैं। अब तक 44 तालाब पूरे हो चुके हैं। जुलाई माह के अंत तक सभी तालाबों का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पांच खेतों में बड़े तालाब भी बनाए गए हैं, जिसके माध्यम से लोगों को रोजगार भी मुहैया हो रहा है।
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दूसरों को नसीहत, खुद पर अमल नहीं
हाथरस। शासन व प्रशासन की ओर से गिरते भूजल स्तर को बचाने के लिए कई उपाय किए जा रहे हैं। यहां तक कि जिला प्रशासन ने सभी सरकारी भवनों व निजी भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के निर्देश जारी किए हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिले की ज्यादातर नई बनी हुई सरकारी बिल्डिंगों में भी वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं बनाए गए हैं।