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हाथरस : किसानों और अधिवक्ताओं ने सौंपा एसडीएम को ज्ञापन
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हाथरस : सासनी में एसडीएम को ज्ञापन देते भाकियू के कार्यकर्ता।
- फोटो : SASNI
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सासनी (हाथरस)
राष्ट्रव्यापी चक्का जाम के स्थगित होने की घोषणा के बाद भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने शनिवार को चौधरी मलखान सिंह व दी बार एसोसिएशन के सदस्यों ने पीके सिंह के नेतृत्व में राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन एसडीएम राजकुमार को सौंपा। ज्ञापन में आंदोलनकारी किसानों की मांगें पूरी करने की मांग की गई है।
ज्ञापन में तीनों नए कृषि कानूनों को वापस लेने, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करते हुए किसानों को उनकी फसल का लाभकारी मूल्य दिलाने का कानून में प्राविधान करने, 26 जनवरी के दिन हुई घटना के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए निर्दोष किसान नेताओं को रिहा किए जाने, आंदोलन के लिए जा रहे किसानों को रास्ते में न रोके जाने, धारा 144 के तहत किसानों की पंचायतों पर रोक न लगाने की मांगें उठाई गई हैं।
इस मौके पर संदीप चौधरी, विनीत चौधरी, हरवीर सिंह तोमर, धर्मवीर सिंह, रहमान खां, रामवीर सिंह, रघुराज सिंह, लक्ष्मीराज सिंह, रामबाबू सिंह चौहान, रामखिलाड़ी, बाबू सिंह, ओमप्रकाश, राजकुमार ठेनुआं, हरिमोहन, विमल कुुमार, जहांगीर खां, राजू, प्रदीप उपाध्याय, उमाशंकर बांगड़, राजकुमार कौशिक, दीपेश, हरिमोहन, विमल, विजय सिंह, श्यामवीर सिंह आदि किसान नेताओं के अलावा अधिवक्ताओं में प्यारेलाल शर्मा, कृष्ण सिंह, सुभाष सिंह, राजेश शर्मा, महेंद्रपाल, केपी सुमन, संजीव कुमार, योगेंद्र सिंह, चंद्रपाल सिंह, प्रशांत पाठक, मधुकर नगाइच, योगेश शर्मा आदि शामिल थे।
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राष्ट्रव्यापी चक्का जाम के स्थगित होने की घोषणा के बाद भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने शनिवार को चौधरी मलखान सिंह व दी बार एसोसिएशन के सदस्यों ने पीके सिंह के नेतृत्व में राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन एसडीएम राजकुमार को सौंपा। ज्ञापन में आंदोलनकारी किसानों की मांगें पूरी करने की मांग की गई है।
ज्ञापन में तीनों नए कृषि कानूनों को वापस लेने, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करते हुए किसानों को उनकी फसल का लाभकारी मूल्य दिलाने का कानून में प्राविधान करने, 26 जनवरी के दिन हुई घटना के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए निर्दोष किसान नेताओं को रिहा किए जाने, आंदोलन के लिए जा रहे किसानों को रास्ते में न रोके जाने, धारा 144 के तहत किसानों की पंचायतों पर रोक न लगाने की मांगें उठाई गई हैं।
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इस मौके पर संदीप चौधरी, विनीत चौधरी, हरवीर सिंह तोमर, धर्मवीर सिंह, रहमान खां, रामवीर सिंह, रघुराज सिंह, लक्ष्मीराज सिंह, रामबाबू सिंह चौहान, रामखिलाड़ी, बाबू सिंह, ओमप्रकाश, राजकुमार ठेनुआं, हरिमोहन, विमल कुुमार, जहांगीर खां, राजू, प्रदीप उपाध्याय, उमाशंकर बांगड़, राजकुमार कौशिक, दीपेश, हरिमोहन, विमल, विजय सिंह, श्यामवीर सिंह आदि किसान नेताओं के अलावा अधिवक्ताओं में प्यारेलाल शर्मा, कृष्ण सिंह, सुभाष सिंह, राजेश शर्मा, महेंद्रपाल, केपी सुमन, संजीव कुमार, योगेंद्र सिंह, चंद्रपाल सिंह, प्रशांत पाठक, मधुकर नगाइच, योगेश शर्मा आदि शामिल थे।
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